कोविंद राष्ट्रपति पद पर भाजपा का मास्टर स्ट्रोक

Publsihed: 20.Jun.2017, 08:51

अजय सेतिया / राष्ट्रपति पद पर उम्मीन्दवार तय करने के मामले में स्पष्ट बहुमत न होने के बावजूद भाजपा ने विपक्ष तो दूर की बात एनडीए से  भी सलाह-मशविरा नहीं किया | वैसे तो शिवसेना के अलावा एनडीए में कोई ऐसा प्रभावशाली दल नहीं है, जो भाजपा के उम्मीन्दवार का विरोध करने की हिम्मत दिखा सकता, फिर भी जब एक एक वोट की जरुरत हो और भाजपा को करीब 20 हजार वोटों की कमी पड रही थी, तो माना जा रहा था कि भाजपा कम से कम शिवसेना से तो सलाह मशविरा करेगी, जिस के करीब 26 हजार वोट हैं | पहले उम्मींद थी कि भाजपा एनडीए के अलावा विपक्ष से भी  विचार विमर्श करेगी, अमित शाह ने तीन सदस्यीय कमेटी बना कर सर्वानुमति बनाने के संकेत भी दिए थे | जब राजनाथ सिंह और वेंकैया नायडू ने सीता राम येचुरी से मुलाक़ात की थी, तब येचुरी को जरुर अंदेशा हो गया था कि यह सिर्फ सरकार की पीआर एक्सरसाईज है  | सोमवार को  जब भाजपा ने एकतरफा राम नाथ कोविंद को राष्ट्रपति पद का उम्मीन्दवार बना दिया  तो भाजपा से सर्वानुमति की उम्मींद  पाले बैठे राज्य सभा में कांग्रेस के नेता गुलाम नबी आज़ाद हक्के बक्के रह गए | 
असल में कांग्रेस एकतरफा घोषणा से ही हक्की बक्की नहीं हुई , वह पढ़े-लिखे दलित नेता का नाम सामने आने से भी हक्की बक्की रह गई | गुलामनबी ने अनौपचारिक प्रेस कांफ्रेंस बुला कर कहा कि विपक्ष को उम्मींद थी कि घोषणा से पहले आम सहमती बनाने के लिए सरकारी पक्ष उनसे  चर्चा करेगा | विपक्ष  ऐसी एकतरफा घोषणा की उम्मींद नहीं करता था | घोषणा के बाद उन्हें कहना पड़ा कि अब आम सहमती की कोई गुंजाईश नहीं बची है |  यही बात मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव सीता राम येचुरी ने भी कही , हालांकि वामपंथी पहले दिन से आम सहमति से उम्मीन्दवार तय करने के मूड में खुद नहीं थे, उन्होंने तो शुक्रवार को ही संकेत दे दिया था कि यह राजनीतिक चुनाव है | लेकिन जैसा कि कांग्रेस और वामपंथी दलों की तरफ से कहा गया कि भाजपा ने घोषणा करने से पहले उन से बात नहीं की, यह ठीक नहीं है, भले ही तीन सदस्यीय कमेटी जब मिली थी, तब नाम नहीं बताया गया था, लेकिन अमित शाह की ओर से घोषणा करने से पहले खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोनिया गांधी और मनमोहन सिंह को फोन कर के नाम बता दिया था और अरुण जेटली ने नीतीश कुमार को नाम बता दिया था , सीता राम येचुरी को वेंकैया नायडू ने फोन कर के नाम बता दिया था | 
कांग्रेस ने भी 2007 में ठीक ऐसा ही किया था, एक तरफ भैरोंसिंह शेखावत के साथ बात की जा रही थी, दूसरी तरफ एनडीए घटक दल शिवसेना के साथ सांठगाठ कर के अचानक प्रतिभा पाटिल के नाम की घोषणा कर दी थी | भाजपा ने शिवसेना का अपना घर बचाते हुए विपक्ष के बसपा, जनता दल और सपा के मुलायम सिंह खेमे में जोरदार सेंधमारी की है | तटस्थ बैठी टीआरएस को भी अपने पाले में ले लिया है | मोदी, अमित शाह, वेंकैया नायडू और अरुण जेटली ने एलान से पहले करीब करीब सभी विपक्षी दलों को नाम बता दिया था | बस फर्क इतना रहा कि सहमती लेने की गुंजाईश नहीं रखी |  बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविंद भाजपा के मंझे हुए नेता हैं ,  वह  संघ बैकग्राऊंड से हैं, इस लिए विपक्ष उम्मीन्दवार जरुर खडा करेगा | हालांकि विपक्ष की बैठक 22 जून को बुलाई गई है , लेकिन सीता राम येचुरी और गुलाम नबी आज़ाद दोनों ने ही चुनाव का स्पष्ट इशारा कर दिया | येचुरी ने तो विचारधारा की उसी लड़ाई को आगे बढ़ाया है, जो एनडीए सरकार बनने के बाद कभी रोहित वेमुला के रूप में दिखती है, कभी सम्मान वापसी अभियान में दिखती है और कभी जवाहर लाल यूनिवर्सिटी में वामपंथी छात्र संगठनों की ओर से भारत विरोधी नारों में दिखती है | येचुरी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह राजनीतिक पद है और भाजपा ने  आरएसएस बैकग्राऊंड के राम नाथ कोविंद को मैदान में उतारा है, तो सर्वसम्मत चुनाव कैसे हो सकता है | 
