India Gate se Sanjay Uvach
परिवारवाद का जलवा कहीं पूरा, तो कहीं अधूरा
Thu, 24-Sep-2009'टिवटर' के बाद आज 'फेस बुक' की बात। रेखा का भांजा है नवीद अजमन। अपन फिल्मी हिरोइन रेखा की बात कर रहे। मौसी टॉप हिरोइन हो। तो भांजे को उम्मीद होगी ही। जब नेताओं के बेटों-बेटियों को टिकट की उम्मीद। तो नवीद अजमन की उम्मीद फिल्म में रोल था। जब आमिर खान ने अपने भांजे इमरान को फिल्म दिला दी। तो नवीद अजमन की उम्मीद भी जायज। आखिर वह तो आमिर से बड़ी स्टार का भांजा। सो केलिफोर्निया से बड़ी हसरतें पालकर मुंबई पहुंचा था। सालभर मुंबई की खाक छानता रहा। पर रेखा ने धेले की मदद नहीं की। बड़े रुआंसे होकर केलिफोर्निया लौट गए।
तो क्या पाक से पर्दे के पीछे बात का इरादा
Tue, 22-Sep-2009हाफिज मोहम्मद सईद की नजरबंदी हो गई। सोमवार अपने यहां इस खबर की खूब चर्चा रही। पर पाकिस्तान में उतनी चर्चा नहीं दिखी। पाकिस्तानी अखबारों की वेबसाइट में जिक्र तक नहीं हुआ। आखिर लाहौर के पुलिस सुप्रीटेंडेंट सोहेल सुखेरा ने खंडन किया। वह बोले- 'हमने सिर्फ ईद की नमाज करने जाने से रोका। वह भी सईद की सुरक्षा के कारण। नजरबंदी का हमें कोई हुक्म नहीं।' पर अपने यहां चिदम्बरम भी चैनलों की खबर से प्रभावित हुए। अपने चैनलों ने भी खबर पाकिस्तानी चैनलों से उठाई। दोनों देशों के चैनलों में कोई खास फर्क नहीं। यों कृष्णा-कुरैशी की मुलाकात से पहले गिरफ्तारी हो भी जाए। तो ताज्जुब नहीं होगा। आखिर शर्म-अल-शेख में जब मनमोहन-गिलानी मुलाकात होनी थी। तो पाक ने कसाब के पाकिस्तानी होने का कबूलनामा भेज दिया था। अब भी कृष्णा-कुरैशी मुलाकात से पहले सात के चार्जशीट होने की चर्चा। अपनी बात मानो।
तो बेबात का तूल लगा मनमोहन को
Sat, 19-Sep-2009तीनों पड़ोसियों की शरारत भरी हरकतों पर सरकार की चुप्पी। शरारत सिर्फ चीन ने नहीं की। पाक और बांलादेश भी कम नहीं। अपन इन तीनों पर बात करेंगे। पर पहले बात कांग्रेस के 'सादगी मंत्र' की। 'सादगी मंत्र' का शिकार नए-नए खिलाड़ी शशि थरूर। पुराने कांग्रेसियों की आंख की किरकिरी तो थे ही थरूर। ऊपर से टिवटरबाजी। पुराने कांग्रेसियों को टिवटरबाजी समझ नहीं आती। पर थरूर से सीख अब मनमोहन भी टिवटर के शौकीन। वैसे टिवटर और फेसबुक अपनी राजनीति में फिट नहीं। सुधींद्र कुलकर्णी ने आडवाणी को सोशल नेटवर्किंग में खूब घुमाया। थरूर इससे ही सबक लेते। नेटवर्किंग में राजनीति का वही हश्र होना था। जो एनडीए का 2004 में 'इंडिया शाइनिंग' से हुआ।
राजनीति में फातिया पढ़ने वाले जरा सोचें
