सौ दिनी एजेंडे में उलझी मनमोहन की केबिनेट

अपन जानते हैं दसवीं के इम्तिहान का एक बोर्ड नहीं हो सकता। सो अपन ने कल इस पर ज्यादा तवज्जो नहीं दी। सभी प्रांतों की संस्कृति, इतिहास, भाषा-बोली अलग-अलग। मौसम के मुताबिक छुट्टियों-इम्तिहानों का वक्त भी अलग-अलग। सो एक बोर्ड की बात देश में नया बवाल खड़ा करेगी। अपन ने सिब्बल की उन्हीं योजनाओं की तारीफ की। जो तारीफ के काबिल। वैसे जितनी तारीफ अपन ने कर दी। उतनी कांग्रेसी भी करने को तैयार नहीं। शुक्रवार को कांग्रेस का एक महासचिव सिब्बल पर बरसा। महासचिव आन रिकार्ड कहने को तैयार नहीं। पर इसका मतलब यह नहीं- पार्टी में बवाल नहीं होगा। उनने कहा- 'यशपाल कमेटी कोई सुप्रीम कोर्ट का फरमान नहीं। जो सिब्बल ने फौरन मान ली। पहले एक्सपर्ट कमेटी बैठे। फिर राज्यों से राय ली जाए। सहमति वाले मुद्दे लागू हों।' उनने कहा- 'इस तरह तो एजुकेशन का सत्यानाश हो जाएगा।' बताते जाएं- महासचिव खुद लेक्चरार रहे हैं। अब बात दूसरे लेक्चरार रहे मुरली मनोहर जोशी की। बोले- 'एक बोर्ड की योजना विनाशकारी। शिक्षा को चौपट मत करो। इससे तो अच्छा है सौ दिन में कुछ मत करो।' उनने याद दिलाया- एजुकेशन समवर्ती सूची में। केंद्र की मनोपली नहीं। अपन ने कल विदेशी यूनिवर्सिटियों का नुकसान बताया था। जोशी भी इस पर खफा दिखे। बोले- 'सिब्बल का इरादा एजुकेशन में विदेशी दखलंदाजी बढ़ाने का।' कांग्रेस-बीजेपी के इन पूर्व लेक्चरारों ने सिब्बल को अनाड़ी बताया। सौ दिनों की हड़बड़ी पर दोनों खफा। मनमोहन ने अपनी केबिनेट को सौ दिन की बीमारी लगा दी। हर मंत्री सौ दिनी एजेंडा बता रहा। वैसे सरकार के पैंतीस दिन बीत चुके। बुधवार को दयानिधि मारन एजेंडा लेकर आए। तो गुरुवार को कपिल सिब्बल। शुक्रवार सुबह वीरप्पा मोइली। तो शाम को अलगरी। मोइली प्रेस एसोसिएशन के सेमीनार में बोले। लॉ मिनिस्टर विवाद में पड़ने से बचे। वैसे सिब्बल से ज्यादा विवाद तो मोइली के एजेंडे पर होगा। आपको पता है- जज अपनी जायदाद घोषित करने को तैयार नहीं। उम्मीदवार चुनाव से पहले अपनी जायदाद बताए। यह फैसला जजों का ही था। यों जायदाद को छुपाकर रखना चाहता है हर कोई। मंत्री अपनी जायदाद का ब्योरा देने को तैयार नहीं। मनमोहन भी इस पर गंभीर नहीं। अपन नहीं जानते भ्रष्टाचार पर कैसे काबू पाएंगे। वैसे उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने मंत्रियों को फंसा दिया। हुकुम दिया है- राज्यसभा मंत्रियों की जायदाद का ब्योरा मांगेगी। पर बात हो रही थी जजों की जायदाद पर। बंगाल हाईकोर्ट के जज सोमित्र सेन पर महाभियोग लग चुका। अंसारी ने सुप्रीम कोर्ट के जज डीके जैन से रपट मांगी। पर बात वीरप्पा मोइली की। उनने कहा है- 'जजों को बतानी होगी जायदाद। सरकार सौ दिन में लाएगी बिल।' देखते हैं इस एजेंडे का क्या होगा। ताकि सनद रहे, सो याद दिला दें। भ्रष्टाचार में वी रामास्वामी पर महाभियोग चला। तो नरसिंह राव की सरकार थी। कपिल सिब्बल ने लोकसभा में वी रामास्वामी की पैरवी की। वह 11 मई 1993 का काला दिन था। अपन लोकसभा की प्रेस गैलरी में बैठे चश्मदीद गवाह। महाभियोग पर वोटिंग का वक्त आया। तो कांग्रेसी सांसदों ने बचा लिया। पर बाद में जग हंसाई से बचने के लिए रामास्वामी से इस्तीफा करवाया। जब से संविधान लागू हुआ। तब से महाभियोग के जरिए कोई जज नहीं हटा। सिर्फ एक जज बर्खास्त हुआ था- 'शिव प्रसाद सिन्हा।' गवर्नर जनरल सी राजगोपालाचार्य के दस्तखत से 1949 में। पर बात सौ दिन के एजेंडे की। अपन को इससे ज्यादा महिला आरक्षण बिल का इंतजार। पर ताजा फच्चर बता दें- सर्वदलीय बैठक तो क्या होगी। फिलहाल तो कांग्रेस में ही विरोध शुरू। कांग्रेस के एक महासचिव ने मोर्चा खोल लिया। बोले- 'रोटेशन प्रणाली सारी राजनीतिक व्यवस्था चौपट कर देगी। कोई सांसद गंभीरता से काम नहीं करेगा। दागी सांसद अपनी पत्नियों को टिकट दिला देंगे।' इसे आप कोरी बयानबाजी मत मानिए। फच्चर का असर दिखने लगा। तभी तो अभी सर्वदलीय बैठक नहीं हुई।

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