मोदी के साथ तारीफ जरा हाईकोर्ट की भी हो जाए

बिग बी ने नरेंद्र मोदी की तारीफ के पुल बांधे। तो कांग्रेस खफा हुई। कांग्रेस तो यों भी बिग बी से खफा। वजह अपन नहीं जानते। कोई राज की बात है गहरी। वरना इटली से आई सोनिया का पहला घर गुलमोहर पार्क ही था। गुलमोहर पार्क में अमिताभ बच्चन के घर ठहरी थी सोनिया। यों घर तो हरिवंशराय बच्चन का था। पर राजीव की दोस्ती अमिताभ से थी। इंदिरा गांधी ने गुलमोहर पार्क पत्रकारों के लिए बसाया था। पर पत्रकारों की उन दिनों तनख्वाहें भी क्या थी। सो कई तो प्लाट की पहली किस्त जमा नहीं करा पाए। खाली प्लाट इंदिरा ने चहेते साहित्यकारों-कलाकारों को बांट दिए। खैर अमिताभ का राजीव के जमाने सांसद बनना। बोफोर्स घोटाले में जोड़ा जाना। संसद से इस्तीफा। फिर सोनिया परिवार से खटास। इनकम टैक्स के छापे। यह सब लंबी कहानी। अब जया बच्चन सपा की सांसद ठहरी। वैसे एक बार तो बर्खास्त ही करा दिया था कांग्रेस ने। एक तरफ अमर सिंह के जरिए मुलायम से दोस्ती। तो दूसरी तरफ नरेंद्र मोदी की तारीफ के पुल। कांग्रेस का लाल-पीला होना तो अपनी जगह। जया बच्चन सपा में क्या सफाई देंगी। अमिताभ ने तारीफ क्या की। जरा वह बता दें- वह मोदी को 'पा' फिल्म दिखाने खुद गांधीनगर गए। मोदी के साथ चार घंटे बिताए। तो लौटकर अपने ब्लाग पर लिखा- 'मोदी बाकी मुख्यमंत्रियों जैसे नहीं। वह जिंदगी जरूरीआत की चीजों पर ही निर्भर। सादगी से रहते हैं मोदी। असल में आम आदमी हैं मोदी।' अमिताभ ने जब आम आदमी लफ्ज का इस्तेमाल किया होगा। तो जरूर खटका होगा। खटका होगा- कहीं सोनिया बुरा न मान जाएं। सो उनने फौरन लिखा- 'इस बात को अन्यथा नहीं लिया जाना चाहिए।' अमिताभ को मोदी के लिए आम आदमी का लफ्ज खटका जरूर। पर उनने हटाया जानबूझकर नहीं। चाहते तो हटा सकते थे। मोदी की तारीफ की बात चल पड़ी। तो बता दें- गुरुवार को शुरू हुए प्रवासी सम्मेलन में भी मोदी छाए रहे। वह दिल्ली नहीं आए। नौ जनवरी को आएंगे। पर प्रवासी गुजरातियों को पतंगबाजी समारोह में दिलचस्पी दिखी। जो गुजरात में दस से चौदह तक चलेगा। बात प्रवासी भारतीयों के सम्मेलन में विकास की चली। तो वहां भी सारी तारीफ मोदी ले उड़े। बात प्रवासी भारतीय सम्मेलन की हो रही। सो बता दें- आस्ट्रेलिया की नस्लभेदी हत्याओं की छाया सम्मेलन पर दिखी। प्रवासियों का एक डेलीगेशन आस्ट्रेलियाई हाईकमिशनर पीटर से मिला। फिर सम्मेलन में सलमान खुर्शीद पर सवालों की बौछार हुई। तो बोले- 'हम जिम्मेदारी से भागते नहीं। पर कदम सोच समझकर उठाना पड़ेगा। जल्दबाजी में कोई बयान देकर समस्या को बुलावा देना ठीक नहीं।' बात बयान की चली। तो अब तक ढीले-ढाले समझे जाने वाले कृष्णा ने सख्त बयान दिया था। जिस पर आस्ट्रेलिया के विदेशमंत्री साईमन क्रियान ने कहा- 'भारत भड़काने वाले बयान न दे।' इस लफ्ज ने तो बवाल खड़ा कर दिया। जैसे कूटनीतिक टकराव शुरू हो गया हो। आस्ट्रेलिया के पीटर वर्गिस को सफाई देनी पड़ी। बोले- 'ऐसा लफ्ज इस्तेमाल नहीं किया।' एसएम कृष्णा ने भी सफाई दी। बोले- 'हम उन्मादी नहीं। पर हमारा हर छात्र वहां सुरक्षित रहे।' एक बात उनने अपन सबसे भी कही। जो बिना देखे-भाले अपने बच्चें को आस्ट्रेलिया भेजने को आमादा। उन कोर्सों के लिए भी। जिनकी पढ़ाई भारत में आस्ट्रेलिया से बेहतर। कृष्णा की यह बात गौर करने लायक। पर अपन बात कर रहे थे नरेंद्र मोदी की। अपन ने अमिताभ बच्चन के ब्लाग पर मोदी की तारीफ का जिक्र किया। पर आज तारीफ की सबसे ज्यादा हकदार मद्रास हाईकोर्ट। अलबत्ता मद्रास हाईकोर्ट की मदुरई बैंच। जिसने दो पुलिसियों को एक लाख का जुर्माना किया। कसूर था- 'बलात्कार की एफआईआर दर्ज करने में देरी।' बलात्कार का मुकदमा तो अपनी जगह। वह तो निचली अदालत में चलेगा। पर एफआईआर के मामले में नजीर बन गई। हाईकोर्ट ने यह भी साफ किया- 'एफआईआर के लिए भुगतभोगी का खुद थाने आना भी जरूरी नहीं।' अब देशभर के पुलिसिए सावधान हो जाएं। ऊपर के इशारे नहीं चलेंगे।

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