हाल फिलहाल
Earlier known as राजनीति this column has been re-christened as हाल फिलहाल.
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इंदिरा गांधी ने भ्रष्टाचार के खिलाफ शुरू हुए जेपी आंदोलन के कारण आपातकाल नहीं लगाया था। अलबत्ता इलाहाबाद हाईकोर्ट की ओर से लोकसभा में उनका निर्वाचन रद्द करने के फैसले के कारण लगाया था।
पंद्रहवीं लोकसभा के चुनाव में पहली बार वोट डालने वाले 18 साल के नौजवान को उस आपातकाल के बारे में नहीं पता [...]
ममता से मुकाबले के लिए माकपा ने खुद माओवादियों को बंगाल में बुलाया। अब माओवादी किसानों, मजदूरों, आदिवासियों के जख्मों पर मरहम रख खोद रहे हैं वामपंथी जमीन।
अंग्रेज देश की राजधानी तो कोलकाता से दिल्ली ले आए थे। लेकिन आजादी के बाद पचास के दशक तक कोलकाता देश की आर्थिक राजधानी बनी हुई थी। देश [...]
पाकिस्तान की तरह राजनीतिक दलों को आम चुनाव में मिली सीटों के अनुपात में महिलाओं को मनोनीत करने का अधिकार देकर 33 फीसदी आरक्षण सहजता से लागू किया जा सकता है। राजनीतिक दल सभी वर्गों की महिलाओं को मनोनीत करने की नैतिक जिम्मेदारी से बंध जांएगे।
मनमोहन सरकार ने राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील के लिए तैयार किए [...]
जो युवा राहुल गांधी के लिए पलक पांवड़े बिछाए हुए हैं, उनके सपने साकार नहीं हुए, तो वे सूपड़ा साफ करने में भी देर नहीं लगाएंगे। कांग्रेस की एक गलती उसे भारी पड़ सकती है।
पंद्रहवीं लोकसभा के साथ संसदीय इतिहास का नया अध्याय शुरू हुआ है। राजीव गांधी प्रचंड जीत के बाद पिछले बीस साल [...]
भाजपा के दो पावर सेंटर पार्टी की हार का कारण बने। कांग्रेस खुद को और मजबूत करने में लगी है, जबकि भाजपा अभी भी गुटबाजी का शिकार। चेहरे और चाल के साथ चरित्र भी बदलना होगा भाजपा को। भाजपा सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को छोड़कर राजनीतिक राष्ट्रवाद अपनाए, तो उसका आधार ज्यादा व्यापक हो सकता है।
मनमोहन सिंह [...]
भाजपा राजस्थान और उत्तराखंड में पार्टी की गुटबाजी के कारण हारी। मध्यप्रदेश में घमंड पर सवार होकर हारी। हरियाणा में गलत गठबंधन के कारण हारी। इन चारों राज्यों में भाजपा को 30 सीटों से हाथ धोना पड़ा। ये सभी तीस सीटें कांग्रेस को मिली हैं। मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत के बाद लालकृष्ण [...]