आधा चुनाव बीता तो दावेदारी का दौर

''पहले नारा लगा करता था- 'अबके बारी अटल बिहारी।' कई चुनावों में नारा लगा। अब बीजेपी का नारा- 'अबकी बारी लालकृष्ण आडवाणी।' अपने अरुण शौरी भविष्यकाल में चले गए। अहमदाबाद में थे। सो मोदीमयी हो गए। यों भी शौरी मोदी के मुरीद। सो उनने कहा- 'इस बार भी गुजरात से पीएम चुनो। अगली बारी भी गुजरात की।' यानी आडवाणी पीएम बने भी। तो एक ही बारी मिलेगी। वाजपेयी की तरह तीन बार शपथ नहीं। यों अपन कह सकते हैं- शौरी ने जब गुजरात से पीएम की बात कही। तो दोनों ही बार आडवाणी दिमाग में होंगे। पर नहीं, उनके दिमाग में मोदी ही होंगे। बीजेपी वाले ही नहीं मानते- शौरी के दिमाग में अगली बार भी आडवाणी होंगे। इस बार भी आधे भाजपाई मोदी के गुण गाते दिखेंगे। कर्नाटक का एक आला भाजपाई नेता अपन से फुनिया रहा था। बोला- 'बीजेपी आडवाणी की जगह मोदी को प्रोजेक्ट करती। तो सरकार जरूर बनती।' उस भाजपाई को आडवाणी के पीएम बनने का भरोसा नहीं। पर शुक्रवार को रविशंकर प्रसाद का दावा उसके उलट रहा। अब जब आधी सीटों पर चुनाव निपट चुका। तो कांग्रेस-बीजेपी में असली जमा-घटाओ शुरू। पहले रविशंकर प्रसाद की राय। बोले- 'कांग्रेस आंध्र, असम में लुढ़क गई। हम असम, बिहार, झारखंड, यूपी में सुधरेंगे। कर्नाटक, एमपी, छत्तीसगढ़ में बराबर रहेंगे।' उनने राजस्थान पर तो कन्नी ही काटी। जहां घटने के आसार। वहां की बात क्यों करें। पर सवाल मोदी का उठा। तो सकपका गए। आधे रास्ते में नया विवाद खड़ा हुआ। तो बाकी दिन जवाब देते बीतेंगे। सो बोले- 'मोदी के भविष्य में पीएम बनने की पूरी संभावना।' तो क्या अगली बार मोदी प्रोजेक्ट होंगे। इस सवाल से भन्ना गए रविशंकर। बिलबिलाकर बोले- 'भाजपा कोई परिवारवादी या वंशवादी पार्टी नहीं। सही समय पर सही फैसला होगा।' अब जब अपन लोगों को तिल मिल ही गया। तो ताड़ बना ही लेंगे। सो पूछा- 'क्या मोदी इस बार डिप्टी पीएम होंगे?' रविशंकर और भन्नाए। बोले- 'मंत्रिमंडल में कौन क्या होगा। यह पीएम का अधिकार।' अब बात कांग्रेस के दावों की। कपिल सिब्बल ने आन रिकार्ड डेढ़ सौ का दावा ठोका। यानि दोनों पार्टियां अपनी भविष्यवाणी के करीब। डेढ-ड़ेढ़ सौ पर अटकेंगी। भले अरुण जेटली का दावा 167 सीटों का। सिब्बल गए। तो चौबीस अकबर रोड पर अभिषेक मनु प्रकट हुए। वह भी असलियत के करीब दिखे। दावा भले ही स्पष्ट बहुमत का हो। लालू-पवार-करात को गिरिया रहे हों। पर नतीजों को लेकर खाम ख्याली नहीं। बोले- 'कांग्रेस 150 से 160 तक ले जाएगी। लेफ्ट-यूपीए मिलकर 240 हो जाएं। तो बाकी जुगाड़ हो ही जाएगा। जेडीयू से भी हो सकती है बात। एनडीए छोड़कर और भी आएंगे।' याद है अपन ने बाईस अप्रेल को क्या लिखा था। अपन ने लिखा था- 'कांग्रेस की लालू को छोड़ नीतिश पर निगाह।' पर जब तक नतीजे नहीं आते। नेताओं की जुबानी जंग जारी। सब जानते हैं लेफ्ट-कांग्रेस फिर इकट्ठे होंगे। पर कपिल सिब्बल ने करात को मुंहतोड़ जवाब दिया। गुरुवार को सिंघवी ने लेफ्टियों को नकचढ़ा कहा। तो शुक्रवार को सिब्बल बोले- 'कांग्रेस चुनाव के बाद किसी फ्रंट को समर्थन नहीं देगी। लेफ्टिए तो वैसे भी साठ से तीस पर आएंगे। लालकिले पर झंडा मनमोहन ही फहराएंगे।'

लालकिल्ले पर झण्डा कौन

लालकिल्ले पर झण्डा कौन फहराएगा यह तो भविष्य ही बताएगा.... :)

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