तोहफे की साड़ियां

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात के बाद येदुरप्पा को मुख्यमंत्री बनने की पूरी उम्मीद हो गई थी। वह इतने खुश हुए कि समय न होने के बावजूद पत्नी, बहुओं और बेटियों के लिए दिल्ली से तोहफा खरीदकर ले जाने की योजना बना ली। प्रधानमंत्री के घर से बारह बजे निकले थे, उसके बाद वेंकैया नायडू के घर पर भी मीटिंग चलती रही, पौने दो बजे की फ्लाइट थी, इसके बावजूद साड़ियां और सूट खरीदने का फैसला कर लिया। वेंकैया नायडू के घर से निकलकर येदुरप्पा ने साउथ एक्स पार्ट वन में पहले साड़ियों और सूटों की खरीददारी की और उसके बाद हवाई अड्डे गए। इस भागादौड़ी में दोपहर का भोजन भी छूट गया। उधर से फ्लाइट भी बिना भोजन वाले स्पाइस जेट की।

India Gate se Sanjay Uvach

Wed, 14 Dec 2011

जनसत्ता 14 दिसंबर, 2011:  पिछले दिनों दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में एक अत्यंत गंभीर विषय पर चर्चा हुई। विषय था, देश में बच्चों के अपहरण की बढ़ रही घटनाएं। विषय की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि बच्चों के अपहरण पर शोध आधारित पुस्तक का विमोचन करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश अल्तमस कबीर खुद मौजूद थे। इस गंभीर समस्या का सनसनीखेज खुलासा 1996 में हुआ था, जब यूनिसेफ ने भारत में बच्चों के देह-शोषण पर एक रिपोर्ट जारी की थी। बी भामती की इस रिपोर्ट