Fri, 18-Sep-2009चार विधानसभाओं के चुनाव सिर पर। अपन महाराष्ट्र, हरियाणा, अरुणाचल के साथ झारखंड भी जोड़ लें। झारखंड के करीब आधी सीटें खाली हो चुकी। अब छह महीने भी नहीं बचे बाकी कार्यकाल में। पर कांग्रेस नौ महीने से सस्पेंड करके बैठी है। बैठी है, वक्त के इंतजार में। दिन अच्छे आएं, तो चुनाव कराएं। अपन को अभिषेक मनु सिंघवी की त्योहारों की दलील खोखली तो लगी। पर चंडूखाने की ज्यादा लगी। त्योहार महाराष्ट्र- हरियाणा- अरुणाचल में भी मनाए जाएंगे। तो झारखंड में चुनाव क्यों नहीं? बीजेपी ने बुधवार को इलेक्शन कमीशन में गुहार लगाई। तो गुरुवार को राष्ट्रपति भवन में जाकर। यों इलेक्शन कमीशन चाहे। तो आज चुनाव का ऐलान कर दे।
सादगी जरूरी, पर सुरक्षा उससे भी ज्यादा जरूरी
Thu, 17-Sep-2009लो अब सादगी की पोल खुलने लगी। मंत्रियों ने केबिनेट में नाक-भौं सिकोड़ी ही थी। उनकी असलियत भी सामने आ गई। अपन ने तो दस सितंबर को ही लिखा था- 'यों कोठियों की रेनोवेशन- रख रखाव से फाइव स्टार सस्ते।' अब अपनी बात की पुष्टि नए खुलासे से हो गई। नया खुलासा मंत्रियों की कोठियों के रेनोवेशन का। उसमें भी खासकर बाथरूम। आनंद शर्मा कभी जननेता नहीं रहे। लोकसभा या विधानसभा चुनाव जीतते तो तब, जब लड़ते। पर सोनिया की कृपा से केबिनेट मंत्री बने। तो उद्योग भवन के दफ्तर का रेनोवेशन देखिए। चौदह लाख 78 हजार रुपया एक कमरे का खर्च हुआ। विलासराव पहली बार केंद्र में आए। महाराष्ट्र के दो बार सीएम रहे। सो खुला खाता रहा। विलासराव ने आनंद शर्मा से कुछ कम खर्च करवाया। चौदह लाख 54 हजार।
करुणानिधि के बाद ममता ने दिखाई आंख
Wed, 16-Sep-2009एनसीपी-कांग्रेस का गठबंधन कैसा होगा। होकर भी कैसा निभेगा। पवार की दस सीटें घटेंगी। तो पीठ में छुरा वह भी घोपेंगे। विलासराव-पवार का टकराव इस हद तक तो पहुंच ही चुका। सो अपन इंतजार करेंगे चुनावी भीतरघात का। फिलहाल बात करुणानिधि और ममता की। करुणानिधि भड़केंगे। यह अंदाज तो अपन को पहले से था। राहुल गांधी जब चेन्नई में थे। तो अपन ने 11 सितंबर को लिखा था- 'बात तमिलनाडु में राहुल के राजनीतिक कंकड़ फेंककर आने की। वह तीन दिन तमिलनाडु में रहे। पर करुणानिधि से मुलाकात नहीं की।' ऊपर से राहुल नदियां जोड़ने की मुखालफत कर आए। भले ही यूपीए ने वाजपेयी के इस एजेंडे को छोड़ दिया। पर रिकार्ड में नहीं छोड़ा।
चोंचलेबाजी छोड़ सीमाओं की फिक्र करे सरकार
Tue, 15-Sep-2009सोनिया का 'सादगी मंत्र' काबिल-ए-तारीफ। पर मीडिया जरूरत से कुछ ज्यादा लट्टू। अपन कारगिल की जंग का वक्त याद कराएं। तब वाजपेयी ने चुपके से सादगी मंत्र लागू किया। कोई शोर शराबा नहीं। कोई चोंचलेबाजी नहीं। वाजपेयी ने विदेश यात्राओं पर मंत्रियों का डेली एलाउंस भी घटा दिया था। पहले सौ डालर रोज था। घटाकर पचहत्तर डालर कर दिया। किसी मंत्री ने चूं तक नहीं की। अब तो पवार, फारुक, कमल, आनंद, मारन कितने मंत्री भड़के। तारीफ के काबिल हैं प्रणव मुखर्जी। जिनने सरकारी विमान छोड़ दिया। एसएम कृष्णा ने तो खुन्नस में छोड़ा। पर अपन को सरकारी विमान का बेजा इस्तेमाल नहीं भूलता। सोनिया सोमवार को इकनामी क्लास में मुंबई गई। तो अपन लोग बावले हो गए।