चुनाव के पक्ष में उन की दलील यह है कि 1977 को छोड़ कर कभी कोई राष्ट्रपति सर्व सम्मति से नहीं चुना गया |  उल्लेखनीय है कि आपातकाल के बाद 1977 में कांग्रेस इतनी हतोत्साहित थी कि उस ने नीलम संजीवा रेड्डी के सामने उम्मीन्द्वार खडा नहीं किया था |  यह ठीक है कि भाजपा ने सोच समझ कर आरएसएस पृष्ठभूमि का ऐसा नाम निकाला है, जिस से संघ का राष्ट्रपति भवन में प्रवेश भी हो जाए और  विरोध भी सीमित रह जाए | 2002 में भैरों सिंह शेखावत जब उप राष्ट्रपति पद के उम्मीन्दवार बनाए गए थे, तब भी भाजपा ने इस रणनीति के तहत उन्हें मैदान में उतारा था कि वह विपक्ष के ठाकुर वोटों में सेंध मारने में सक्षम थे | उस समय विपक्ष में होते हुए भी शरद पवार ने शेखावत के लिए एनसीपी के अतिरिक्त कांग्रेस के वोटों का भी जुगाड़ किया था | तब ठाकुर कार्ड चल गया था और इस बार दलित कार्ड कामयाब होता दिखाई दे रहा है | नीतीश कुमार ने राजभवन जा कर राष्ट्रपति पद के उम्मीन्दवार राम नाथ कोविंद को खुद पटना से विदाई और शुभकामनए दी और तारीफ़ में कसीदे भी पढ़े |  इतना ही नहीं उन्होंने यह कहने में भी कोई हिचकिचाहट नहीं दिखाई कि उन्होंने सोनिया गांधी और लालू प्रशाद यादव को भी अपने मन की बात बता दी है | वामपंथी दल, सोनिया गांधी, ममता बेनर्जी और लालू प्रशाद यादव , ये चार लोग ही हैं जो राष्ट्रपति पद पर एनडीए के मुकाबले उम्मीन्दवार खडा करने की पहले दिन से कोशिश में लगे हुए हैं | 
भाजपा की  तरफ से दलित उम्मीन्दवार खडा किए जाने से सब से बड़ा झटका तो शरद यादव को लगा | वह अब विपक्ष के उम्मीन्दवार भी नहीं बन पाएंगे |  मायावती ने विपक्ष के सामने शर्त रख दी है कि अब दलित उम्मीन्द्वार हुआ , तभी वह विपक्ष के साथ होंगी , अन्यथा रामनाथ कोविंद का समर्थन करेंगी , भले ही वह संघ बेकग्राऊंड से हैं | माया वती और द्रमुक को अपने साथ बनाए रखने के लिए कांग्रेस और वामपंथियों के पास  इस के अलावा कोई चारा नहीं बचा है कि वह कोविंद से ज्यादा पढी-लिखी दलित जगजीवन राम की बेटी लोकसभा की पूर्व स्पीकर मीरा कुमार को अपना उम्मीन्दवार बनाएं  | यानी विपक्षी एकता के लिए मीरा कुमार मजबूरी हो गई हैं | इस के बावजूद विपक्ष की मीटिंग में उम्मीन्दवार खडा करने पर आसानी से आम सहमती नहीं बनेगी |  अब अपन आंकड़ों पर गौर करें तो भाजपा के पास 47.7 फीसदी वोट थे | यानि 20090 वोटों की कमी थी , जिसे तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) ने पूरा कर दिया है | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद तेलंगाना के मुख्यमंत्री चंद्रशेखर राव को फोन कर के अपने पाले में कर लिया ,जिस की   टीआरएस पार्टी के 23200 वोट हैं |  यानी एनडीए के पास अब 3110  वोट ज्यादा हो गए | भाजपा को शिव सेना से ही खतरा था, जिसे अमित शाह ने वक्त से पहले मातोश्री जा कर राजी कर लिया | भले ही शिवसेना के अखबार सामना ने सोमवार को भी लिखा था कि अमित शाह ने उन्हें कहा है कि अगर महाराष्ट्र में मध्यावधि चुनाव हुए तो वे उसमें जीत हासिल कर लेंगे |  सामना ने लिखा कि जीतने को तो वे राष्ट्रपति चुनाव भी जीत सकते हैं | लेकिन जम्मू एवं कश्मीर में चल रही लड़ाई कौन जीतेगा ? स्पष्ट है कि शिवसेना भाजपा से खफा है , लेकिन शिवसेना यह समझ रही है कि उस के लिए अच्क्स्छे दिन नहीं है इस लिए वह कोई जोखिम नहीं उठाना क्झाह्ती कि महाराष्ट्र विधानसभा के चुनाव की नौबत आ जाए | उधर अन्नाद्रमुक के दोनों खेमों के 50 हजाए से ज्यादा वोट भाजपा के खेमे में आएँगे |  

 

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