India Gate se Sanjay Uvach

Articles written by Ajay Setia and published in Rajasthan Patrika (Print Edition)

मनमोहन से ज्यादा तो हिलेरी ने खोली आईएसआई की पोल

शर्म-अल-शेख के बयान से अपन सहमत नहीं थे। मनमोहन सिंह ने आतंकवाद को किनारे रख पाक से बात शुरू की थी। तो अपन क्या सारा देश खफा था। देश खफा हुआ। तो सोनिया गांधी के कान भी खड़े हुए। सोनिया ने तब तक मनमोहन का समर्थन नहीं किया। जब तक उनने संसद में पलटी नहीं खाई। मनमोहन के अब समझ में आ चुका। अमेरिका के कहने पर पाक से नरमी कितनी महंगी पड़ेगी। सो मनमोहन अब बिना सोचे-समझे नहीं बोलते। पाक से निपटने का ठेका अमेरिका को देने का जोखिम भी नहीं उठाते। मनमोहन ही नहीं। एसएम कृष्णा के बयानों में मर्दानगी झलकने लगी।

ममता समर्थकों का ट्रेन पर कब्जा, बुध्ददेव छुड़ाने गए

ममता की ट्रेन बंधक बनकर छूट गई। ममता को चिदंबरम की मदद मांगनी पड़ी। 'रेल रोको' आंदोलन भी ममता समर्थकों का था। सो ट्रेन अपहरण की जिम्मेदार भी ममता ही हुई। ममता मंत्री न होती। तो खुद भी पटरी पर बैठी होती। वक्त का फेर देखिए। बुध्ददेव की पुलिस ममता की ट्रेन को छुड़ाने गई। पर पुलिस अत्याचारों के खिलाफ बनी ममता समर्थक जनकमेटी भी मुस्तैद थी। बांसतला से चार किलोमीटर ही पहुंची थी पुलिस। कमेटी के लठैतों ने पुलिस पार्टी पर हमला बोल दिया। बुध्ददेव की पुलिस जन कमेटी के सामने धूल चाटने को मजबूर हुई।

यह सत्ता और घोटाले में वाजिब हिस्से की जंग

जून 2008 में खुलता है एक घोटाला। यूपीए सरकार के डीएमके मंत्री कटघरे में खड़े थे। करुणानिधि के करीबी ए. राजा। राजा ने मनमोहन सिंह को ढाल बना लिया। कहा- 'मैंने जो कुछ किया, पीएम की जानकारी में था। पीएम की इजाजत से किया।' मनमोहन सिंह ने भी बचाव में परहेज नहीं किया। मनमोहन आज भी अपनी उसी जुबान पर कायम। अब जब सीबीआई छापे मार चुकी। तो भी मनमोहन सिंह ने ए. राजा का बचाव किया। मनमोहन भी कटघरे में खड़े होने से बचेंगे नहीं। अरुण जेटली ने ए. राजा के साथ मनमोहन सिंह को कटघरे में खड़ा कर भी दिया। शीत सत्र शुरू होने में ज्यादा देर नहीं। उन्नीस नवबंर को शुरू होगा। सत्र का एजेंडा सीबीआई ने तय कर दिया।

कांग्रेस को हरियाणा में झटका, बीजेपी को सब जगह

हरियाणा में अपन ने ऐसा तो नहीं सोचा था। झटका लगेगा, यह तो पता था। पर बहुमत नहीं मिलेगा। अपन को ऐसी आशंका नहीं थी। पर कांग्रेस आलाकमान को आशंका हो गई थी। आशंका न हुई होती। तो मोती लाल वोरा और आरके धवन पोलिंग के बाद भजन लाल से न मिलते। चुनाव शुरू हुआ। तो हालात ऐसी नहीं थी। पर चुनाव रोहतक बनाम बाकी हरियाणा बन गया। तो हालात बदल गए। चौटाला जब कहा करते थे- 'हुड्डा हरियाणा के नहीं, रोहतक के सीएम।' तो कांग्रेस ने उसे गंभीरता से नहीं लिया। पर यह बात चुनावों में साफ दिखने लगी थी। हुड्डा ने वक्त से पहले चुनाव करवाए। हालात तो हुड्डा के पक्ष में थे। पहले मायावती-भजनलाल गठबंधन टूटा। फिर चौटाला-बीजेपी गठबंधन टूटा। फिर कुलदीप-बीजेपी गठबंधन होते-होते टूटा। पांच कोणीय चुनावों में भी कांग्रेस की दुर्गति हुई।

