जवाब नहीं बना तो स्पिन डाक्टरी पर उतरे जयराम

अपन ने कल लिखा था- कटघरे में होंगे जयराम। सो जेटली और येचुरी ने कटघरे में खड़ा किया। दोनों पूरी तैयारी करके आए थे। येचुरी तो खुद कोपेनहेगन में थे। सो पूरे मसाले के साथ तैयार थे। मूल रूप से वकील जेटली की तैयारी का तो कहना ही क्या। अपन को पता था येचुरी पूरे जोर-शोर से नहीं घेरेंगे। आखिर जयराम रमेश का स्टैंड वही था। जो चीन का था। चीन वामपंथियों की सबसे बड़ी कमजोरी। पर येचुरी ने फिर भी उतना कम नहीं घेरा। जितना कोई वामपंथी विरोधी सोचता हो। पहले बात येचुरी की ही। पता है ना- येचुरी की सीपीएम पार्टी डी राजा की सीपीआई से बड़ी। सो अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठे कुरियन ने जेटली के बाद राजा को बुलाया। तो येचुरी बिदक गए। पूछा- 'बुलाने का पैमाना क्या है?' कुरियन वामपंथियों में ऐसी जलन देख दंग रह गए। उनने कहा- 'जिसने पहले अपना नाम दिया।' बात खत्म हो गई। पर तभी कागज उलट-पलट कर देखे। तो येचुरी का लिस्ट में नाम ही नहीं मिला। उनने टोकते हुए कहा- 'पर आपका नाम ही नहीं है बोलने वालों में।' येचुरी हैरान। उनने कहा- 'मैंने नाम भेजा था।' तो कुरियन ने कह दिया- आपको मौका दूंगा। यह भी अजब रहा। येचुरी के साथ मुरली मनोहर जोशी भी गए थे कोपेनहेगन। उनके पीछे से विपक्ष के नेता की कुर्सी सुषमा ले उड़ी। सो जलवायु परिवर्तन पर जयराम रमेश का बयान हुआ। तो जोशी नदारद थे। जोशी की परेशानी समझना मुश्किल नहीं। पिछली बार राज्यसभा में विपक्ष के नेता नहीं बन पाए। इस बार लोकसभा में। पार्टी अध्यक्ष बनने की फिराक में थे। तो मोहन भागवत ने उम्र की सीमा लगा दी। अब तीन-तीन ब्राह्मण लीडर हो गए। तो पीएसी चेयरमैन का चांस भी खत्म। लोकसभा में उपनेता गोपीनाथ मुंडे हो गए। यह अपन ने शनिवार को ही लिख दिया था। तो अब यशवंत सिंहा पीएसी चेयरमैन होंगे। पर बात हो रही थी राज्यसभा की। जयराम रमेश ने सात पेज की सफाई दी। पर जेटली और येचुरी ने सफाई पर गौर नहीं किया। कोपेनहेगन के दस्तावेज से पढ़कर सुनाया- कहां-कहां घुटने टेके भारत ने। कहां-कहां साथ छोड़ा जी-77 का। येचुरी-जेटली क्या कम थे। पीएम की मौजूदगी में मोटे-मोटे सवाल कांग्रेसियों ने भी दागे। सबसे ज्यादा हमलावर थे जनार्दन द्विवेदी। उनने पीएम की तारीफ में तो पुल बांधे। पर जयराम से पूछा- 'बेसिक ग्रुप की मीटिंग में बिन बुलाए आए थे बाराक ओबामा। उस मीटिंग में क्या हुआ। हमें तो उसका खुलासा करिए।' इशारा साफ था- बाराक ओबामा के दबाव में झुकी सरकार। जनार्दन द्विवेदी का हमला सीधा था। तो संतोष बागडोरिया ने भी आठ टेढ़े सवाल दागे। एक-एक सवाल सुई की तरह चुभने वाला। पर जयराम ने अपने कांग्रेसी मित्रों को कोई जवाब नहीं दिया। उन्हें संभालना मनमोहन-सोनिया का काम। वह तो जेटली-येचुरी को ही जवाब देते रहे। जेटली ने अपने सवालों में कहा था- 'स्पिन डाक्टरी से काम नहीं चलेगा। आप कोपेनहेगन में क्वेटो संधि को दफन कर आए हो।' तो कटघरे में खड़े जयराम ने माना- हां, स्टैंड में थोड़ा फेरबदल हुआ है। पर देश के सम्मान से कोई समझौता नहीं किया। जहां तक बात स्पिन डाक्टरी की। तो जयराम ने अरुण का जुमला उन्हीं को सौंप दिया। बोले- 'जिस व्हाइट हाऊस प्रववक्ता डेविड एक्सलराड के बयान पर बवाल है। वह जेटली की तरह शब्दों का स्पिन डाक्टर है। हम उसके बयान नहीं। ओबामा के बयान पर भरोसा करेंगे।' पर बात स्पिन डाक्टरी की। तो जेटली से जब अपन ने कहा- 'येचुरी आपको बीजेपी का स्पिन डाक्टर कह गए।' तो उनने कहा- मेरा जुमला मुझ पर लागू करने की कोशिश की। यह तो वही बात हुई- तेली ने जाट से कहा- जाट रे जाट तेरे सिर पर खाट। तो जाट ने तेली से कहा- तेली रे तेली, तेरे सिर पर कोलहू। इस पर तेली ने कहा- बात कुछ जमी नहीं। जाट ने कहा- बात जमे न जमे, कोलहू के बोझ से तो मरेगा।

India Gate se Sanjay Uvach

Wed, 14 Dec 2011

जनसत्ता 14 दिसंबर, 2011:  पिछले दिनों दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में एक अत्यंत गंभीर विषय पर चर्चा हुई। विषय था, देश में बच्चों के अपहरण की बढ़ रही घटनाएं। विषय की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि बच्चों के अपहरण पर शोध आधारित पुस्तक का विमोचन करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश अल्तमस कबीर खुद मौजूद थे। इस गंभीर समस्या का सनसनीखेज खुलासा 1996 में हुआ था, जब यूनिसेफ ने भारत में बच्चों के देह-शोषण पर एक रिपोर्ट जारी की थी। बी भामती की इस रिपोर्ट