कंगारूओं की करतूतों से भरा सब्र का प्याला

आस्ट्रेलिया में हमले थम नहीं रहे। गुरुवार को फिर ताजा खबर आ गई। एक ही दिन में तीन हमले। तीन टैक्सी ड्राईवर निशाने पर थे। चौथा पिज्जा डिलिवरी करता था। अपन खुद ही हमलों की छानबीन कर लें। पिछले एक साल में जितने हमले हुए। सभी छोटे-मोटे करिंदों पर थे। या फिर उन भारतीय छात्रों पर। जो पढ़ाई के साथ काम भी करते थे। किसी रेस्टोरेंट, होटल, पेट्रोलपंप या डिपार्टमेंटल स्टोर पर। अपन ने पहली नजर में रंगभेदी हमले माने। गोरों को गेहुंआ रंग पसंद नहीं आता। शायद ‘बिग ब्रदर’ में शिल्पा शेट्टी से हुआ दुर्व्यवहार का असर होगा। सो अपन उसी लाईन पर सोचते रहे। सोचो, जेड गुड्डी हमलावर क्यों थी। शिल्पा को सबसे ज्यादा परेशान तो उसी ने किया। तो अपन सहज ही नतीजे पर पहुंचेंगे। जेड गुड्डी को शिल्पा से खतरा था। खतरा था- ‘वह गेहूंआ रंग की भारतीय ‘बिग ब्रदर’ का ताज ले जाएगी।’ गुड्डी का डर सही ही तो था। अब वही डर आस्ट्रेलियाई युवकों में। डर है- ज्यादा बुध्दि वाले भारतीय सारी नौकरियां खा जाएंगे। डर गलत भी नहीं। अपन भारतीयों से सिर्फ आस्ट्रेलिया नहीं डर रहा। अमेरिका को भी डर सता रहा भारतीय बुध्दि का। गुरुवार को ही अमेरिकी राष्ट्रपति बाराक ओबामा ने कहा- ‘भारत, जर्मनी और चीन आगे निकल जाएंगे।’ अमेरिका में मंदी की मार पड़ी। तो सबसे पहले भारतीयों की नौकरियां गई। दुनिया के बाकी देशों से भी भारतीय ही ज्यादा तादाद में लौटे। पर बात आस्ट्रेलिया की। जिस लंदन की धरती पर शिल्पा शेट्टी को रंगभेद झेलना पड़ा। गुड़िया सी खिलखिलाती शिल्पा को गुड्डी के तानों ने रुलाया। उसी लंदन की धरती पर रंगभेद की नई बहस हुई। बहस हुई- अपने विदेश मंत्री एसएम कृष्णा की आस्ट्रेलियाई विदेशमंत्री स्टीफन स्मिथ से। बुधवार को एक घंटा तर्क-वितर्क हुए। कुतर्क भी हुए होंगे। इसी महीने के शुरू में हत्या हुई थी नितिन गर्ग की। उससे चार दिन पहले रणजोध सिंह की लाश मिली थी। बुधवार को ही रणजोध की हत्या में नवविवाहित जोड़ा गिरफ्तार हुआ। अभी यह खबर नहीं आई। जोड़ा बेरोजगार था। या नौकरीशुदा। बेरोजगार निकला। तो रंगभेद नहीं, यह रोजगार के मौकों की लड़ाई। कुछ साल पहले चीनी बन रहे थे निशाना। अब भारतीय। पर अपन बात कर रहे थे कृष्णा-स्मिथ गुफ्तगू की। तो स्मिथ रंगभेद का मामला मानने को तैयार नहीं। नितिन गर्ग की हत्या के बाद आस्ट्रेलियाई उपप्रधानमंत्री ने कहा था- ‘दुनिया के हर बड़े शहर में होती हैं हत्याएं। क्या मुंबई, लंदन, वाशिंगटन, पेरिस में नहीं होती। मेलबर्न भी इसी तरह महानगर।’ अपना भड़कना स्वाभाविक ही था। सो आस्ट्रेलिया ने सफाई दी। इसके बाद तो तीन बार लिखित सफाई दे चुका। ताजा सफाई विक्टोरिया पुलिस ने भेजी। कहा- ‘ज्यादातर हमलावर किशोर उम्र के।’ रिपोर्ट में कहा है- ‘सालभर में 18 मामले आए। दो तो ट्रेन हादसे। तीन मामलों का सुराग नहीं मिला। बाकी के 13 मामलों में 33 पकड़े गए। पकड़े गए आधे किशोर उम्र के।’ अब आप इसी से अंदाजा लगा लें। आपको भी रंगभेद से ज्यादा रोजगार की लड़ाई नहीं दिखती। पर बात कृष्णा-स्मिथ गुफ्तगू की। तो स्मिथ ने बताया- ‘आस्ट्रेलिया भी फिक्रमंद। मेरी रहनुमाई में हाई-लेवल वर्किंग ग्रूप बन चुका। जो इस मुद्दे की निगरानी करेगा।’ पर स्मिथ अड़े रहे उसी बात पर- ‘सामान्य अपराध।’ कृष्णा ने कहा- ‘भारत-आस्ट्रेलिया रिश्तों में खटास न आए। यह जिम्मेदारी अब आस्ट्रेलिया की।’ अपन इस भाषा को नरम तो नहीं कह सकते। पर स्मिथ के अपन को मिले भरोसे की खबर छप रही थी। तभी गुरुवार तड़के चार और भारतीयों पर हमले की खबर आ गई। कृष्णा लंदन में फिर स्मिथ से मिले। दिल्ली में प्रणीत कौर। अपनी विदेश राज्यमंत्री। प्रणीत कौर ने तेवर तीखे किए। शब्द नहीं थे, पर लब्बोलुबाब था- ‘कंगारूओं की करतूतों से भर रहा है सब्र का प्याला।’ उनने कहा- ‘भारत उन्हें सामान्य आपराधिक घटनाएं मानने को तैयार नहीं। आस्ट्रेलिया अपनी जिम्मेदारी को समझे।’ अपनी सरकार इसे रंगभेद मान रही। पर अपन जरा रोजगार के मौकों की नजर से भी देख लें।

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