Current Analysis
Earlier known as राजनीति this column has been re-christened as हाल फिलहाल.
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मुखर्जी-उपाध्याय, अटल-आडवाणी के बाद अब सुषमा-गड़करी मोहन भागवत ने भाजपा के नए नेतृत्व के चयन की जिम्मेदारी लालकृष्ण आडवाणी को सौंपकर पिछले चार साल से चली गुटबाजी को विराम देने की कोशिश की है। आडवाणी की ओर से चुने गए पार्टी के तीनों नए नेता सुषमा स्वराज, नितिन गड़करी और अरुण जेटली अब पिछले चार [...]
पीएमके प्रमुख रामदौस भी राज्यों के विभाजन की दौड़ में शामिल हो गए हैं। तेलंगाना की मांग के हिंसक रूप लेने पर केंद्र सरकार ने आंध्र प्रदेश के बंटवारे की बात सिध्दांतत: मंजूर कर ली। केंद्र का यह फैसला मक्खियों के छत्ते में हाथ मारने जैसा साबित हो रहा है क्योंकि लगभग हर राज्य में [...]
पूर्वोत्तर के कई राज्य ब्रिटिश भारत के मानचित्र में भी नहीं थे। अलग भाषा और नस्ल के कारण पूर्वोत्तर में अलगाववादी आंदोलन तो था ही, विकास के असंतुलन ने आग में घी का काम किया है। बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना 19 दिसम्बर को भारत आ रही हैं। उनके भारत आने से ठीक पहले बांग्लादेश [...]
भतीजे राज ठाकरे के बाद अब पुत्रवधु स्मिता का भी बाल ठाकरे का साथ छोड़ने का फैसला। महाराष्ट्र में भाजपा गिरते ग्राफ वाली उध्दव की शिवसेना को अपना हमराही बनाए रखे, या उत्तर-दक्षिण भारत विरोधी राजठाकरे को नया हमराही बनाए। भाजपा के आगे कुआं है, तो पीछे खाई। केशव सीताराम का जन्म महाराष्ट्र के एक [...]
अपना दौरा टालकर बाराक ओबामा को उनकी कश्मीर नीति पर मुंह तोड़ जवाब दे सकते थे मनमोहन सिंह। यों भी संसद सत्र के समय प्रधानमंत्री को विदेश दौरों से परहेज करना चाहिए। संसद का शीतकालीन सत्र चल रहा है और हमारे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह अमेरिकी राष्ट्रपति बाराक ओबामा की मेहमानबाजी का लुत्फ उठा रहे हैं। [...]
नितिन गडकरी को भारतीय जनता पार्टी का अध्यक्ष बनाने के पीछे संघ की दलील यह है कि पार्टी के सभी मौजूदा राष्ट्रीय नेता गुटबाजी में शामिल हैं। हालांकि राजनाथ सिंह को जब पार्टी का अध्यक्ष बनाया गया था तब वह गुटबाजी की राजनीति का शिकार नहीं थे। लेकिन उनके चार साल के कार्यकाल में पार्टी [...]