अरुणाचल का जनादेश लेकर जियाबाओ से भिड़ेंगे मनमोहन

आज होगी तीन राज्यों के वोटों की गिनती। उधर गिनती निपटेगी। इधर झारखंड के चुनाव का रास्ता खुलेगा। झारखंड का चुनाव तीन राज्यों के साथ न होना। सत्ता के दुरुपयोग का कांग्रेसी उदाहरण। सरकार न बननी थी, न बनानी थी। पर एसेंबली को जानबूझकर सस्पेंड किए रखा। कांग्रेस की मदद वाली मधु कोड़ा की सरकार सबसे भ्रष्ट साबित हुई। कोई पांच हजार करोड़ की जायदाद बनाई कोड़ा ने। अब सीबीआई जांच के घेरे में। शिबू सोरेन विरोध करते रहे। पर मधु कोड़ा सरकार चलाती रही कांग्रेस। पांच हजार करोड़ रुपए के भ्रष्टाचार का जिम्मेदार कौन। यह नतीजा आप खुद निकालिए। पर आज बात झारखंड की नहीं। बात तीन राज्यों के चुनाव नतीजों की। मनमोहन आज रात को थाईलैंड रवाना होंगे। तो अपने साथ अरुणाचल का जनादेश ले जाएंगे। चलते-चलते बताते जाएं- इस बार पीएम अलग उड़नखटोले पर सवार होंगे। टीम अलग उड़नखटोले पर।

मनमोहन कन्फ्यूजन से निकले तो अब चिदंबरम की बारी

बात अपने मनमोहन सिंह की। जिनने पीएम बनते ही 2005 में हवाना जाकर कहा- 'पाकिस्तान भी आतंकवाद का शिकार।' महाराजा रणजीत सिंह के बारे में मशहूर था। वह सबको एक नजर से देखते थे। उसी तरह मनमोहन सिंह ने भी आतंकवाद को एक ही नजर से देखा। भारत और पाक के आतंकवाद का फर्क नहीं समझे। भारत का आतंकवाद पाक की देन। आतंकवाद में पाक फौज और आईएसआई शामिल। पर पाक का आतंकवाद घरेलू अमेरिकापरस्ती के खिलाफ। पाक ने जिस तालिबान-अलकायदा को पाला पोसा। उसी को मारने में अमेरिका की मदद की। तो तालिबान-अलकायदा के निशाने पर आया पाक। माना, कूटनीति में अनाड़ी हैं मनमोहन सिंह। पर आतंकवाद को समझने में इतनी नादानी। किसी पीएम को तो शोभा नहीं देती।

चीन से दो टूक बात के दो मौके अगले हफ्ते

भारत-चीन के शब्दबाण चरम पर। नवंबर में दलाईलामा तवांग जाएंगे। जा पाएंगे क्या? गए तो नवंबर में तनाव तेज होगा। यों अब नवंबर में वक्त भी क्या। दलाईलामा तवांग के रास्ते ही भारत में घुसे थे। ऐसा नहीं जो तवांग पहली बार जा रहे हों दलाईलामा। आठ-दस बार जा चुके। वाजपेयी के वक्त 2003 में भी गए थे। पर तब तनाव इतना नहीं हुआ। शब्दबाण भी इतने तीखे नहीं थे। अब तो जैसे जंग की तैयारी कर रहा चीन। इसकी वजह सिर्फ दलाईलामा नहीं। अपनी अमेरिका से बढ़ती दोस्ती भी। पर यह कैसी दोस्ती। अब्दुल कलाम के बाद अब शाहनवाज हुसैन का अपमान।

