<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?>
<rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>Socio Political News &#187; Inside Scoop</title>
	<atom:link href="http://indiagatenews.com/india-news/category/miscellenous/andar-ki-baat/feed" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>http://indiagatenews.com</link>
	<description>News Articles and Reactions</description>
	<lastBuildDate>Wed, 24 Feb 2010 04:04:57 +0000</lastBuildDate>
	
	<language>en</language>
	<sy:updatePeriod>hourly</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>1</sy:updateFrequency>
			<item>
		<title>तोहफे की साड़ियां</title>
		<link>http://indiagatenews.com/india-news/46.php</link>
		<comments>http://indiagatenews.com/india-news/46.php#comments</comments>
		<pubDate>Sat, 03 Nov 2007 14:46:00 +0000</pubDate>
		<dc:creator>Ajay Setia</dc:creator>
				<category><![CDATA[Inside Scoop]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://indiagatese.com/gift-of-sarees/</guid>
		<description><![CDATA[प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात के बाद येदुरप्पा को मुख्यमंत्री बनने की पूरी उम्मीद हो गई थी। वह इतने खुश हुए कि समय न होने के बावजूद पत्नी, बहुओं और बेटियों के लिए दिल्ली से तोहफा खरीदकर ले जाने की योजना बना ली। प्रधानमंत्री के घर से बारह बजे निकले थे, उसके बाद वेंकैया नायडू [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p align="justify"><span style="font-size: 11pt; font-family: Mangal"><font color="#000080">प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात के बाद येदुरप्पा को मुख्यमंत्री बनने की पूरी उम्मीद हो गई थी। वह इतने खुश हुए कि समय न होने के बावजूद पत्नी, बहुओं और बेटियों के लिए दिल्ली से तोहफा खरीदकर ले जाने की योजना बना ली। प्रधानमंत्री के घर से बारह बजे निकले थे, उसके बाद वेंकैया नायडू के घर पर भी मीटिंग चलती रही, पौने दो बजे की फ्लाइट थी, इसके बावजूद साड़ियां और सूट खरीदने का फैसला कर लिया। वेंकैया नायडू के घर से निकलकर येदुरप्पा ने साउथ एक्स पार्ट वन में पहले साड़ियों और सूटों की खरीददारी की और उसके बाद हवाई अड्डे गए। इस भागादौड़ी में दोपहर का भोजन भी छूट गया। उधर से फ्लाइट भी बिना भोजन वाले स्पाइस जेट की।<o></o></font></span></p>
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://indiagatenews.com/india-news/46.php/feed</wfw:commentRss>
		<slash:comments>0</slash:comments>
		</item>
		<item>
		<title>मनमोहन का चौका</title>
		<link>http://indiagatenews.com/india-news/45.php</link>
		<comments>http://indiagatenews.com/india-news/45.php#comments</comments>
		<pubDate>Sat, 03 Nov 2007 14:42:56 +0000</pubDate>
		<dc:creator>Ajay Setia</dc:creator>
				<category><![CDATA[Inside Scoop]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://indiagatese.com/its-four-from-manmohan/</guid>
