Archive for May 2008
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अपने अभिषेक मनु सिंघवी का जवाब नहीं। गुर्जर आंदोलन पर बोले। तो वसुंधरा राजे को रानी-महारानी कह गए। पता नहीं सिंघवी का जमहूरियत से भरोसा क्यों उठा। वसुंधरा तो बाकायदा चुनी हुई सीएम। चुनाव में रहनुमाई भी वसुंधरा की थी। मनमोहन सिंह की तरह कतई नहीं। न पहले चुनाव में रहनुमाई की। न अब करेंगे। [...]
राजस्थान की आग अब दूर-दूर तक फैल गई। रेल मार्गों के बाद गुरुवार को सड़कें भी जाम हुई। पड़ोसी राज्यों यूपी, हरियाणा में तो असर हुआ ही। जम्मू कश्मीर तक असर हुआ। जहां गुर्जरों को पहले से एसटी का दर्जा। जम्मू कश्मीर के गुर्जरों ने सवाल उठाया- ‘सारे देश में गुर्जरों को एसटी का दर्जा [...]
गुर्जरों के आंदोलन की आंच दिल्ली पहुंची। तो दिल्ली की राजनीतिक हलचल तेज हो गई। अपनी वसुंधरा ने गेंद केंद्र के पाले में फेंकी। तो मनमोहन ने हंसराज भारद्वाज के पाले में। अब भारद्वाज के पाले से गेंद फिर वसुंधरा के पाले में। इससे साबित हुआ- ‘धरती गोल है।’ राजनीति का चक्र घूमना शुरू। कर्नाटक [...]
सौ साल पहले गुर्जर चाहते थे- उन्हें क्षत्रीय माना जाए। आज कह रहे हैं- ‘हमें अनुसूचित जनजाति का दर्जा मिले।’ पर गुर्जर हैं क्या? अपन इतिहास के पन्ने पलटें। तो गुर्जरों की कई कहानियां मिलेंगी। पहली कहानी- हूण दो गुटों में बंट गए। रेड हूण और सफेद हूण। रेड हूण यूरोप चले गए। सफेद हूण [...]
अपने मुरली देवड़ा मंगलवार को मनमोहन सिंह से मिले। तो उनने पेट्रोलियम कंपनियों को घाटे का ब्यौरा दिया। संसद का बजट सत्र खत्म हुआ। तब से पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने की अटकलें। पर अपन को पहले से पता था। कर्नाटक चुनाव तक कीमतें नहीं बढ़नी। सो नहीं बढ़ी। अपनी सरकार है, सो हर मामले में [...]
कर्नाटक में जब कांग्रेस की लुटिया डूब रही थी। तो सोनिया अपनी बेटी प्रियंका के घर नाते-नाती से खेल रही थी। सोनिया बारह बजे से पांच बजे तक प्रियंका के घर रही। राजीव जब पीएम थे। तो छुट्टियां मनाने की परंपरा दुबारा से शुरू की। यों जवाहर लाल नेहरू भी छुटि्टयां मनाने जाते थे। पहली [...]