सोनिया के गलत कदम से ब्रांड हैदराबाद का कचरा

अपन आंध्र की बिगड़ी हालत का खुलासा करें। उससे पहले चर्चा कुछ राजनीतिक बयानों की। मंगलवार को राजनीतिक गलियारों में इन बयानों पर खूब चटकारे सुने। पहला मामला शशि थरूर के टि्वटर का। उनने वीजा नियमों को सख्त करने की खिल्ली उड़ाई थी। जिस पर विदेशमंत्री एसएम कृष्णा ने फटकारने वाला बयान दिया। मंगलवार को उनने फिर टि्वटर पर लिखा- 'मैं दिल्ली में नहीं था। सो बड़े हंगामे से बच गया। कृष्णा का बयान आ गया। अब मुझे कुछ नहीं कहना।' सत्यव्रत चतुर्वेदी ने थरूर को उसी भाषा में धमकाया। जिस भाषा में अमर सिंह को धमकाया करते थे। बोले- 'पुरानी आदतें हैं, जल्दी से नहीं जाती। अपनी हद में रहना सीखें।' दूसरा मामला सोनिया-मनमोहन के बयानों का। मनमोहन के बयान का जिक्र अपन ने कल किया ही था। उनने नेहरू परिवार के बच्चे-बच्चे की तारीफ में पुल बांधे। पर अपने राजनीतिक गुरु नरसिंह राव का नाम भी नहीं लिया। सोनिया के भाषण का अपन जिक्र करना भूल गए। सोनिया ने तो कमाल कर दिया। नरसिंह राव की तारीफ नहीं करनी हो, तो न करे। पर आर्थिक सुधारों और उदारीकरण का श्रेय तो नहीं छीन सकते। पर सोनिया ने छीन लिया। मनमोहन की मौजूदगी में कहा- 'राजीव गांधी ने आर्थिक सुधार शुरू किए।' आर्थिक सुधारों के लिए मनमोहन को वित्त मंत्री बनाकर लाए थे राव। सत्ता पाने के लिए जब 2003 में शिमला में मंथन हुआ। तब एक मुद्दा यह भी था- 'मनमोहन के आर्थिक कार्यक्रमों को जारी रखा जाए, या नहीं।' तीसरा बयान नितिन गड़करी का। जो ताजा नहीं। अलबत्ता पिछले शनिवार का। उनने कहा था- 'एक गलती माफ। दूसरी नहीं।' तो चटकारे लेने वाली टिप्पणीं यह रही- 'झारखंड में शिबू को समर्थन गड़करी की पहली गलती।' अपन ने कल सुख रामो- शिबू सोरेनों की पार्टी विद डिफरेंस बताया। तो बीजेपी के बहुतेरे नेताओं ने अपन को फोन किया। सभी का कहना था- 'अच्छा किया।' तो अपन बता दें- दिल्ली के ग्यारह नेताओं को छोड़ दें। झारखंड के बीस नेताओं को छोड़ दें। तो देशभर के लाखों बीजेपी वर्कर झारखंड में सरकार से शर्मसार। झारखंड की बात चली। तो बताते जाएं- लालू यादव का बयान। उनने कहा- 'कांग्रेस के घमंड के कारण सेक्युलर सरकार नहीं बनी।' बता दें- कांग्रेस चाहती, तो बिना शिबू के सरकार बनाना भी मुश्किल न होता। पर लालू को साथ लेना पड़ता। कांग्रेस अब शिबू तो क्या। लालू को भी साथ लेने को तैयार नहीं। पर बीजेपी आज शिबू का शपथ ग्रहण करा देगी। मंगलवार को केबिनेट ने राष्ट्रपति राज हटाने को मंजूरी दे दी। अब सरकार बनने का रास्ता साफ। कितने दिन चलेगी? अपन कह नहीं सकते। दु:खी बीजेपी वर्करों की मानें। तो मायावती ही साबित होंगे शिबू सोरेन। अब बात आंध्र प्रदेश की। चर्चा थी- केबिनेट में तेलंगाना पर कोई फैसला होगा। केबिनेट में चर्चा भी हुई। पर आधे घंटे इंतजार के बाद ब्रीफिंग टालने का ऐलान कर दिया। पर आंध्र में हालत और बिगड़ने लगे। विरोध प्रदर्शन, सड़क रोको, रैलियां, जलसे, जुलूस, मीटिंगें। जहां देखो, वहीं पर यह हाल। करीब ढाई सौ करोड़ रुपए की जायदाद हिंसा की भेंट चढ़ चुकी। ब्रांड हैदराबाद का तो कचरा हो गया। यह है सोनिया के जन्मदिन पर तोहफे का नतीजा। मंगलवार को प्रेस कांफ्रेंस में रोसैया ने कहा- 'व्यापारी आंध्र प्रदेश से भाग रहे हैं। सेमीनार रद्द होकर चेन्नई जा रहे हैं।' तेलंगाना समर्थकों ने बुध और गुरुवार को बंद का ऐलान कर रखा है। तो वाइंट एक्शन कमेटी ने तीन जनवरी को हैदराबाद कूच का बिगुल बजा दिया। रोसैया को उस समय करारा झटका लगा। जब हाईकोर्ट ने यूनिवर्सिटी पर ताला लगाने के आदेश को रद्द कर दिया। हालत यह बन चुकी- रोसैया को केबिनेट मीटिंग रद्द करनी पड़ी। बुधवार को बुलाई थी केबिनेट मीटिंग। तेलंगाना के तेरह मंत्री इस्तीफा देकर कह चुके- 'अब केबिनेट मीटिंग में नहीं आएंगे।' रोसैया के भविष्य पर खतरा मंडराने लगा। अभी तो  सीएम आवास में उनका गृह प्रवेश ही नहीं हुआ। जगनमोहन रेड्डी ने अब तक घर खाली ही नहीं किया था। मंगलवार को घर खाली हुआ। तो अब जाएं, न जाएं। इसी उधेड़बुन में रहेंगे।

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