		<description><![CDATA[पिछले दिनों लाल कृष्ण आडवाणी की रहनुमाई में कर्नाटक के सिलसिले में प्रधानमंत्री से मिलने गए प्रतिनिधि मंडल में वेंकैया नायडू भी थे। हालांकि मुलाकात सिर्फ कर्नाटक के मुद्दे पर तय हुई थी, लेकिन वेंकैया नायडू ने धान की कीमत का सवाल कुछ इस तरह उठा दिया कि दक्षिण राज्यों के साथ अन्याय हो रहा [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p align="justify" style="margin: 0pt; text-align: justify" class="MsoNormal"><span style="font-size: 11pt; font-family: Mangal"><font color="#000080">पिछले दिनों लाल कृष्ण आडवाणी की रहनुमाई में कर्नाटक के सिलसिले में प्रधानमंत्री से मिलने गए प्रतिनिधि मंडल में वेंकैया नायडू भी थे। हालांकि मुलाकात सिर्फ कर्नाटक के मुद्दे पर तय हुई थी, लेकिन वेंकैया नायडू ने धान की कीमत का सवाल कुछ इस तरह उठा दिया कि दक्षिण राज्यों के साथ अन्याय हो रहा है। इस पर मनमोहन सिंह वेंकैया नायडू पर बिफर पड़े। उन्होंने वेंकैया नायडू से कहा कि वह धान की कीमतों के मुद्दे पर दक्षिण और उत्तर को बांटने की कोशिश न करें। वेंकैया नायडू का सामान्य ज्ञान बढ़ाते हुए मनमोहन सिंह ने कहा कि उत्तर भारत में भी धान की फसल दक्षिण जितनी ही होती है। उन्होंने वेंकैया नायडू को यह भी बताया कि जहां दक्षिण भारत में धान का ज्यादा इस्तेमाल होता है वहां दक्षिण में गेहूं से बनी हुई दूसरी चीजों का खूब इस्तेमाल होता है। असल में मनमोहन सिंह के भड़कने की वजह यह भी थी कि उस दिन धान की कीमत बढ़ाने पर केबिनेट कमेटी में विचार होना था। उस दिन कीमत बढाई जानी थी, जिसे बीजेपी अपना दबाव बताकर प्रचार करती। वेंकैया नायडू पर भड़कने के बाद मनमोहन<span>  </span>सिंह ने केबिनेट कमेटी का फैसला भी टलवा दिया।</font></span></p>
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://indiagatenews.com/india-news/45.php/feed</wfw:commentRss>
		<slash:comments>0</slash:comments>
		</item>
		<item>
		<title>प्रियंका का क्रिकेट प्रेम</title>
		<link>http://indiagatenews.com/india-news/44.php</link>
		<comments>http://indiagatenews.com/india-news/44.php#comments</comments>
		<pubDate>Sat, 03 Nov 2007 14:40:46 +0000</pubDate>
		<dc:creator>Ajay Setia</dc:creator>
				<category><![CDATA[Inside Scoop]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://indiagatese.com/love-for-cricket-or-politics/</guid>
		<description><![CDATA[टेनिस खिलाड़ी प्रकाश पादुकोण की बेटी दीपिका पादुकोण भले ही महेंद्र सिंह धोनी के न्यौते पर ट्वंटी-ट्वंटी क्रिकेट मैच देखने जाए। लेकिन खेल की पारिवारिक पृष्ठभूमि के कारण बात जायज लगती है। जबकि राहुल-प्रियंका की ऐसी कोई पृष्ठभूमि नहीं, फिर भी दोनों ने क्रिकेट मैच के सहारे युवा वोटरों को प्रभावित करने का नया फार्मूला [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p align="justify"><span style="font-size: 11pt; font-family: Mangal"><font color="#000080">टेनिस खिलाड़ी प्रकाश पादुकोण की बेटी दीपिका पादुकोण भले ही महेंद्र सिंह धोनी के न्यौते पर ट्वंटी-ट्वंटी क्रिकेट मैच देखने जाए। लेकिन खेल की पारिवारिक पृष्ठभूमि के कारण बात जायज लगती है। जबकि राहुल-प्रियंका की ऐसी कोई पृष्ठभूमि नहीं, फिर भी दोनों ने क्रिकेट मैच के सहारे युवा वोटरों को प्रभावित करने का नया फार्मूला निकाल लिया है। वाजपेयी सरकार के समय पाकिस्तान जाकर भारत-पाक मैच देखने से भारतीय चैनलों पर मिली पब्लिसिटी के बाद राहुल-प्रियंका को यह मुफ्त का नया हथियार मिला है, जिसे इस्तेमाल करने का कोई मौका नहीं चूकते। मुंबई के ट्वंटी-ट्वंटी में राहुल के साथ राबर्ट वढेरा भी चैनलों पर दिखाई दिए लेकिन प्रियंका नहीं जा पाई। प्रियंका गांधी ने इसकी भरपाई उस दिन की, जब ट्वंटी-ट्वंटी की टीम दिल्ली में प्रधानमंत्री को मिलने आई। राजीव शुक्ल ने सोनिया गांधी से मिलने का प्रोग्राम भी बनवाया और प्रियंका को भी सूचना दी गई। प्रियंका ने खासकर आरपी सिंह के साथ खड़े होकर कई फोटो खिंचवाए। इसकी वजह है आरपी सिंह का प्रियंका के भावी निर्वाचन क्षेत्र रायबरेली का होना। <o></o></font></span></p>