अपना तो पटाखों से परहेज पर पाकिस्तान में फूट रहे बम

अपने यहां सिर्फ मिठाई का परहेज ही नहीं। पटाखों का भी परहेज। मिठाई की पोल तो दीवाली से ठीक पहले खुल गई। पूरे देश में नकली मावा पकड़ा गया। मिठाई की मांग से हलवाईयों के मुंह में पानी भरने का असर। मांग ज्यादा होगी। तो फर्जीवाड़ा भी बढ़ेगा। सो इस बार ड्राई फ्रूट का चलन बढ़ा। चाकलेट बनाने वाली इंटरनेशनल एजेंसियों की भी चांदी। थोड़ा मीठा हो जाए। पर मिठाई से ज्यादा बात पटाखों की। अपन ने सालों साल शिवकाशी में पटाखे बनाते बच्चों को मरते देखा। विस्फोटों में हाथ-पैर उड़ते देखे। पटाखे हर साल न जाने कितनों का बचपन छीन रहे। सो समझदार लोगों ने पटाखों के खिलाफ मुहिम छेड़ी। जो अब परवान चढ़ने लगी। आपने बुलंदशहर में पटाखों की मंडी तो जलते देखी ही। दीवाली से एक दिन पहले ही बज गए सारे पटाखे।

तालिबान का एजेंडा पाक में अलकायदा सरकार का

बुजुर्गोँ ने कहा था- जैसी करोगे, वैसी भरोगे। बुजुर्गों ने यह भी कहा था- जो बोया पेड़ बबूल का, तो आम कहां से होय। अब पाकिस्तान को करनी की भरनी का वक्त। तड़ातड़ बम फट रहे हैं पाक में। गुरुवार को पांच जगह बम फटे। तीन जगह तो सिर्फ लाहौर में ही। पेशावर और कोहाट में भी बम फटे। पहले अपन पेशावर की बात ही करें। निशाना कोई बड़ा आदमी नहीं था। मरा भी सिर्फ एक ही। वह भी एक मासूम बच्चा। नार्थ-वेस्ट फरंटियर प्रोविंस के सीएम के ड्राइवर का घर था। घर के ठीक सामने कार बम फटा। पेशावर के साथ ही लगता है कोहाट। जहां दस लोग मारे गए। कोहाट में इस्लामाबाद दोहराया गया। याद है- तीन साल पहले का आतंकी हमला। इस्लामाबाद के फाइव स्टार होटल में घुसा था विस्फोटक भरा ट्रक।

चुनाव की पूर्वसंध्या पर फूटा भ्रष्टाचार का बम

तो आज तीन राज्यों में वोट पड़ेंगे। महाराष्ट्र, हरियाणा, अरुणाचल। हरियाणा में कांग्रेस का पलड़ा भारी। बहुमत पा ही जाएगी कांग्रेस। पर हुड्डा की बजाए शैलजा सीएम होंगी। इस खुलासे ने कांग्रेस के होश उड़ा दिए। यों सोनिया का इरादा यही था। अपन ने छह अक्तूबर को किया था खुलासा। हवा उड़ी थी तो जाटों में खलबली मची। जाट चौटाला की तरफ दौड़ने लगे। हुड्डा कैंप के तो होश फाख्ता हो गए। खुद हुड्डा ने सोनिया से अर्ज किया- 'चुनाव से पहले मेरे नाम का ऐलान न किया। तो जाट वोट बैंक खिसक जाएगा।' सो इतवार को सोनिया ने वक्त की नजाकत को पहचाना। हुड्डा के नाम का ऐलान कर दिया। सो अब हुड्डा कैंप में राहत। बात अरुणाचल की। तो कांग्रेस की सरकार वहां भी बनेगी। यों भी वहां जिसका केंद्र उसका राज्य की परंपरा।

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India Gate se Sanjay Uvach

Wed, 14 Dec 2011

जनसत्ता 14 दिसंबर, 2011:  पिछले दिनों दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में एक अत्यंत गंभीर विषय पर चर्चा हुई। विषय था, देश में बच्चों के अपहरण की बढ़ रही घटनाएं। विषय की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि बच्चों के अपहरण पर शोध आधारित पुस्तक का विमोचन करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश अल्तमस कबीर खुद मौजूद थे। इस गंभीर समस्या का सनसनीखेज खुलासा 1996 में हुआ था, जब यूनिसेफ ने भारत में बच्चों के देह-शोषण पर एक रिपोर्ट जारी की थी। बी भामती की इस रिपोर्ट