Archive for August 2006
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संविधान निर्माताओं ने जब अनुसूचित जाति और जनजाति को आरक्षण देने का फैसला किया, तो बहुत लंबा चौड़ा विचार विमर्श हुआ था। सांप्रदायिक आधार पर आरक्षण नहीं देने और सदियो सदियों से पिछडे दोनों समुदायों को आरक्षण का फैसला बाकी समाज में लाकर खड़ा करने की सोच का नतीजा था। सांप्रदायिक आधार पर आरक्षण नहीं [...]
दो साल सात महीने पहले जनवरी 2004 में जब अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री के नाते इस्लामाबाद में हुए सार्क सम्मेलन में हिस्सा लेने गए थे, तो दिल्ली से गई प्रेस टीम में मैं भी मौजूद था। करीब हफ्ते भर के पाकिस्तान दौरे के समय मेरे कई भ्रम टूटे थे। मैं इस नतीजे पर पहुंचा था [...]
देश में बड़े-बड़े भ्रष्टाचार के किस्से सामने आए, लेकिन राजनीतिज्ञों को सजा नहीं मिली। अगर सजा मिली तो सिर्फ इतनी कि जब बवाल खड़ा हुआ तो कुर्सी खिसक गई, इसके अलावा कुछ नहीं हुआ। मेरा मानना है कि वोल्कर तेल घोटाले के मामले में भी ऐसा ही होगा। वोल्कर तेल घोटाला कुछ-कुछ मित्रोखिन दस्तावेजों जैसा [...]
राजनीतिक भ्रष्टाचार देश को कोढ़ की तरह खाए जा रहा है। कितनी ही बार राजनीतिज्ञों के भ्रष्टाचार का पर्दाफाश हुआ। कई सुखरामों, जयललिताओं, मायावतियों के शयन कक्षों और बाथरूमों मे नोटों की प्लास्टिक के बैगों में भरी गड्डियां मिल चुकीं। कई लालू यादवों, ओम प्रकाश चौटालाओं के आमदनी से ज्यादा जायदाद के सबूत मिल चुके। [...]