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://indiagatenews.com/india-news/44.php/feed</wfw:commentRss>
		<slash:comments>0</slash:comments>
		</item>
		<item>
		<title>मनमोहन का सामान्य ज्ञान</title>
		<link>http://indiagatenews.com/india-news/43.php</link>
		<comments>http://indiagatenews.com/india-news/43.php#comments</comments>
		<pubDate>Sat, 03 Nov 2007 14:38:23 +0000</pubDate>
		<dc:creator>Ajay Setia</dc:creator>
				<category><![CDATA[Inside Scoop]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://indiagatese.com/general-knowledge-of-manmohan/</guid>
		<description><![CDATA[अब तक लोग यही समझते थे कि मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री पद को दिए गए काम की तरह निभा रहे हैं, सीधे तौर पर राजनीति में  ज्यादा दिलचस्पी नहीं लेते। लेकिन आम धारणा के विपरीत अब ऐसी स्थिति नहीं रही। विपक्ष के नेता लाल कृष्ण आडवाणी को भी उस समय झटका लगा, जब कर्नाटक के सांसदों [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p align="justify"><span style="font-size: 11pt; font-family: Mangal"><font color="#000080">अब तक लोग यही समझते थे कि मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री पद को दिए गए काम की तरह निभा रहे हैं, सीधे तौर पर राजनीति में<span>  </span>ज्यादा दिलचस्पी नहीं लेते। लेकिन आम धारणा के विपरीत अब ऐसी स्थिति नहीं रही। विपक्ष के नेता लाल कृष्ण आडवाणी को भी उस समय झटका लगा, जब कर्नाटक के सांसदों के साथ प्रधानमंत्री से मिलने गए और वहां पर मनमोहन सिंह ने एक सांसद राजीव चंद्रशेखर से पूछ लिया कि वह किस पार्टी में हैं। प्रधानमंत्री किसी सांसद के बारे में इतनी जानकारी रखते होंगे, यह आडवाणी के लिए हैरानी में डालने वाली बात थी। राजीव चंद्रशेखर भाजपा के सांसद नहीं। वह कभी कांग्रेस के साथ दिखाई देते हैं तो कभी जेडीएस के<span>  </span>साथ। उन्हें भाजपा प्रतिनिधिमंडल में देखकर मनमोहन सिंह ने जानबूझकर सवाल किया था। मूल रूप से केरल के उद्योगपति कर्नाटक से राज्यसभा में ठीक उसी तरह चुनकर आए थे, जैसे कर्नाटक से ही विजय माल्या, महाराष्ट्र से राहुल बजाज और उत्तर प्रदेश से पहली बार राजीव शुक्ल जीतकर आए थे। <o></o></font></span></p>
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://indiagatenews.com/india-news/43.php/feed</wfw:commentRss>
		<slash:comments>0</slash:comments>
		</item>
		<item>
		<title>गुस्ताखी राजदूत की</title>
		<link>http://indiagatenews.com/india-news/42.php</link>
		<comments>http://indiagatenews.com/india-news/42.php#comments</comments>
		<pubDate>Sat, 03 Nov 2007 14:36:40 +0000</pubDate>
		<dc:creator>Ajay Setia</dc:creator>
				<category><![CDATA[Inside Scoop]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://indiagatese.com/ego-problem-of-an-ambassador/</guid>
