कश्मीर में भारत से गलती कहां हुई 

Publsihed: 25.Jun.2017, 13:35

हाल ही के भारत-पाकिस्तान क्रिकेट मैच में पाकिस्तान की जीत के बाद जिस तरह घाटी के पांच जिलों में जश्न मनाया गया, उस ने इन सम्भावनाओं को पूरी तरह नकार दिया है कि अब घाटी के मुसलमानों से बातचीत का रास्ता खुल सकता है | 
अजय सेतिया / अब किसी को यह मानने में संकोच नहीं होना चाहिए कि जम्मू कश्मीर के पांच जिले मुस्लिम कट्टरपंथ का शिकार हो चुके हैं | हालांकि यह कहने की जरूरत नहीं कि कश्मीर भारत के हाथ से निकल चुका है, जैसा कि पी.चिदम्बरम और मणिशंकर अय्यर ने कहा है | इन हालातों की बुनियाद तो 1984 से 1989 के बीच में रखी गई थी , जब राजीव गांधी  प्रधानमंत्री और जगमोहन  राज्यपाल थे | इन्हीं पांच सालों में जम्मू कश्मीर में आतंकवाद पनपा और फला फूला | फारूक अब्दुल्ला को अपदस्थ कर के जीएम शाह को मुख्मंत्री बनाया गया और फिर फारूक से समझौते कर के शाह को हटा कर फारूख को मुख्यमंत्री बनाया गया | इसी राजनीतिक खेल ने कश्मीर में आतंकवाद के बीज बौ दिए थे , फिर 1987 के  चुनाव ने आग में घी का काम किया , जब पूरी तरह फर्जी चुनाव करवा कर फारूक अब्दुला को मुख्यमंत्री बनवाया गया | वीपी सिंह के शासनकाल में जब गृहमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रुबिया का अपहरण हुआ , तब हालात सुधारने के लिए फारूक अब्दुला के विरोध को दरकिनार कर जगमोहन को दुबारा गवर्नर बनाया गया था  | लेकिन जगमोहन के वहां चार्ज लेते ही हालात और विस्फोटक हो गए | जगमोहन के पद ग्रहण करने वाले दिन 19 जनवरी 1990 की रात को ही मस्जिदों के लाऊड स्पीकरों से हिन्दुओं को घाटी खाली करने के फरमान जारी होने शुरू हो गए थे | 

जिस समय मस्जिदों से हिन्दुओं को घाटी खाली करने का फरमान जारी हो रहा था, उसी रात अर्धसैनिक बलों ने श्रीनगर में छापेमारी कर के हथियार और सैंकड़ों लोग गिरफ्तार कर लिए | अगले दिन मुसलमानों ने प्रदर्शन किया तो अर्धसैनिक बलों ने फायरिंग कर दी, जिस में ग्वाकदल पुल पर 50 प्रदर्शनकारी मारे गए | फारूक अब्दुल्ला ने मौक़ा देख तुरंत इस्तीफा दे दिया और राज्य में राज्यपाल शासन के साथ साथ स्पेशल पावर एक्ट लागू हो गया | यही वह नाजुक समय था , जब पाक प्रायोजित आतंकवाद से मुकाबला करने के लिए कश्मीरी मुसलमानों को विशवास में लेने के प्रयास किए जाने चाहिए थे | कश्मीरी पंडितों और मुअजिज कश्मीरी मुसलमानों की बैठकें करवा कर हिन्दू मुस्लिम एकता को बनाए रखने की अपीलें जारी करवाई जानी चाहिए थी | लेकिन जगमोहन हालात को नहीं संभाल पाए और कश्मीरी पंडितों को घाटी से निकल जाना पडा | कुछ लोगों का कहना है कि जगमोहन ने कश्मीरी पंडितों को सुरक्षा प्रदान करने की बजाए उन्हें वहां से निकाल कर  कश्मीर को मुस्लिम कट्टरपंथियों के हवाले करने में मदद की | जो पाकिस्तान को अपना जाल फैलाने में के लिए मददगार साबित हुई | बाद में नरसिंह राव , इंद्रकुमार गुजराल और अटल बिहारी वाजपेयी ने हुर्रियत नेताओं से बातचीत शुरू कर के कश्मीर समस्या को सुलझाने की बहुत कोशिश की थी, लेकिन समाधान नहीं निकला | 

मनमोहन सिंह के दस साल कश्मीर के हालात संभालने के लिए बहुत महत्वपूर्ण थे , लेकिन पाकिस्तान ने पहले अटल बिहारी वाजपेयी और बाद में मनमोहन सिंह को 15 साल बातों में उलझाए रखा | आतंकवाद भी हो रहा था, सीधी बातचीत भी हो रही थी और ट्रेक-टू बातचीत भी हो रही थी | इस के बावजूद बातचीत कभी समाधान की तरफ नहीं मुडी क्योंकि पाकिस्तान और कट्टरपंथियों के दबाव में हुर्रियत नेता कश्मीरियत की बात छोड़ कर धीरे धीरे  इस्लाम की ओर मुड़ चुके है | कश्मीर में अब जनमत संग्रह या आज़ादी की नहीं, अलबत्ता इस्लाम की लड़ाई है, जहां आईएस के झंडे बैनर लहराए जाते हैं | घाटी के इन पांच जिलों को बातचीत के जरिए सेक्यूलरिज्म के रास्ते पर लाना असम्भव है | हाल ही के भारत-पाकिस्तान क्रिकेट मैच में "इस्लामिक रिपब्लिक आफ पाकिस्तान की जीत के बाद जिस तरह घाटी के पांच जिलों में जश्न मनाया गया, उस ने इन सम्भावनाओं को पूरी तरह नकार दिया है कि अब घाटी के मुसलमानों से बातचीत का रास्ता खुल सकता है | मोदी सरकार इस नतीजे पर बहुत पहले ही पंहुच चुकी है ,इस लिए  25 साल बाद पहली बार केंद्र सरकार ने हुर्रियत नेताओं से बातचीत के दरवाजे पूरी तरह बंद कर के उन के आर्थिक स्रोतों पर हमला बोला है |  राज्य में पीडीपी-भाजपा के शासन संबंधी साझा कार्यक्रम में स्टेक होल्डर्स से बातचीत की गुंजाईश रखी गई ताकि राज्य सरकार चाहे तो राज्य में शान्ति बहाली के लिए हुर्रियत या जिस से चाहे बात करे, भाजपा या केंद्र सरकार को कोई एतराज नहीं , लेकिन भारत सरकार कोई बात नहीं करेगी | पाकिस्तान को भी स्पष्ट तौर पर कह दिया गया है कि अगर वह हुर्रियत या किसी अन्य को बीच में लाएगा, तो कोई बातचीत नहीं होगी | मोदी सरकार ने कश्मीर में सेना को खुली छूट दे दी है, जो आने वाले समय में और बढ़ेगी | पीडीपी बाधा बनी, तो भाजपा साझा सरकार की बलि देने से भी हिचकिचाहट नहीं करेगी | 

 

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