India Gate se Sanjay Uvach

Articles written by Ajay Setia and published in Rajasthan Patrika (Print Edition)

मौत का सौदागर मोदी या अफजल? नया सवाल

यह तो अपन को पहले से पता था-'मोदी पर जहर बुझे तीर चलाएगी सोनिया।' पर अपन को भरोसा था-सोनिया चक्रव्यूह में नहीं फसेगी। भले ही अनारी कितनी ऊट-पटांग बाते लिखकर थमाएं। पर अपना भरोसा टूट गया। जब सोनिया ने चिकली में मोदी को बेइमान और मौत का सौदागर कह दिया। साथ में गांधी के गुजरात को गोडसे से जोड़ बलंडर किया।

कमाल के हैं कलाम

माना- मनमोहन की गठबंधन सरकार। पर छोटे-छोटे दलों की ऐसे बंधक बनेगी। अपन ने नहीं सोचा था। वेणुगोपाल के मामले में हैल्थ मिनिस्टर रामदौस ने जो किया। उससे मनमोहन की छवि भी कोई अच्छी नहीं बनी। रामदौस पहले दिन से एम्स डायरेक्टर वेणुगोपाल को हटाने पर आमादा।

सदनों की सर्वोच्चता पर सरकारी हमला

अपने यहां लोकतंत्र के तीन अंग। लेजिस्लेचर, ज्यूडिश्यरी, एक्जीक्यूटिव। यानि चुने हुए सदन, अदालतें और सरकार। बहुत पुरानी बात नहीं। बात सिर्फ तीन साल पुरानी। जब झारखंड के गवर्नर सिब्ते रजी ने बिना बहुमत के शिबू सोरेन को सीएम बनाया। बहुमत साबित करने का वक्त भी अच्छा-खासा दे दिया। बहुमत अर्जुन मुंडा के साथ था। प्रोटर्म स्पीकर की तैनाती हुई। खरीद-फरोख्त शुरू हो गई।

उधर वर्दी उतरी इधर बखिया उधड़ी

जनरल परवेज मुशर्रफ की वर्दी आखिर उतर गई। इमरजेंसी लगाकर भी वर्दी नहीं बचा पाए। देखा अमेरिका का करिश्मा। सो  नरेंद्र मोदी अबके  चुनाव में मियां मुशर्रफ का मुद्दा शायद ही उठाएं। मोदी की बात चली। तो बताते जाएं। लालू की करनी कांग्रेस के सामने आ गई। लालू ने जिद करके बनर्जी आयोग बनवाया। जिसने कहा- 'गोधरा में आग बाहर से नहीं। डिब्बे के अंदर से लगी थी।' अब कांग्रेस को इस सवाल का जवाब देना होगा। बीजेपी के पहले इश्तिहार ने ही कटघरे में खड़ा कर दिया।

जग के ठुकराए लोगों को लो मेरे घर का खुला द्वार

कांग्रेस-लेफ्ट में लाख मतभेद। पर तस्लीमा के मुद्दे पर दोनों एक। तस्लीमा दोनों पार्टियों के लिए शाहबानो बन चुकी। जरा तस्लीमा के बारे में बता दें। तब बांग्लादेश नहीं बना था। पूर्वी पाकिस्तान था। जब मेमनसिंह में तस्लीमा अगस्त 1962 में पैदा हुई। तस्लीमा ने डाक्टरी पास की। सरकारी डाक्टर हो गई। पर लिखने का शौक घटने के बजाए बढ़ गया। बात शुरू हुई 1990 से।

तस्लीमा पर नित नया झूठ बोलती सीपीएम

पाक हो या बांग्लादेश। दोनों पड़ोसी अपना सिरदर्द। पाक से आतंकियों की घुसपैठ। तो बांग्लादेश से आबादी की घुसपैठ जारी। जहां तक पाक की बात। तो वहां राजनीतिक हालात नए मोड़ ले चुके। बेनजीर के बाद नवाज शरीफ को भी कबूल करना पड़ा मुशर्रफ को। दस सितंबर को घुसने नहीं दिया गया था। पर पच्चीस नवंबर का न्योता देने खुद गए। अमेरिका के दबाव में दोनों को कबूल किया। अब अमेरिकी दबाव में वर्दी भी उतरेगी। इमरजेंसी भी हटानी पड़ेगी।

कट्टरपंथ बंगाल में आतंकवाद यूपी में

पहले पाकिस्तान की अदालतें। अब अपनी। दोनों आतंकियों के निशाने पर। पर आप सोचेंगे। पाक में तो अदालतों का बाजा मुशर्रफ ने बजाया। तो अपन को मुशर्रफ आतंकियों से कम नहीं लगते। यह संयोग ही समझिए। बुधवार को एक अमेरिकी अखबार ने मुशर्रफ को सबसे बड़ा आतंकी लिखा। भले ही यह जार्ज बुश को न जचे। वैसे भी अपन कारगिल को नही भूले। जहां मुशर्रफ की आतंकियों से सांठगांठ थी। पर फिलहाल बात शुक्रवार को राम-लक्ष्मण-शिव की नगरियों पर आतंकी कहर की।

उमा भारती की शर्तें खत्म, वापसी तय

अपने भैरों बाबा ने बीजेपी ज्वाईन नहीं की। कई नेता मनुहार कर चुके। पर राजनीति शुरू हो चुकी। मेरठ, हिसार, आगरा में रैलियां हो चुकी। अब पंद्रह दिसम्बर को भिवानी में। अब के धनतेरस पर जन्मदिन भी कुछ ज्यादा ढोल-नगाड़ों से मना। जन्मदिन का एक रोचक किस्सा बताएं। एक भक्त माला पहनाकर खुशी के मारे रोने लगा। बोला- 'पांच साल से माला लेकर आ रहा था।

नंदीग्राम पर कितना झूठ बोलेगी सीपीएम

अपन ने बीस मार्च को ही लिखा था- 'नंदीग्राम में मुसलमानों की आबादी ज्यादा।' अब जब नंदीग्राम की आग मुस्लिम आंदोलन बनकर कोलकाता पहुंची। बुधवार को आल इंडिया माइनोरिटी फोरम सड़कों पर उतरा। तो लेफ्ट के सेक्यूलरिज्म की पोल खुल गई। प्रदर्शनकारी मुसलमानों पर जमकर गोलियां चली। फोरम के अध्यक्ष ईदरिश अली का दावा- 'हालात खुद सीपीएम काडर ने बिगाड़े।' कोलकाता में सेना बुलानी पड़ी। तो राज्यसभा में अपने दिनेश त्रिवेदी ने हंगामा कर दिया। सो सदन नहीं चला।

तो तय हुआ कर्नाटक एसेंबली भंग करना

देवगौड़ा ने पहले कांग्रेस को धोखा दिया। फिर बीजेपी को। अब अपने एमएलए धोखे में रखे। बेंगलुरू से कहकर आए- 'कांग्रेस से बात करूंगा।' पर दिल्ली आकर लंबी तानकर सो गए। देवगौडा के बैठे-बैठे सोने की आदत से तो सब वाकिफ। हकीकत दूसरी। अपन ने कल बुधवार को हुई देवगौड़ा-पृथ्वीराज चव्हाण गुफ्तगू का जिक्र किया। पिछले बुधवार सेंट्रल हाल में हुई थी गुफ्तगू। गुफ्तगू का राज मंगलवार को तब खुला। जब केबिनेट ने एसेंबली भंग करने का फैसला कर लिया। तो चव्हाण ने देवगौड़ा को फोन पर कहा- 'थैंक्यू'

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