		<description><![CDATA[जब तक ब्लैकविल अमेरिका के राजदूत थे, उनका भाजपा के राजनीतिज्ञों से अच्छा तालमेल था। लेकिन मेल्फोर्ड के राजदूत बनकर आने के बाद से स्थिति बदल गई, न सिर्फ तालमेल खत्म हो गया, अलबत्ता तनाव की स्थिति भी पैदा हो गई। इसकी वजह थी मेल्फोर्ड का लाल कृष्ण आडवाणी को दूतावास में आकर मिलने की [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><font size="3">जब तक ब्लैकविल अमेरिका के राजदूत थे, उनका भाजपा के राजनीतिज्ञों से अच्छा तालमेल था। लेकिन मेल्फोर्ड के राजदूत बनकर आने के बाद से स्थिति बदल गई, न सिर्फ तालमेल खत्म हो गया, अलबत्ता तनाव की स्थिति भी पैदा हो गई। इसकी वजह थी मेल्फोर्ड का लाल कृष्ण आडवाणी को दूतावास में आकर मिलने की चिट्ठी भेजना। इस चिट्ठी को देखकर आडवाणी की भौंहें तन गई और उन्होंने इसका जवाब देना भी उचित नहीं समझा। नतीजा यह निकला कि एटमी करार पर आडवाणी से मुलाकात की जरूरत पड़ी, तो अमेरिका के हाथ-पांव फूल गए। आखिर न्यूयार्क में स्थित दक्षिण एशिया के प्रभारी जेम्स क्लेड ने आडवाणी के ओएसडी दीपक चोपड़ा से फोन करके तनाव की वजह पूछी। उसी दिन मेल्फोर्ड ने खुद फोन करके मुलाकात का वक्त मांगा और चिट्ठी भी लिखी। आडवाणी ने आठ दिन बाद मिलने का वक्त दिया। एटमी करार पर सहयोग मांगने आए मेल्फोर्ड को अपनी पहली चिट्ठी पर माफी भी मांगनी पड़ी।</font></p>
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://indiagatenews.com/india-news/42.php/feed</wfw:commentRss>
		<slash:comments>0</slash:comments>
		</item>
		<item>
		<title>मुसीबत जेटली की</title>
		<link>http://indiagatenews.com/india-news/20.php</link>
		<comments>http://indiagatenews.com/india-news/20.php#comments</comments>
		<pubDate>Sun, 14 Oct 2007 08:47:04 +0000</pubDate>
		<dc:creator>Ajay Setia</dc:creator>
				<category><![CDATA[Inside Scoop]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://ajaysetia.com/problem-of-jaitley/</guid>
		<description><![CDATA[अरुण जेटली ने जिस भी राज्य में चुनाव की बागडोर संभाली, सफलता हासिल की। गुजरात, मध्य प्रदेश, पंजाब के अलावा 1998 का हिमाचल चुनाव और 2006 का दिल्ली नगर निगम चुनाव भी इसका उदाहरण। राजनाथ सिंह ने अरुण जेटली को गुजरात का प्रभार नहीं देकर उनका कद घटाने की कोशिश की, लेकिन जब खुद नरेंद्र [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p align="justify"><span style="font-size: 11pt; font-family: Mangal"><font color="#000080">अरुण जेटली ने जिस भी राज्य में चुनाव की बागडोर संभाली, सफलता हासिल की। गुजरात, मध्य प्रदेश, पंजाब के अलावा 1998 का हिमाचल चुनाव और 2006 का दिल्ली नगर निगम चुनाव भी इसका उदाहरण। राजनाथ सिंह ने अरुण जेटली को गुजरात का प्रभार नहीं देकर उनका कद घटाने की कोशिश की, लेकिन जब खुद नरेंद्र मोदी ने उन्हें ही विधानसभा चुनाव का प्रभारी बनाने की मांग की तो पार्टी अध्यक्ष के पास कोई चारा नहीं था। अरुण जेटली भी यही चाहते थे, आखिर यह एक तरह से राजनाथ सिंह की हार थी। लेकिन चुनाव प्रभारी बनने के बाद अरुण जेटली के सामने मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा है। उन्हें उम्मीद थी कि वह अपने प्रभाव से बागियों को नियंत्रित कर लेंगे, लेकिन सुरेश भाई मेहता और वल्लभ कथेरिया दशकों पुराना साथ छोड़कर कांग्रेस के साथ हाथ मिलाने को तैयार हो गए हैं। अगर अरुण जेटली इन्हें नहीं रोक पाए तो चुनाव निराशा के दौर से शुरू होगा। ऐसी स्थिति को टालने के लिए पार्टी के दूसरे महासचिव और गुजरात के प्रभारी ओम माथुर बीमारी के बावजूद दिन-रात एक किए हुए हैं। जबकि नरेंद्र मोदी विरोधी केशुभाई पटेल का दिल्ली वाला सरकारी बंगला बागी गतिविधियों का केंद्र बन गया है, यह बंगला अरुण जेटली के सरकारी बंगले से ज्यादा दूर नहीं। </font></span></p>
