जेना को केबिनेट दर्जा देकर मनाएंगे मनमोहन

मनमोहन का मंत्रिमंडल तो बन चुका। प्लेनिंग कमिशन भी निपट चुका। संसद के गलियारों में अब रेवड़ियों की गुफ्तगू। गलियारों से लेकर सेंट्रल हाल तक। जिसे देखो, कोई नई अफवाह सुनाएगा। अफवाहों के जोर का नमूना देखिए। सेंट्रल हाल में बतिया रहे केबिनेट मंत्री से एक नियुक्ति के बारे पूछा। तो बोले- 'फलां नाम की अफवाह सुनी है।' मंत्री अफवाह की बात करें। तो अंदाज लगाइए क्या-क्या चल रहा होगा। मंत्री के मुंह से अफवाह का लफ्ज सुनते ही अपन मुस्कराए। तो उनने सफाई दी- 'पीएम ने मुझसे बात नहीं की। सो सुनी-सुनाई बात को मैं अफवाह ही कहूंगा।' बात अफवाहों की चल ही पड़ी। तो बताते जाएं- पीएम का मीडिया सलाहाकर कौन होगा? अब इस को लेकर कुछ अटकलें। तो कुछ अफवाहें। पर कुछ गंभीरता भी। मनमोहन ने पिछली बार संजय बारु को चुना था। संजय बारु न कांग्रेसी थे, न कांग्रेस के करीब। न ही राजनीतिक पत्रकारिता का इतिहास। वह एक आर्थिक अखबार के संपादक थे। चुनावों से कोई आठ-दस महीने पहले रास्ता नाप गए। सिंगापुर में अर्थशास्त्र पढ़ाने चले गए। तो मनमोहन ने कोई नई कसरत नहीं की। उनने पीआईबी की डायरैक्टर जनरल दीपक संधु को मीडिया एडवाईजर बना लिया। पर अब के राजनीतिक पंडित टाईप एडवाईजर की चर्चा। अपने कानों में सिर्फ एक नाम की चर्चा पड़ी। वह है- हिंदू के राजनीतिक संपादक हरीश खरे। यों अफवाह तो एच.के. दुआ की भी थी। पर दुआ ने इनकार किया है। बताते जाएं- दुआ अब ट्रिब्यून के चीफ एडीटर। वैसे वह दो-दो प्रधानमंत्रियों के मीडिया एडवाईजर रह चुके। पहले एच.डी. देवगौड़ा के। फिर अटल बिहारी वाजपेयी के। बाद में वाजपेयी ने दुआ को डेनमार्क का राजदूत भी बनाया। अपन जब पीएम के साथ डेनमार्क गए। तो एक भारतीय रस्टोरेंट में दुआ की दावत में शरीक हुए। पर अपन को एक मंत्री बता रहा था- 'पीएम संजय बारु को बुला रहे हैं।' पर बात सिर्फ तैनाती की नहीं। गवर्नरों-राजदूतों की तैनातियों पर भी अटकलों का बाजार। सीबीएसई के चेयरमैन की बात हो तो। अर्जुन सिंह जाते-जाते कमाल कर गए। उनने एमपी काडर की आईपीएस प्रज्ञा श्रीवास्तव की सिफारिश कर दी। तब पृथ्वीराज चह्वाण डीओपीटी के प्रभारी मंत्री थे। मध्य प्रदेश से जुड़े हर केंद्रीय मंत्री ने सिफारिश की। पर पृथ्वीराज का एतराज था- 'एजुकेशन में आईपीएसी का क्या काम।' तो एक दिन अर्जुन सिंह का फोन आया- 'आप से मिलने आ रहा हूं।' पृथ्वीराज ठहरे जूनियर। सो उनने कहा- 'नहीं, मै आ रहा हूं।' वहीं प्रज्ञा श्रीवास्तव पर बात हुई। पर बात किसी नतीजे पर नहीं पहुंची। अर्जुन सिंह भी अड़े रहे। वह पंद्रह मई का दिन था- जब वह आखिरी दिन दफ्तर गए। चुनाव नतीजे से ठीक एक दिन पहले। उनने प्रज्ञा श्रीवास्तव की तैनाती फाईल दस्तखत करके खिसका दी। पर अर्जुन सिंह की यह सिफारिश कपिल सिब्बल ने रोक दी। आईपीएस को सीबीएसई का चेयरपर्सन बनाने पर कड़ा ऐतराज। पर बात चली थी गवर्नरों की। तो फिलहाल मधुकर गुप्ता को त्रिपुरा भेजने की चर्चा। मध्य प्रदेश, बिहार के गवर्नरों का क्या होगा। इसी महीने रिटायरमेंट। जाखड़ को तो तय नहीं। पर रघुनंदन लाल भाटिया के बने रहने की उम्मीद। चर्चा मंत्रिमंडल की भी कम नहीं। श्रीकांत जेना की नाराजगी अपन ने बताई ही थी। वह सीपी जोशी के नीचे चार्ज नहीं ले रहे। सो जेना को केबिनेट मंत्री बनाने की चर्चा। मीरा कुमार का खाली मंत्रालय जल संसाधन मिलेगा। छत्तीसगढ़ को नुमाईदंगी की भी बात। एक ही तो जीते हैं- चरण दास महंत। राज्यमंत्री हो जाएंगे। कुछ राज्यमंत्रियों के विभागों में फेरबदल भी संभव। बात मंत्रिमंडल की चल ही पड़ी। तो बता दें- कांग्रेस की अजित सिंह से बात टूटी नहीं। बात बन गई। तो अजित सिंह का बेटा जयंत चौधरी हो जाएगा मंत्री।

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