कांग्रेस पर हावी होने लगे यूपीए सरकार के मंत्री

यों तो पहले कांग्रेस की सरकारें रही हों। या बीजेपी की। पार्टियों का वजूद खत्म सा हो जाता रहा। इंदिरा-राजीव-नरसिंह राव पीएम थे। तो कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष भी थे। सो कांग्रेस चौबीस अकबर रोड से नहीं। पीएम के घर से ही चलती थी। सरकार वाजपेयी की बनी। तो वाजपेयी बीजेपी के अध्यक्ष नहीं थे। न लालकृष्ण आडवाणी। पर पार्टी के अध्यक्ष इन दोनों के आगे बौने ही थे। सो सत्ता के समय कांग्रेस-बीजेपी को पीएम ही चलाते रहे। पर अब जब मनमोहन सिंह कांग्रेस के अध्यक्ष नहीं। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी का रुतबा मनमोहन सिंह से ज्यादा। तो कायदे से दबदबा कांग्रेस पार्टी का होना चाहिए। पर हाल ही की घटनाएं इसे साबित नहीं करती। यूपीए सरकार के मंत्री। कांग्रेसी हों या गैर कांग्रेसी। कांग्रेस को हर बात पर ठेंगा दिखाने लगे। सबसे पहले अपन शशि थरूर का उदाहरण लें। थरूर ने जब हवाई जहाज की इकोनामी क्लास को कैटल क्लास कहा। तो हमला पीएम या प्रणव दा पर नहीं था। जिनने मंत्रियों को इकोनामी क्लास में सफर का हुक्म दिया था। हमला सीधा सोनिया गांधी पर था। जिनने खुद स्पेशल प्लेन छोड़ इकोनामी क्लास में सफर किया था। यह अलग बात। जो सोनिया के बगल में कोई नहीं बैठा। आगे की दो लाइनों में दस सीटें खाली छोड़ी थी। पीछे की दो लाइनों की दस सीटें भी। कुल मिलाकर बिजनेस क्लास से दस गुना खर्चा बैठा था। पर बात शशि थरूर की। जिनने इकोनामी क्लास को कैटल क्लास कहकर खिल्ली उड़ाई। तो कांग्रेस के प्रवक्ता आग बबूला हो गए थे। खबरें छपी थी- थरूर की छुट्टी होगी। पर थरूर का कुछ नहीं बिगड़ा। उनने अलबत्ता कांग्रेसी नेताओं में 'सेंस आफ ह्यूमर' की कमी बताया। थरूर के साथ और भी किस्से हुए। पर बात शरद पवार की। शरद पवार पर महंगाई का ठीकरा फोड़ने की कोशिश हुई। तो उनने पलटवार किया। अब भले कांग्रेस कहे- 'पवार पर हमला नहीं किया।' भले शरद पवार भी कहें- 'मैंने मनमोहन सिंह पर पलटवार नहीं किया।' पर इस युध्द विराम के पीछे की कहानी सबको मालूम। जनार्दन द्विवेदी, मोहन प्रकाश, अभिषेक मनु सिंघवी, शकील अहमद सबने इशारों में पवार को जिम्मेदार ठहराया। पर जब पवार ने पलटवार शुरू किया। तो कांग्रेसी नेताओं की घिग्गी बंध गई। चुप्पी साध गए सारे। अब ताजा घटना संतसिंह चटवाल को पद्मश्री पुरस्कार की। चटवाल को पद्मश्री बिल क्लिंटन ने दिलाया। हिलेरी क्लिंटन ने दिलाया। या बराक ओबामा ने। अपन इस विवाद में नहीं पड़ते। पर चटवाल का नाम सुनते ही विवाद खड़ा हुआ। ऐलान नहीं हुआ था। पर विवाद के बाद भी ऐलान रुका नहीं। कोई छोटी-मोटी सिफारिश होती। तो ऐलान रुक जाता। पर ऐलान के बाद विवाद को हवा दी खुद कांग्रेस ने। जब चटवाल के सीबीआई केसों का सवाल उठा। तो कांग्रेस प्रवक्ता शकील अहमद ने कहा- 'आम तौर पर यह सम्मान उन लोगों को मिलना चाहिए। जो सम्मान के हकदार हों। उन लोगों को नहीं, जो दागी हों। जहां तक चटवाल का सवाल। तो इस पर जवाब सरकार दे।' यह कहकर कांग्रेस ने सरकार को कटघरे में खड़ा किया। सरकार में सबसे पहले कटघरे में खड़े हुए होम मिनिस्टर। होम मिनिस्ट्री ही करती है पद्म सम्मानों की सिफारिश। कटघरे में खड़े हुए। तो चिदंबरम भी पलटकर बोले। चटवाल के पक्ष में होम मिनिस्ट्री ने कांग्रेस का मुंह बंद किया। होम मिनिस्ट्री के बयान का लब्बोलुबाब- 'चटवाल कोई छोटा-मोटा आदमी नहीं।' अनाड़ी कांग्रेसियों को चिदंबरम ने याद दिलाया- '2005 का राजीव गांधी अवार्ड चटवाल को ही मिला था। पंजाब सरकार भी आर्डर ऑफ खालसा सम्मान दे चुकी।' चटवाल की तारीफ में होम मिनिस्ट्री ने कहा- 'भारत-अमेरिका रिश्तों में अहम किरदार। वह विलियम क्लिंटन फाउंडेशन का ट्रस्टी। वह अमेरिकन इंडिया फाउंडेशन का भी ट्रस्टी। उसने सुनामी और एड्स पीड़ितों को मदद पहुंचाई। अमेरिका में एनआरआई समुदाय में सक्रिय। एटमी करार में अहम भूमिका निभाई थी चटवाल ने।' जहां तक बात सीबीआई की। तो होम मिनिस्ट्री ने उस पर भी सफाई दी। कहा- 'बैंक ऑफ बड़ोदा और बैंक ऑफ इंडिया के साथ फ्राड के केस थे। सीबीआई ने चार्जशीट दाखिल तक नहीं की। सीबीआई ने तीन केस दाखिल खारिज कर दिए। दो केसों में अदालत ने बरी कर दिया।' सो सरकार ने कोई गलती नहीं की। होम मिनिस्ट्री का बयान आने पर अपन ने कांग्रेसी प्रवक्ता ढूंढे। पर बोलने को कोई राजी न हुआ।