Terrorism

articles on national and international terrorism

अमेरिकापरस्ती बनी बेनजीर की मौत

Publsihed: 27.Dec.2007, 20:39

बहादुर शाह जफर को मरते समय भी गम रहा। बर्मा की मांडले जेल में मरे। वहीं पर दफनाए गए। जफर को पता था- हिंद में नहीं दफनाया जाएगा। सो उनने पहले ही लिख दिया- 'दो गज जमीं न मिली, कु--यार में।' पर बेनजीर भुट्टो को मौत ही पाकिस्तान ले आई। वरना आठ साल बाद वतन लौटने की न सोचती। बेनजीर लौटते ही आतंकियों के निशाने पर आ गई। अपन ने तब तालिबानी नेता बेतुल्ला महमूद की धमकी लिखी थी। उनने कहा था- 'बेनजीर का स्वागत फिदाइन करेंगे।' आखिर 18 अक्टूबर की पहली ही रात बेनजीर पर आतंकी हमला हुआ। वह खुद तो बच गई। पर पौने दो सौ बेगुनाह मारे गए। अपन तो क्या, सब को आशंका थी- 'तालिबान चुपकर के नहीं बैठेंगे।'

शोलों पर पाकिस्तान

Publsihed: 21.Dec.2007, 20:40

बत्तीस साल पहले फरवरी 1975 में हयात मोहम्मद खान शेरपाओ पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिम सीमांत प्रांत में आतंकवाद का शिकार हुए। उनकी याद में शेरपाओ की जामियां मस्जिद के पास ही एक गुम्बंद बनाया गया। बत्तीस साल बाद 21 दिसम्बर 2007 को मोहम्मद खान शेरपाओ के बेटे आफताब अहमद खान शेरपाओ पर जामियां मस्जिद में उस समय आत्मघाती हमला हुआ, जब वह बकरीद की नमाज अदा कर रहे थे। आफताब अहमद हाल ही तक पाकिस्तान के गृह मंत्री थे और राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ के बेहद करीबियों में माने जाते हैं। बेनजीर भुट्टो के पाकिस्तान से बाहर चले जाने के बाद पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी में फूट पड़ी और एक खेमा परवेज मुशर्रफ के साथ जा मिला था।