क्या हिंदुओं में अस्तित्व की चिंता जाग रही है?

परिदृश्य-एक
ब्रिटिश हुकूमत के साथ छह साल के संघर्ष के बाद 1781 में तेरह राज्यों ने मिलकर यूनाइटेड स्टेट ऑफ अमेरिका का गठन कर लिया था। इससे ठीक 75 साल बाद 1856 में ब्रिटिश हुकूमत ने बर्मा में तैनात करने के लिए भारतीय सेना में एक नई टुकड़ी का गठन करने का फैसला किया। सेना में यह अफवाह जोरों पर फैल गई कि बर्मा में तैनात किए जाने वाले सैनिक धार्मिक परंपराओं का पालन नहीं कर पाएंगे जबकि सेना में ईसाई धर्म गुरुओं को तैनात किया जाएगा। इन अफवाहों को उस समय जोर मिला, जब ब्रिटिश हुकूमत की ओर से सेना के लिए एक नई राईफल भेजने और उसके कारतूस को दांतों से खोलने की बात सामने आई। बताया गया था कि कारतूस के मुंह पर गाय और सुअर की चर्बी का लेप किया गया है। गाय को हिंदू पवित्र मानते हैं जबकि मुसलमान सुअर को घृणित मानते हैं। हिंदुओं और मुसलमानों में उनका धर्म भ्रष्ट करने की साजिश से आक्रोश पैदा हो गया और दस मई 1857 में मेरठ से भारतीय सेना में विद्रोह शुरू हो गया। मंगल पांडे नाम के एक सैनिक ने अपने कमांडर को गोली मार दी, इसके साथ ही ब्रिटिश सेना में तैनात तीन लाख भारतीयों में से 96 फीसदी भारतीयों ने विद्रोह शुरू कर दिया। ब्रिटिश सेना के हिंदुस्तानी सिपाहियों ने एक ही दिन में मेरठ को ब्रिटिश हुकूमत से मुक्त कराकर दिल्ली कूच का नारा दे दिया। दिल्ली 1857 के पहले राष्ट्रव्यापी आंदोलन का प्रमुख केंद्र बना। ग्यारह मई को सुबह आठ बजे हिंदुस्तानी सिपाहियों ने 'हर-हर महादेव' और 'दीन-दीन' के नारे लगाते हुए दिल्ली कूच कर दिया। करीब चार महीने तक देश के कई हिस्से अंग्रेजों की हुकूमत से आजाद होते रहे और आम भारतीय नागरिकों की अंग्रेजी फौज से सड़कों पर जंग होती रही, लेकिन आखिरकार अंग्रेजों ने सब जगह कब्जा कर लिया।

