कांग्रेस में आज केक कटेंगे, बीजेपी में मातम

राहुल गांधी को जन्मदिन की बधाई। दिग्गी राजा अपनी पार्टी के राजकुमार का जन्मदिन मनाएंगे। अपन न तो राजा लिख सकते हैं, न राजकुमार। यह है कांग्रेस का नया फरमान। फरमान अपनी सिर आंखों पर। देर आयद, पर दुरुस्त आयद। अपन बात कर रहे थे राहुल के जन्म दिन की। तो दिग्विजय सिंह आज यूपी में जाएंगे। दलितों के साथ बैठकर लंच करेंगे। नाम रखा है समरसता दिवस। दिग्विजय सिंह खुद राज परिवार से। अपने जन्मदिन पर दलितों के साथ लंच करते। तो अच्छा भी लगता। जैसे राहुल महासचिव। वैसे ही वह खुद कांग्रेस के महासचिव। दस साल मध्यप्रदेश के सीएम भी रह चुके। पर बात सिर्फ दिग्विजय सिंह की नहीं। बात सारी कांग्रेस पार्टी की। अपन को यह तो नहीं पता- राहुल गांधी आज खुद कहां होंगे। पर एक हैं जगदीश शर्मा। उनने 39 किलो का केक बनवाया है। जो शायद वह खुद ही काटें। जगदीश शर्मा के बारे में बताते जाएं- कांग्रेस देश में कहीं भी जीते। सोनिया के घर के बाहर बैंड बाजा लेकर पहुंच जाएंगे। गांधी परिवार के सदस्यों का जन्मदिन मनाने का भी रिकार्ड। सोनिया हो या प्रियंका। या फिर अब राहुल गांधी। दिल्ली के महंगे मालचा मार्ग में रहते हैं जगदीश शर्मा। उनके घर पर लगी राहुल की सभी फोटू पगड़ी वाली। पूछा- ‘ऐसा क्यों?’ तो बोले- ‘शायद अब पगड़ी बांधने का वक्त आ गया।’ अपने यहां पगड़ी पहनने के दो रिवाज। पहला- जब घर के बड़े होने की जिम्मेदारी दी जाए। दूसरा- शादी के वक्त। अब उनने शादी की पगड़ी पहनने की बात कही। या प्रधानमंत्री पद की। यह अंदाज आप खुद लगाएं। पर राहुल बाबा आज होंगे कहां? मोती लाल वोरा इस सवाल पर दुविधा में फंस गए। बोले- ‘शायद अमेठी में होंगे।’ तब किसी ने कहा- ‘वह तो देश में ही नहीं। विदेश में अपने खास मित्रों के साथ।’ तो वोरा बोले- ‘आ जाएंगे, कितनी देर लगती है।’ पर इस जानकारी के बाद वोरा सावधान हुए। खबरचियों की दूसरी टोली ने पूछा। तो वह बोले- ‘मुझे पता नहीं। पता करना पड़ेगा।’ यानी राहुल गांधी खुद अपना जन्म दिन कहां मनाएंगे। किसी को पता नहीं। पर बकौल मोती लाल वोरा उनने निर्देश दिया है- ‘मुझे गुलदस्ते न भेजे जाएं। अलबत्ता कांग्रेस वर्कर दलितों के साथ मिल बैठें।’ कांग्रेस राहुल का जन्मदिन राष्ट्रीय सामाजिक समरसता के रूप में मनाएगी। यह निर्देश सब जगह पहुंच चुका। पर जगदीश शर्मा जैसे हजारों कांग्रेसी वर्कर तो केक ही काटेंगे। इधर आज केक कट रहे। उधर बीजेपी में मातम की हालत। आज से ही बीजेपी की मीटिंग शुरू होगी। शनि-इतवार को वर्किंग कमेटी बैठेगी। अपन वर्किंग कमेटी की वजह नहीं जानते। हार की पड़ताल इतनी बड़ी वर्किंग कमेटी में कैसे होगी। सब अपना-अपना गुब्बार जरूर निकाल लेंगे। वैसे जिनके मन में ज्यादा गुब्बार था। वह यशवंत सिन्हा तो होंगे नहीं। उनने इस्तीफा देकर अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार ली। वरना वही पैर वर्किंग कमेटी में जाने के काम आते। वह अरुण जेटली भी नहीं होंगे। जिन पर सारा नजला उतर रहा। वह सुधींद्र कुलकर्णी भी नहीं होंगे। जो चंडूखाने के रणनीतिकार साबित हुए। कहने को राजनाथ सिंह कहेंगे- रणनीतिक टीम तो आडवाणी की थी। यह सोलह आने सही होगा। पर चुनाव तो बीजेपी लड़ रही थी। जिसके मुखिया वह खुद। कोई माने, न माने। पर पार्टी और रणनीतिक टीम में कोई तालमेल नहीं। यही हाल राज्यों में भी था। जैसे अपन उत्तराखंड को ही लें। खंडूरी का न बच्ची सिंह रावत से तालमेल था, न भगत सिंह कोश्यारी से। हिम्मत हो, तो कोश्यारी जैसी। उनने राजनाथ की धमकी के बाद राज्यसभा से इस्तीफा भेजा। अब आडवाणी खेमा यह कहने से नहीं चूक रहा- कोश्यारी को राजनाथ की शह। इसी शह और मात में तो मातम के दिन पर आ पहुंची बीजेपी।

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