Terrorism

articles on national and international terrorism

मिस्टर ब्राउन यह दर्द तो आपका दिया है

Publsihed: 21.Jan.2008, 20:35

पाकिस्तान में अपने एक अजीज दोस्त हैं- शाहिद अब्दुल कयूम। वहां के एक टीवी चैनल में सीनियर सब एडिटर। चार साल पहले अपन जब पाक गए। तो कयूम से दोस्ती हुई। फिर गाहे--गाहे बजरिया ई-मेल बातचीत होती रही। कभी कभार एसएमएस भी। कयूम से हुई ताजा चर्चा पर आप भी गौर फरमाएं। लिखते हैं- 'मेरा देश जल रहा है। हालात बद से बदतर हो रहे हैं। आपने भी सीमा पार की बुरी खबरें सुनी होंगी। फिदायिन हमले, विद्रोही गतिविधियां। भुट्टो की हत्या के बाद राजनीतिक संकट। हमारी सीमाओं में जंग छेड़ने की अमेरिकी धमकियां। हमारे परमाणु बम की सुरक्षा का सवाल। आप क्या सोचते हैं- इस सबके लिए कौन जिम्मेदार है?'

शोले बन गये आग, बेनजीर की हत्या (संशोधित)

Publsihed: 29.Dec.2007, 17:18

पाकिस्तान की मशहूर लेखिका सादिका ने हाल ही में अपने एक लेख में लिखा था कि पाकिस्तान में शोले दहक रहे हैं और कभी भी आग भड़क उठेगी। इसका अंदाज पिछले हफ्ते 21 दिसम्बर को भी लगा था जब आफताब अहमद खान शेरपाओ पर उत्तर पश्चिम सीमांत प्रांत में उस समय गोली मारी गई थी, जब वह मस्जिद में बकरीद की नमाज पढ़ रहे थे। बाल-बाल बच गए आफताब अहमद पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के बड़े नेता थे, लेकिन बेनजीर भुट्टो के पाकिस्तान छोड़कर इंग्लैंड में जा बसने के बाद परवेज मुशर्रफ से जा मिले थे और हाल ही तक पाकिस्तान के गृहमंत्री थे। अभी एक हफ्ता भी नहीं बीता कि पीपीपी की अध्यक्ष बेनजीर भुट्टो को गोली मार दी गई। दोनों ही आतंकी वारदातों के पीछे स्वात घाटी में सक्रिय अल कायदा से जुड़े तालिबान कमांडर बेतुल्लाह मसूद का हाथ होने का शक है। असल में बेतुल्लाह मसूद अमेरिका समर्थक पाकिस्तानी नेताओं के खिलाफ मोर्चा खोल चुका है। पाकिस्तान के एक बड़े वर्ग का मानना है कि राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ और बेनजीर भुट्टो अमेरिका के हितों की रक्षा कर रहे हैं, जिससे इस्लाम का नुकसान हो रहा है। इसलिए बार-बार मुशर्रफ और बेनजीर पर आतंकवादी हमले हो रहे थे।

शोले बन गये आग, बेनजीर की हत्या

Publsihed: 27.Dec.2007, 20:41

पाकिस्तान की मशहूर लेखिका सादिका ने हाल ही में अपने एक लेख में लिखा था कि पाकिस्तान में शोले दहक रहे हैं और कभी Benazir Bhuttoभी आग भड़क उठेगी। इसका अंदाज पिछले हफ्ते 21 दिसम्बर को भी लगा था जब आफताब अहमद खान शेरपाओ पर उत्तर पश्चिम सीमांत प्रांत में उस समय गोली मारी गई थी, जब वह मस्जिद में बकरीद की नमाज पढ़ रहे थे। आफताब अहमद पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के बड़े नेता थे, लेकिन बेनजीर भुट्टो के पाकिस्तान छोड़कर इंग्लैंड में जा बसने के बाद परवेज मुशर्रफ से जा मिले थे और हाल ही तक पाकिस्तान के गृहमंत्री थे। अभी एक Benazir Bhuttoहफ्ता भी नहीं बीता कि पीपीपी की अध्यक्ष बेनजीर भुट्टो को गोली मार दी गई। दोनों ही बड़े नेताओं की हत्याओं के पीछे स्वात घाटी में सक्रिय अल कायदा से जुड़े तालिबान कमांडर बेतुल्लाह मसूद का हाथ होने का शक है। असल में बेतुल्लाह मसूद अमेरिका समर्थक पाकिस्तानी नेताओं के खिलाफ मोर्चा खोल चुका है। पाकिस्तान के एक बड़े वर्ग का मानना है कि राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ और बेनजीर भुट्टो अमेरिका के हितों की रक्षा कर रहे हैं, जिससे इस्लाम का नुकसान हो रहा है। इसलिए बार-बार मुशर्रफ और बेनजीर पर आतंकवादी हमले हो रहे थे।

अमेरिकापरस्ती बनी बेनजीर की मौत

Publsihed: 27.Dec.2007, 20:39

बहादुर शाह जफर को मरते समय भी गम रहा। बर्मा की मांडले जेल में मरे। वहीं पर दफनाए गए। जफर को पता था- हिंद में नहीं दफनाया जाएगा। सो उनने पहले ही लिख दिया- 'दो गज जमीं न मिली, कु--यार में।' पर बेनजीर भुट्टो को मौत ही पाकिस्तान ले आई। वरना आठ साल बाद वतन लौटने की न सोचती। बेनजीर लौटते ही आतंकियों के निशाने पर आ गई। अपन ने तब तालिबानी नेता बेतुल्ला महमूद की धमकी लिखी थी। उनने कहा था- 'बेनजीर का स्वागत फिदाइन करेंगे।' आखिर 18 अक्टूबर की पहली ही रात बेनजीर पर आतंकी हमला हुआ। वह खुद तो बच गई। पर पौने दो सौ बेगुनाह मारे गए। अपन तो क्या, सब को आशंका थी- 'तालिबान चुपकर के नहीं बैठेंगे।'

शोलों पर पाकिस्तान

Publsihed: 21.Dec.2007, 20:40

बत्तीस साल पहले फरवरी 1975 में हयात मोहम्मद खान शेरपाओ पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिम सीमांत प्रांत में आतंकवाद का शिकार हुए। उनकी याद में शेरपाओ की जामियां मस्जिद के पास ही एक गुम्बंद बनाया गया। बत्तीस साल बाद 21 दिसम्बर 2007 को मोहम्मद खान शेरपाओ के बेटे आफताब अहमद खान शेरपाओ पर जामियां मस्जिद में उस समय आत्मघाती हमला हुआ, जब वह बकरीद की नमाज अदा कर रहे थे। आफताब अहमद हाल ही तक पाकिस्तान के गृह मंत्री थे और राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ के बेहद करीबियों में माने जाते हैं। बेनजीर भुट्टो के पाकिस्तान से बाहर चले जाने के बाद पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी में फूट पड़ी और एक खेमा परवेज मुशर्रफ के साथ जा मिला था।