शिंदे बने 'इकनामी क्लास' के पहले केबिनेट मंत्री
Sat, 12-Sep-2009सुशील शिंदे से अपनी मुलाकात सत्रह साल पुरानी। जब वह कांग्रेस महासचिव हुआ करते थे। मध्यप्रदेश के प्रभारी थे शिंदे। उन दिनों कांग्रेस की ढपली आधी रात को बजती थी। नरसिंह राव दिनभर सरकारी काम निपटाते। रात को पार्टी की बारी आती। वह सात रेसकोर्स से लौटते। तो खबर की पुड़िया मिलती। कभी-कभी तो आधी रात को चाय पिलाकर लौटा देते। शिंदे जब आंध्र के गवर्नर थे। तो अपन कांग्रेस अधिवेशन के समय राजभवन में मिले। कांग्रेस के हैदराबाद अधिवेशन में ही चमके थे राहुल। जब वह मंच पर नहीं बैठे। डेलीगेटों के साथ नीचे बैठे। राहुल तब जमीन से जुड़े। तो जुड़ते ही चले गए। अपन राहुल-शिंदे की बात बाद में करेंगे। पहले हैदराबाद की बात।
पवार को नहीं मंजूर सोनिया का सादगी मंत्र
Fri, 11-Sep-2009पहले बात तमिल नेता मणिशंकर अय्यर की। कनाट प्लेस को राहुल चौक बनाने वाले। पर वीर सावरकर के कट्टर विरोधी। महाराष्ट्र के चुनाव न होते। तो छत्रपति शिवाजी का भी विरोध करते। यूपी में मायावती मूर्तिबाजी में मशगूल। तो महाराष्ट्र में कांग्रेस का एजेंडा शिवसेना में सेंध। इसीलिए तो चुनावों के वक्त शिवाजी का स्मारक बना। जैसे कांग्रेस का चुनावी हथियार गांधी। वैसे ही शिवसेना का चुनावी हथियार छत्रपति शिवाजी। मायावती का विरोधी कर रहे मणिशंकर फंस गए। मेघनाद देसाई ने सरकारी धन के दुरुपयोग की बात की। तो वह बात यूपी से लेकर महाराष्ट्र तक थी। बुरे फंसे मणिशंकर को कुछ नहीं सूझा। तो लंदन में चर्चिल की मूर्ति पर आ गए। मेघनाद ठहरे ब्रिटिश। सो वह अपनी भाषा पर आ गए।
जगनमोहन के दूत ने छुटा दिए हाईकमान के पसीने
Thu, 10-Sep-2009तो कांग्रेस की ओवरहालिंग कब होगी। एसेंबली चुनावों से पहले या बाद में। राजशेखर रेड्डी की मौत न होती। तो अब तक हो गई होती ओवरहालिंग। यों अपना अनुभव बताएं। तो कई बार टलकर कई महीने लटक जाती है ओवरहालिंग। चुनावों से पहले हुई। तो बीके हरिप्रसाद को हरियाणा मिलने की उम्मीद। वह चुनावों में पृथ्वीराज चव्हाण के साथ जुड़ चुके। यों तो पृथ्वीराज जुगाड़ू। पर कर्नाटक की नैय्या पार नहीं लगा पाए थे। बुधवार को हरियाणा के आबर्जवरों की मीटिंग हुई। तो पृथ्वीराज, हरिप्रसाद, हनुमंत के साथ विप्लव ठाकुर भी दिखी। बात हरियाणा की चली। तो अपने मूलचंद मीणा बोले- 'अब कांग्रेस को कोई खतरा नहीं। भजन-माया का गठजोड़ रहता। तो हुड्डा को मुश्किल होती।'