'मौकापरस्ती ही राजनीति' कुमारस्वामी उवाच

बीजेपी को अभी भी उम्मीद। देवगौड़ा की नौटंकी अब अनाड़ियों को भी समझ आ चुकी। पर बीजेपी पार्लियामेंट्री बोर्ड को समझ नहीं आई। जमीनी हकीकत से कितनी दूर चली गई बीजेपी। जब छोटी-छोटी राजनीतिक चालें समझ न आएं। तो पार्टी का मेंटल लेवल कितना गिर गया होगा। अपन को अंदाज लगाने में मुश्किल नहीं। चेन्नई आईआईटी के एक प्रोफेसर हैं इंद्रसेन। उनने एक थ्योरी दी। थ्योरी में कहा गया- 'हर शख्स अपने इर्द-गिर्द अपने से कम दिमाग वाले लोग जमा करता है।' यह थ्योरी इंद्रसेन थ्योरी के नाम से मशहूर। अपन को लगता है बीजेपी भी इसी थ्योरी पर बा-अमल। इंडिया शायनिंग के भ्रम से भी कुछ नहीं सीखा। भ्रम था- 'देश चमक रहा है। पार्टी फिर से सत्ता में आएगी। वोटर हाथों-हाथ लेंगे।' पर जब वोटर ने फैसला सुनाया। तो बीजेपी के हाथों के तोते उड़ गए। बीजेपी लीडरशिप में अब अपन को कोई दूरदर्शी नहीं दिखता। अब देखो, देवगौड़ा ने बेंगलूर में कहा- 'अट्ठारह अक्टूबर को जेडीएस बहुमत साबित करेगी।' बेंगलूर में ही कुमारस्वामी बोले- 'मैं उस बीजेपी को सत्ता कैसे सौंप दूं। जिसके लीडर मेरा, मेरे परिवार, मेरी पार्टी का अंतिम संस्कार करने में लगे हैं।' कुमारस्वामी ने मनमोहन सिंह जैसा आरोप लगाया। कुछ दिन पहले ऐसा ही आरोप मनमोहन ने लगाया था। कुमारस्वामी बोले- 'सुषमा  बेल्लारी में वारामाहलक्ष्मी पूजा कर रही थी। वहां के बीजेपी लीडर मेरे और मेरे परिवार की छवि मटियामेट कर रहे थे। बीजेपी आलाकमान लंबी तानकर सोया रहा।' ताकि सनद रहे। सो याद करा दें। बाप-बेटे ने  ऐसी ही बातें बीस महीने पहले कांग्रेस के बारे में कही थी। अब यह बातें भी बीजेपी बोर्ड को समझ न आए। तो बीजेपी का रब ही राखा। अपन को जैसी उम्मीद थी। हू-ब-हू वही हुआ। देवगौड़ा बीजेपी बोर्ड मीटिंग से पहले दिल्ली नहीं आए। राजनाथ को अब भी भरोसा- देवगौड़ा शुक्रवार को दिल्ली आकर पहले उनसे मिलेंगे। पर अपनी मानिए। तो देवगौड़ा आज भी नहीं मिलेंगे। उनने पीएसी की मीटिंग शाम को बुलाई है। देर रात तक चलेगी। सलाह मशविरा नहीं होगा। अलबत्ता सेक्युलरिज्म पर भाषणबाजी होगी। शनिवार को राजनाथ से मिलेंगे देवगौड़ा। फिर सेक्युलरिज्म की पांच शतर्ें रखेंगे। पहली- मेंगलूर के दंगाईयों को कटघरे में खड़ा किया जाए। मेंगलूर नगर पालिका में बीजेपी ने हाल ही में झंडा गाड़ा। दूसरी- चिकमंगूलर की दत्ता पीठ का झगड़ा खत्म करे। वही ईदगाह मैदान पर तिरंगा फहराने वाला विवाद। तीसरी- बेंगलूर-मैसूर कॉरिडोर परियोजना से अशोक खेन्नी को बाहर किया जाए। बीजेपी खेन्नी की हिमायती। देवगौड़ा सख्त खिलाफ। चौथी- बीजेपी पंद्रह सीटों पर उम्मीदवार खड़े न करने का वचन दे। ये बीजेपी के वे इलाके। जहां लोकल चुनाव में जेडीएस ने सेंध लगाई। पांचवीं- बेल्लारी के बीजेपी लीडरों जनार्दन रेड््डी-श्रीरामल्लू के खिलाफ कार्रवाई हो। उन्हें मंत्री भी न बनाया जाए। जनार्दन ने कुमारस्वामी पर डेढ़ सौ करोड़ रुपए कमाने का आरोप लगाया। श्रीरामल्लू ने कुमारस्वामी पर हत्या की एफआईआर दर्ज कराने की कोशिश की। अब बीजेपी कुमारस्वामी की ये पांचों शर्तें माने। तो अपनी कब्र खुद खोदेगी। वैसे पार्लियामेंट्री बोर्ड का फैसला देखा। तो अपन को लगा- बीजेपी अपनी कब्र खोदना शुरू कर ही चुकी। इतनी बातों के बाद भी बीजेपी को कुर्सी का मोह नहीं गया। मीटिंग के बाद यशवंत सिन्हा बोले- 'देवगौड़ा दिल्ली में राजनाथ  से मिलेंगे। उसके बाद शनिवार को बोर्ड फिर बैठेगा।' यों बाप-बेटा कोशिश करेंगे- 'पहली जनवरी तक सीएम रहने की मोहलत मिल जाए।' पर कौन जाने। कांग्रेस से बात भी चल रही हो। वैसे अर्जुन-पाटिल ने इंकार किया। पर दोनों ने यह भी कहा- 'बीजेपी दक्षिण में सत्ता संभालने की उम्मीद छोड़ दे।' कहीं कुछ पक तो नहीं रहा। आखिर कुमारस्वामी ने यह भी तो कह दिया- 'मुझे भरोसा नहीं। बीजेपी साढ़े पांच करोड़ जनता के हितों की रक्षा करेगी। सत्ता में आकर हिंदुत्व का एजेंडा शुरू कर दे तो?' और उनने यह भी कहा- 'राजनीति का दूसरा नाम मौकापरस्ती।'

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