India Gate se Sanjay Uvach

Articles written by Ajay Setia and published in Rajasthan Patrika (Print Edition)

कर्नाटक का नाटक अब दिल्ली में भी शुरू

ट्वंटी-20 विश्व कप आखिरी मैच में जैसा हुआ। हू-ब-हू वही चंडीगढ़ में हुआ। जहां अपने धोनी ने आस्ट्रेलिया को धो डाला। भले ही दो मैच हार कर धोया। पर बात ट्वंटी-20 के आखिरी मैच की। जो भारत-पाक में हुआ था। आखिरी ओवर ने खेल बदल डाला। हारता-हारता भारत जीत गया। जीत के करीब पहुंचकर पाक हार गया। अब कर्नाटक के ट्वंटी-20 में आखिरी ओवर रोमांचक। एक पल लगा बीजेपी-जेडीएस मैच फिक्स हो जाएगा। दूसरे पल लगा। बीजेपी-जेडीएस शादी टूटनी तय।

गेंद अब जल्द ही होगी गवर्नर के पाले में

अब दिल्ली की कवायद एकदम बेकार। अपन ने तो शुरू में ही लिख था- 'येदुरप्पा-कुमारस्वामी की बेमेल जोड़ी कब तक?' बात तो तभी से साफ थी। बेंगलूर में जब बीजेपी की वर्किंग कमेटी हुई। तभी ही दिखने लगा था- कुमारस्वामी अपनी पारी पूरी करते ही पलट जाएंगे। सितंबर में बातें साफ होनी शुरू हो गई। देवगौड़ा परिवार को तब तक बीजेपी में कोई खोट नहीं दिखा। न ही येदुरप्पा में कोई खोट दिखा। जब तक तीन अक्टूबर नजदीक नहीं आ गई।

'मौकापरस्ती ही राजनीति' कुमारस्वामी उवाच

बीजेपी को अभी भी उम्मीद। देवगौड़ा की नौटंकी अब अनाड़ियों को भी समझ आ चुकी। पर बीजेपी पार्लियामेंट्री बोर्ड को समझ नहीं आई। जमीनी हकीकत से कितनी दूर चली गई बीजेपी। जब छोटी-छोटी राजनीतिक चालें समझ न आएं। तो पार्टी का मेंटल लेवल कितना गिर गया होगा। अपन को अंदाज लगाने में मुश्किल नहीं। चेन्नई आईआईटी के एक प्रोफेसर हैं इंद्रसेन। उनने एक थ्योरी दी।

कर्नाटक ट्वंटी-20 में बीजेपी लड़खड़ाई

अपन को येदुरप्पा का पंद्रह अगस्त वाला बयान नहीं भूलता। उनने कहा था- 'अगली बार बेंगलूर में झंडा मैं फहराऊंगा।' येदुरप्पा बहुत जल्दी में थे। पंद्रह अगस्त से भी पहले उनने बचकानी हरकत की। जब उनतीस जुलाई को विधानसभा में कहा- 'तीन अक्टूबर से मैं मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठूंगा।' यह बात उनने बगल में बैठे कुमारस्वामी की मौजूदगी में कही। जैसे कुमारस्वामी को कुर्सी खाली करने के लिए चिढ़ा रहे हों। स्याने लोग इतनी जल्दबाजी नहीं दिखाते।

कुर्सी के लिए मचलते कुमारस्वामी - येदुरप्पा

आम चुनाव दूर नहीं। रेवड़ियां बंटने लगीं। लेफ्ट ने हाथ न भी खींचा। तो कांग्रेस कोई और बहाना ढूंढेगी। अगले साल तक लटका। तो रेवड़ियां खत्म हो चुकी होंगी। अपन रेवड़ियों की गिनती बाद में करेंगे। पहले गांधी को याद कर लें। इस बार कांग्रेस को गांधी कुछ ज्यादा ही याद आए। प्रणव मुखर्जी संयुक्त राष्ट्र की आम सभा में गए। तो सोनिया को साथ ले गए। संयुक्त राष्ट्र ने इस बार गांधी के जन्मदिन को मान्यता दी। अब यह दिन दूनियाभर में 'अहिंसा दिवस' होगा।

जेटली के डिनर से बीजेपी में खलबली

अरुण जेटली का डिनर न्यौता चौंकाने वाला था। तीस सितंबर को न जेटली का जन्मदिन। न पत्नी संगीता का जन्मदिन। न शादी की सालगिरह। संगीता और अरुण के न्यौते ने बीजेपी में हलचल मचा दी।  हफ्ताभर लोग पूछताछ करते रहे। वेंकैया नायडू जब अध्यक्ष बने। तो उनने सालाना लंच-डिनर का सिलसिला शुरू किया। खास तेलुगू स्टाइल के व्यंजन। उससे पहले अपने रामदास अग्रवाल ही भोज राजनीति करते रहे। आडवाणी ने कभी भोज दिया हो। अपन को याद नहीं आता।

जागो मनमोहन प्यारे

यह जागने की घड़ी अंबूमणि की नहीं। जागने की घड़ी मनमोहन प्यारे की। साख अंबूमणि की नहीं। अलबाा मनमोहन सरकार की गिर गई।

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India Gate se Sanjay Uvach

Wed, 14 Dec 2011

जनसत्ता 14 दिसंबर, 2011:  पिछले दिनों दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में एक अत्यंत गंभीर विषय पर चर्चा हुई। विषय था, देश में बच्चों के अपहरण की बढ़ रही घटनाएं। विषय की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि बच्चों के अपहरण पर शोध आधारित पुस्तक का विमोचन करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश अल्तमस कबीर खुद मौजूद थे। इस गंभीर समस्या का सनसनीखेज खुलासा 1996 में हुआ था, जब यूनिसेफ ने भारत में बच्चों के देह-शोषण पर एक रिपोर्ट जारी की थी। बी भामती की इस रिपोर्ट