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://indiagatenews.com/india-news/20.php/feed</wfw:commentRss>
		<slash:comments>0</slash:comments>
		</item>
		<item>
		<title>यूपीए की तिकड़ी भारी पड़ी</title>
		<link>http://indiagatenews.com/india-news/19.php</link>
		<comments>http://indiagatenews.com/india-news/19.php#comments</comments>
		<pubDate>Sun, 14 Oct 2007 08:43:40 +0000</pubDate>
		<dc:creator>Ajay Setia</dc:creator>
				<category><![CDATA[Inside Scoop]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://ajaysetia.com/upa-ki-tikdi/</guid>
		<description><![CDATA[प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को उम्मीद थी कि अमेरिका से एटमी करार के मुद्दे पर सोनिया गांधी आखिर तक उनका साथ देंगी। इसलिए उन्होंने दस अगस्त को कोलकाता के टेलीग्राफ अखबार को इंटरव्यू देकर वामपंथियों को खुली चुनौती दे दी थी। सोनिया गांधी ने मनमोहन सिंह का दो महीने तक पूरा साथ दिया। पहले छह अक्टूबर [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p align="justify" style="text-align: justify" class="MsoNormal"><font color="#000080"><span style="font-size: 11pt; font-family: Mangal">प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को उम्मीद थी कि अमेरिका से एटमी करार के मुद्दे पर सोनिया गांधी आखिर तक उनका साथ देंगी। इसलिए उन्होंने दस अगस्त को कोलकाता के टेलीग्राफ अखबार को इंटरव्यू देकर वामपंथियों को खुली चुनौती दे दी थी। सोनिया गांधी ने मनमोहन सिंह का दो महीने तक पूरा साथ दिया। पहले छह अक्टूबर को प्रधानमंत्री की इफ्तार पार्टी में और अगले दिन हरियाणा की एक रैली में एटमी करार का विरोध करने वाले कम्युनिस्टों को खुद चुनौती दी। लेकिन जब यूपीए के घटक दलों के तीन बड़े नेता करुणानिधि, शरद पवार और लालू प्रसाद यादव एटमी करार के मुद्दे पर चुनाव के खिलाफ खड़े हो गए, तो सोनिया गांधी हिम्मत हार गई। सोनिया गांधी ने आखिर इन्हीं तीनों नेताओं की बदौलत कांग्रेस को सत्ता के दरवाजे तक पहुंचाने में सफलता हासिल की थी। लालू यादव ने सोनिया गांधी से कहा कि वह अभी बिहार में नीतीश कुमार को हराने की हालत में नहीं हैं। शरद पवार ने महाराष्ट्र में शिवसेना-बीजेपी का पलड़ा भारी होने की बात कही। करुणानिधि ने सोनिया और मनमोहन सिंह दोनों से कहा कि जल्द चुनाव लादकर वे तमिलनाडु में उनके लिए मुसीबत खड़ी न करें। इन तीनों के तेवरों को देख अर्जुन सिंह, प्रणव मुखर्जी और शिवराज पाटिल ने भी सोनिया को चुनाव से आगाह कर दिया। जमीनी हालात जानकर सोनिया ने भी रुख बदलना बेहतर समझा और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह यूपीए में एकदम अकेले पड़ गए।<o></o></span></font></p>
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://indiagatenews.com/india-news/19.php/feed</wfw:commentRss>
		<slash:comments>0</slash:comments>
		</item>
		<item>
		<title>ज्योतिरादित्य की ताजपोशी</title>
		<link>http://indiagatenews.com/india-news/18.php</link>
		<comments>http://indiagatenews.com/india-news/18.php#comments</comments>
		<pubDate>Sun, 14 Oct 2007 08:41:47 +0000</pubDate>
		<dc:creator>Ajay Setia</dc:creator>