परिदृश्य-दो
ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ विद्रोह करने पर 1898 में जब चाफेकर बंधुओं को फांसी की सजा दी गई, तो देश के अनेक युवकों ने अंग्रेजों से बदला लेने की ठान ली। महाराष्ट्र के नासिक के पास भागपुर के जागीरदार परिवार में पैदा हुए विनायक दामोदर सावरकर भी उनमें से एक थे, जिनकी उम्र उस समय पंद्रह साल थी। पंद्रह साल की उम्र में सावरकर ने 'मित्र मेला' नाम से एक संगठन का गठन किया, जिसका मकसद था- 'भारत के लिए संपूर्ण राजनीतिक आजादी।' सावरकर 1904 में जब कालेज में गए, तो उन्होंने 'मित्र मेला' का नाम बदलकर 'अभिनव भारत' कर दिया। 'अभिनव भारत' का लक्ष्य था- सैन्यकरण के माध्यम से अंग्रेजों को बाहर निकालकर देश की आजादी। वह पहले शख्स थे, जिन्होंने 1905 में अपने कुछ मित्रों के साथ मिलकर विदेशी वस्तुओं की होली जलाई। कालेज की पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने युवाओं को अंग्रेजों के खिलाफ भड़काना शुरू कर दिया, जिसकी सीआईडी रपट मिलते ही अंग्रेजी हुकूमत ने उन्हें कालेज से निलंबित करवा दिया। लोकमान्य तिलक ने उन्हें बैरिस्टर की पढ़ाई करने के लिए लंदन भेजने का बंदोबस्त किया तो रास्ते में जहाज पर उनकी मुलाकात मदनलाल धींगड़ा, आसफ अली, सर सिकंदर हयात आदि से हुई। लंदन जाकर वीर सावरकर ने अभिनव भारत की ब्रिटिश ब्रांच खोली, जिसका नाम था- 'इंडियन सोसायटी।' लंदन सोसायटी में महात्मा गांधी को विजय दशमी कार्यक्रम पर बुलाया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महात्मा गांधी ने की और मुख्य वक्ता वीर सावरकर थे। मदनलाल धींगड़ा ने महात्मा गांधी को बुलाने का विरोध किया था क्योंकि पहले विश्व युध्द में अंग्रेजों की मदद करने के लिए ब्रिटिश हुकूमत ने उन्हें 'केसर ए हिंद' खिताब से नवाजा था। वीर सावरकर ने ही 1909 में वर्ल्ड सोसलिस्ट कांफ्रेंस में मेडम कामा को तिरंगा देकर भेजा था। लंदन में ही वीर सावरकर ने 'वार ऑफ इंडीपेंडेंस' लिखी, जिसे प्रकाशित होने से पहले ही ब्रिटिश सरकार ने प्रतिबंधित कर दिया और तेरह मार्च 1910 को लंदन में गिरफ्तार करके मुकदमा चलाने के लिए भारत भेज दिया। फिर भारत लाते समय सावरकर समुद्र में कूद गए, फ्रांस के तट पर पहुंचे, फ्रांस सरकार ने सावरकर को ब्रिटिश हुकूमत के हवाले कर दिया। उन पर मुकदमे चले, पचास साल तक काले पानी की सजा हुई। सावरकर ने पहली बार हिंदू और हिंदुत्व शब्द का इस्तेमाल किया था और उन्होंने लिखा था कि समय के साथ-साथ हिंदू का अर्थ हिंदुस्तान में रहने वालों के लिए इस्तेमाल होगा। महात्मा गांधी, बल्लभ भाई पटेल, बाल गंगाधर तिलक ने वीर सावरकर को रिहा करने की मांग की, जिसे अंग्रेजों ने ठुकरा दिया। सावरकर जब जेल में थे, उसी समय 1915 में स्वामी श्रध्दानंद, पंडित मदन मोहन मालवीय, लाला लाजपत राय और डाक्टर राजेंद्र प्रसाद ने मिलकर हिंदू महासभा की स्थापना की।

परिदृश्य-तीन
दस साल बाद 1925 में डाक्टर हैडगेवर ने आरएसएस की स्थापना की, जो 1939 तक हिंदू महासभा की वालिंटियर शाखा के तौर पर सक्रिय था। इस बीच 1937 में हिंदू महासभा ने राजनीतिक दल के तौर पर काम करना शुरू कर दिया था। हिंदू महासभा के 1940 के कोलकाता अधिवेशन के बाद आरएसएस हिंदू महासभा से अलग हो गया। आरएसएस ने राष्ट्रीय सांस्कृतिक आंदोलन खड़ा करने का रास्ता चुना, जबकि हिंदू महासभा देश की आजादी के आंदोलन में अपने तरीके से जूझ चुकी थी। यहीं से हिंदू महासभा और आरएसएस में विचारधारा की दरार शुरू हुई। हिंदू महासभा के ही एक नेता डाक्टर बीएस मुंजे ने 1939 में भोंसले मिलिट्री स्कूल शुरू किया। इस स्कूल का उद्देश्य युवाओं का सैनिकीकरण करना था ताकि स्वतंत्रता संग्राम में सहयोग मिले। एक साथ पांच जगह स्कूल शुरू किए गए, स्कूलों में घोड़े ग्वालियर के सिंधिया परिवार ने मुहैया करवाए थे। एक तरफ कांग्रेस आजादी का आंदोलन चला रही थी, तो दूसरी तरफ हिंदू महासभा अपने स्तर पर आजादी का आंदोलन चला रही थी, जिसमें क्रांतिकारी शामिल थे। देश की आजादी के साथ ही बटवारे की बात शुरू हुई, तो हिंदू महासभा और कांग्रेस दोनों ने विरोध किया। बाद में महात्मा गांधी देश के बटवारे के लिए राजी हो गए, तो हिंदू महासभा के वरिष्ठ नेता नाथूराम गोडसे ने महात्मा गांधी को बटवारे का जिम्मेदार मानते हुए उनकी हत्या कर दी जिन्हें बाद में पंद्रह नवम्बर 1948 को फांसी दे दी गई। कांग्रेस और हिंदू महासभा की दुश्मनी यहीं से शुरू हुई, उससे पहले हिंदू महासभा के अनेक सदस्य कांग्रेस के भी सदस्य थे जिनमें पहले राष्ट्रपति डाक्टर राजेन्द्र प्रसाद, जगजीवन राम प्रमुख हैं। वीर सावरकर ने 1952 में पुणे में 'अभिनव भारत' का सांगता समारोह किया। मराठी में सांगता समारोह का मतलब है समापन समारोह। वीर सावरकर ने तब कहा- 'अब हम स्वतंत्र हैं, अब हमारे मतभेद मतपेटी से जाहिर होने चाहिए। अब बुलट की जगह बैलेट से फैसले होने चाहिए।'

परिदृश्य-चार
पाकिस्तान ने शुरू से ही भारत के साथ दुश्मनी का व्यवहार किया और जियाउल हक ने 1971 की जंग से हुए पाकिस्तान के बटवारे का बदला लेने के लिए ऑप्रेशन टोपाज के जरिए भारत में आतंकवाद की रणनीति अपनाई थी। लगातार 35 साल से भारत में बढ़ रहे आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए नाथूराम गोडसे के भाई गोपाल गोडसे की बेटी और वीर सावरकर के भाई बालाराव सावरकर की पुत्र वधू हिमानी सावरकर ने 2006 में अभिनव भारत को फिर से खड़ा किया। उद्देश्य रखा हिंदू विरोधी आतंकवाद का मुकाबला। आतंकवादी वारदातों के सिलसिले में ही सितम्बर 2006 में मालेगांव के मुस्लिम बहुल इलाके में हुए बम धमाकों के सिलसिले में दो साल बाद छह राज्यों के विधानसभा चुनावों से ठीक पहले महाराष्ट्र पुलिस ने अभिनव भारत से जुड़े हुए नेताओं और कार्यकर्ताओं पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। एटीएस का दावा है कि मालेगांव के बम विस्फोटों की साजिश आतंकवादी वारदातों का बदला लेने के लिए अभिनव भारत ने रची और सरअंजाम दिया। 'अभिनव भारत' की अध्यक्ष हिमानी सावरकर न सिर्फ इन आरोपों से इंकार करती हैं, अलबत्ता गिरफ्तार किए गए अभिनव भारत के सदस्यों साध्वी प्रज्ञा, लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित, दयानंद पांडे आदि की वकालत के लिए मुहिम भी शुरू कर दी है। महात्मा गांधी की हत्या के बाद हिंदू महासभा के साथ-साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया था जबकि आरएसएस और हिंदू महासभा 1940 में ही संबंध विच्छेद कर चुके थे। अब फिर 'अभिनव भारत' और 'आरएसएस' को एक ही पलड़े में रखकर पूरे हिंदू समाज को कटघरे में खड़ा किया जा रहा है। संघ का कहना है कि उसका हिंसा की राजनीति में कोई भरोसा नहीं, लेकिन संघ अभिनव भारत के नेताओं का भी बचाव कर रहा है।

मंथन
क्या यह आतंकवाद के प्रति सरकार के ढिलमुल रवैए का नतीजा है? क्या सचमुच आजादी के साठ साल बाद भी हिंदुओं का एक बड़ा वर्ग सांप्रदायिकता के आधार पर हिंसक राजनीति पर उतारू हो गया है? अगर यह सच है, तो क्या हिंदुओं का यह खेमा अपने अस्तित्व को लेकर भयभीत है?

बात तो सहि है.आप का कल्यान

बात तो सहि है.आप का कल्यान हो. नारायन नारायन

सरकार की तुष्टिकरण की नीती के

सरकार की तुष्टिकरण की नीती के चलते ऍसा होना अस्वाभाविक सा नही लगता है.

हिन्दुओ के साथ जो हो रहा हे

हिन्दुओ के साथ जो हो रहा हे वो हिन्दुओ को दिखाया हि नहि जा रहा हे
jase dharm pariwartan
koi bhi news chanle ise par bahas nhi karta
aaj paso ke bal par dharmantarn ho rha hai
parntu koi bhi news chanlle iske piche ki sachhai
dikhane ko tayar nhi
isai log orisa keral or desh ke kai hisso me
pasa batkar dharm pariwartan karwa rhe hai
agar koi hindu is par bahas karna chahe to media use
samprdaikta kehta hai
aab dekhiye varun jee ka bhashn to bar bar dikhate
hai jab ki varun jee ne kuch galat nhi kha
lekin orisa me isai log bom ban rhe the or galti se vo fat gya
vah khabar media ne dikhai
हम विकास कि लकिर तो खिच र्हे है पर क्या devlopment निचे का सच देख रहे है
abb aap karnatka ki khabar par gor kijiye vha love jehad chal rha hai
जब हिन्दु सन्गथन ने यह बात उठाई तो उसे sampardaikta कहा गया
or jab isai sangthan ne is mudde ko uthaya jab jakar iski janch ho rhi hai
हिन्दु rashtra me hinduo ke sath hi sotela vayvhar ho rha hai

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