कूटनीति

Analysis of National and International Political Scenario

खाद्यान्न समस्या का दूसरा पहलू

अमेरिकी राष्ट्रपति जार्ज बुश ने भारत के नव धनाढय मध्यम आय वर्ग को पेटू बताकर कुछ नया नहीं कहा। यही बात भारत के मंत्री प्रफुल्ल पटेल पहले ही कह चुके हैं।
बड़े पेट के भरन को है रहीम देख बाढ़ि
यातें हाथी हहरि कै दप दा दांत दे काढ़ि
कविवर रहीम कहे हैं कि जो आदमी बड़ा है [...]

कौन मानता है तिब्बत को चीन का अभिन्न अंग

तिब्बत और जम्मू कश्मीर पर भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की दो महान गलतियां हमारी कूटनीतिक अपरिपक्वता का पीछा नहीं छोड़ रही। राजा हरि सिंह शुरू में जम्मू कश्मीर को स्वतंत्र रखने के पक्ष में थे। लेकिन पाकिस्तान ने कबायलियों को आगे करके कश्मीर पर कब्जे की कोशिश शुरू की तो राजा हरि [...]

ओलंपिक के बहाने तिब्बत का दर्द

दुनिया के ज्यादातर हिस्सों पर राज करने की ख्वाहिश ने 19वीं सदी तक लाखों-करोड़ों बेगुनाहों का खून बहाया है। पंद्रहवीं सदी में मुगल भी हिंदोस्तान पर राज करने की ख्वाहिश लेकर भारत आए थे और उन्होंने हिंदू राजाओं के साथ युध्द करके विस्तारवादी मुहिम जारी रखी। मुगल हिंदोस्तान के ज्यादातर हिस्से पर काबिज हो गए [...]

असली लोकतंत्र तो है अमेरिका में

भारत में अमेरिकी चुनाव पर इतनी दिलचस्पी पहले नहीं देखी गई, जितनी इस बार देखी जा रही है। लोग हैरान हैं कि दो साल पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति के चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। पिछले कुछ महीनों से डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन पार्टियां अपने उम्मीदवारों का फैसला करने की प्रक्रिया अपना रही हैं। उम्मीदवार [...]

भारत की ताकत का लोहा चीन ने माना

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की चीन यात्रा को काफी हद तक सफल कहना उचित रहेगा। ऐसे बहुत कम मौके आते हैं, जब किसी राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री के दूसरे देश की यात्रा के दौरान कोई विवाद खड़ा होता हो। हाल ही के वर्षों की ऐसी दो घटनाएं तो गिनाई जा सकती हैं। पहली घटना डेनमार्क की है, [...]

दोस्त, दुश्मन की पहचान जरूरी

हम भारतीय इतने सुसंस्कारित हैं कि मरे हुए व्यक्ति की बुराईयां नहीं देखते। ऐसा नहीं कि ऐसी सुसंस्कृति अपने पड़ोसी देश पाकिस्तान की नहीं। आखिर भारत और पाकिस्तान एक ही देश के विभाजन से ही तो बने हैं। धर्म और पूजा पध्दति को छोड़ दें, तो दोनों देशों की संस्कृति, भाषा-बोली, रहन-सहन एक जैसा ही [...]