				<category><![CDATA[Inside Scoop]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://ajaysetia.com/jyotiraditya-ki-tajposhi/</guid>
		<description><![CDATA[कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने हिंदुस्तान टाइम्स सम्मेलन में केंद्रीय मंत्रिमंडल के फेरबदल का संकेत देकर कांग्रेसियों में भगदड़ मचा दी है। अब तक मंत्री पद से वंचित रहे कांग्रेसी सांसद इसे आखिरी मौका मानकर सिर-धड़ की बाजी लगाने पर उतर आए हैं। लेकिन सोनिया गांधी के करीबी दावा कर रहे हैं कि इस बार [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p align="justify" style="text-align: justify" class="MsoNormal"><font color="#000080"><span style="font-size: 11pt; font-family: Mangal">कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने हिंदुस्तान टाइम्स सम्मेलन में केंद्रीय मंत्रिमंडल के फेरबदल का संकेत देकर कांग्रेसियों में भगदड़ मचा दी है। अब तक मंत्री पद से वंचित रहे कांग्रेसी सांसद इसे आखिरी मौका मानकर सिर-धड़ की बाजी लगाने पर उतर आए हैं। लेकिन सोनिया गांधी के करीबी दावा कर रहे हैं कि इस बार के फेरबदल में सिर्फ युवाओं को ही मौका मिलेगा। अगर ऐसा ही हुआ तो ज्योतिरादित्य का नंबर लगना तय है। युवा सांसदों में उन्होंने अपनी छवि अलग तरह की बनाई है, वह संसद में जिस भी विषय पर बोलते हैं, गहराई से बोलते<span>  </span>हैं। वैसे मंत्री पद पाने की उम्मीद दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के बेटे संदीप दीक्षित भी लगाए हुए हैं। हालांकि दिल्ली से अजय माकन पहले से केंद्रीय मंत्रिमंडल में हैं। <o></o></span></font></p>
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://indiagatenews.com/india-news/18.php/feed</wfw:commentRss>
		<slash:comments>0</slash:comments>
		</item>
		<item>
		<title>हिमाचल कांग्रेस में दहशत</title>
		<link>http://indiagatenews.com/india-news/17.php</link>
		<comments>http://indiagatenews.com/india-news/17.php#comments</comments>
		<pubDate>Sun, 14 Oct 2007 08:39:26 +0000</pubDate>
		<dc:creator>Ajay Setia</dc:creator>
				<category><![CDATA[Inside Scoop]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://ajaysetia.com/hiamachal-congress/</guid>
		<description><![CDATA[भाजपा आरोप लगाती रही है कि चुनाव आयुक्त नवीन चावला हर खबर सोनिया गांधी को लीक करते हैं। लेकिन चुनाव आयोग की ओर से अचानक हिमाचल प्रदेश के चुनाव समय से दो महीने पहले कर दिए जाने की कांग्रेस को भनक तक नहीं लगी। अगर जरा सा भी संकेत मिलता तो मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह अपना [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p align="justify" class="MsoNormal"><span style="font-size: 11pt; font-family: Mangal"><font color="#000080">भाजपा आरोप लगाती रही है कि चुनाव आयुक्त नवीन चावला हर खबर सोनिया गांधी को लीक करते हैं। लेकिन चुनाव आयोग की ओर से अचानक हिमाचल प्रदेश के चुनाव समय से दो महीने पहले कर दिए जाने की कांग्रेस को भनक तक नहीं लगी। अगर जरा सा भी संकेत मिलता तो मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह अपना अमेरिका दौरा रद्द करके आचार संहिता लागू होने से पहले-पहले कुछ चुनावी घोषणाएं कर देते। जब चुनाव की घोषणा हुई तो वीरभद्र सिंह अमेरिका में थे। हड़बड़ाए सारे कांग्रेसी मंत्री दिल्ली पहुंच गए। उन्हें समझ नहीं आ रहा कि क्या करें। राज्य में हालात पहले से बीजेपी के पक्ष में हैं और ऊपर से दो महीने पहले चुनाव। असल में पहले चुनाव का बीज खुद मुख्यमंत्री वीरभद्र ने बोया। पूरे राज्य में एक साथ चुनाव करवाने की याचिका खुद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में डलवाई थी। हिमाचल की भरमौर, किन्नौर और<span>  </span>लाहौल-स्पीति सीटों पर कभी भी आम चुनावों के साथ चुनाव नहीं हुए। क्योंकि इन तीनों ही सीटों के रास्ते नवंबर मध्य में बंद हो जाते हैं और मई में जाकर खुलते हैं। वीरभद्र को उम्मीद थी कि कोर्ट मई में चुनाव कराने की इजाजत देगी जिससे सरकार को दो महीने ज्यादा मिल जाएंगे। लेकिन<span>  </span>कोर्ट ने फैसला आयोग पर छोड़ दिया और आयोग ने रास्ते बंद होने से पहले चुनाव करवाने का फैसला ले लिया।<o></o></font></span></p>
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://indiagatenews.com/india-news/17.php/feed</wfw:commentRss>
		<slash:comments>0</slash:comments>
		</item>
		<item>
		<title>मायावती का डर</title>
		<link>http://indiagatenews.com/india-news/16.php</link>
		<comments>http://indiagatenews.com/india-news/16.php#comments</comments>
		<pubDate>Sun, 14 Oct 2007 08:37:10 +0000</pubDate>
		<dc:creator>Ajay Setia</dc:creator>
				<category><![CDATA[Inside Scoop]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://ajaysetia.com/mayawati-ka-dar/</guid>
		<description><![CDATA[उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह को नेस्तनाबूद करके मायावती के मुख्यमंत्री बनने पर भी कांग्रेस को कोई फायदा नहीं हो रहा है। अलबत्ता  हालात और विकट हो गए हैं। मुलायम सिंह की हैसियत उत्तर प्रदेश  से बाहर कांग्रेस को नुकसान पहुंचाने की नहीं थी। लेकिन मायावती की हैसियत अब बाकी राज्यों में पांव फैलाकर कांग्रेस [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p align="justify"><font color="#000080"><span style="font-size: 11pt; font-family: Mangal">उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह को नेस्तनाबूद करके मायावती के मुख्यमंत्री बनने पर भी कांग्रेस को कोई फायदा नहीं हो रहा है। अलबत्ता<span>  </span>हालात और विकट हो गए हैं। मुलायम सिंह की हैसियत उत्तर प्रदेश<span>  </span>से बाहर कांग्रेस को नुकसान पहुंचाने की नहीं थी। लेकिन मायावती की हैसियत अब बाकी राज्यों में पांव फैलाकर कांग्रेस को नुकसान पहुंचाने की हो गई है। शुरूआती मीठी-मीठी बातों के बाद मायावती ने अब कांग्रेस के खिलाफ जहर उगलना शुरू कर दिया है। मायावती ने चुनाव में साथ देने वाले उत्तर प्रदेश के ब्राह्मण नेताओं को गाड़ी-घोड़ा का इंतजाम करके राजस्थान, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और गुजरात रुखसत कर दिया है। इन ब्राह्मण नेताओं को इन सभी चुनाव वाले राज्यों में ब्राह्मण वोटरों को लुभाने की जिम्मेदारी दी गई है। कांग्रेस का पुराना ब्राह्मण-दलित गठजोड़ इन सभी राज्यों में बसपा के साथ जुड़ा, तो नुकसान कांग्रेस को ही होगा। मायावती ने कांग्रेस की नीतियों को भी निशाने पर ले लिया है। उन्होंने भारत-अमेरिका एटमी करार का विरोध करके सोनिया को अपने तेवर दिखा दिए हैं।</span></font></p>
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://indiagatenews.com/india-news/16.php/feed</wfw:commentRss>
		<slash:comments>0</slash:comments>
		</item>
	</channel>
</rss>
