भाजपा का तो कंगाली में आटा ही गीला

अपन ने कल लिखा ही था- 'आडवाणी होम मिनिस्टर रहते वीएचपी की मीटिंग में जाते। तो जमकर बवाल होता। पर चिदंबरम जमात-उलेमा-ए-हिंद की मीटिंग में गए। तो पत्ता भी नहीं हिला।' देवबंद की उसी कांफ्रेंस में वंदेमातरम् के खिलाफ फतवा हो गया। पी चिदंबरम ने दिल्ली आकर सफाई दी- 'मेरे सामने कोई फतवा नहीं हुआ। मुझे तो पता भी नहीं।' चिदंबरम् ठहरे चतुर सुजान। जमात-उलेमा-ए-हिंद का प्रस्ताव ही फतवे का आगाज था। यह प्रस्ताव पास हुआ था सोमवार को। चिदंबरम पहुंचे मंगल को। कहते हैं- 'मुझे तो पता भी नहीं।' चतुर सुजान चिदंबरम का किस्सा तो अरुण जेटली ने सुनाया। मौका था- 'डायरेक्ट टैक्स पर सेमीनार का।' सेमीनार किया था- 'कनफैडरेशन आफ आल इंडिया ट्रेडर्स ने।' जेटली बोले- 'उदारीकरण शुरू हुआ। तो टैक्स घटने शुरू हुए। लक्ष्य था- लगातार टैक्स घटाते जाना। ताकि भारतीय उद्योग धंधे अंतरराष्ट्रीय बाजार के मुकाबले खड़े हों। पर चिदंबरम जब-जब वित्त मंत्री बने। उनने टैक्सों का बोझ लादा। चिदंबरम बजट की पैकेजिंग के माहिर। ऊपर से लगेगा- बेहतरीन बजट। पर जैसे-जैसे पढ़ेंगे। पसीने निकलेंगे।' तो बात नए डायरेक्ट टैक्स कोड की। जो ऊपर से दिखने में लुभावना। पर अंदर से कर्मचारी तबके को निचोड़कर रख देगा। यह अपनी नहीं। टैक्स गुरु सुभाष लखोटिया की राय। जो सेमीनार में बोले। सो लखोटिया से सहमत जेटली बोले- 'अब वित्तमंत्री बदल गया है। शायद अड़ियल रवैया न अपनाए।' जेटली को उम्मीद है कांग्रेसी सांसद भी विरोध करेंगे। उनने तो कई खामियां गिना सुधार की मांग रख दी। उन खामियों का जिक्र अपन बाद में कभी करेंगे। पर जेटली डायरेक्ट कोड पर बोलकर निकले। तो खबर आ गई थी- 'झारखंड में जेडीयू से बात टूट गई।' शरद यादव ने ड्राइंग रूम में चौकड़ी जमा ली थी। यादव की ड्राइंग रूम चौकड़ी तब भी लगती थी। जब वह एनडीए सरकार में मंत्री थे। तो शरद यादव बोले- 'बातचीत टूट गई है। अब मैदान खुला है।' कहते हैं ना कंगाली में आटा गीला। जैसा बंटाधार विजय गोयल ने हरियाणा में किया। वैसा झारखंड में करुणा शुक्ला करेंगी। वह हैं झारखंड की प्रभारी। जैसे प्रभारी होंगे, वैसी ही तो बातचीत होगी। पर बेचारे अरुण जेटली क्या बोलते। पूछा, तो जवाब देना ही पड़ा। सो बोले- 'जेडीयू से गठबंधन हो, तो अच्छा हो। पर ग्राउंड रियलिटी के आधार पर ही होगा सीटों का बंटवारा। लोकसभा के नतीजे सामने।' पर गठबंधन हो, न हो। अपन को क्या। गठबंधन कांग्रेस का बाबूलाल मरांडी से कहां हो रहा। सुना नहीं आपने मंगलवार को केशव देव के कपड़े नोच डाले। गठबंधन विरोधियों ने 24 अकबर रोड पर धावा बोल दिया। बात झारखंड की चल ही रही। तो मधु कोड़ा का किस्सा भी छेड़ते जाएं। कांग्रेस के बूते सीएम बने थे कोड़ा। कांग्रेस ने ही बनाए रखा दो साल सीएम। कोड़ा की चार हजार करोड़ की लूट में कांग्रेसियों के भी नाम। सुना आपने या नहीं। महाराष्ट्र के जिस कांग्रेसी दिग्गज का नाम आया। वह बुधवार को सफाई देने दस जनपथ पहुंचा। जी हां, अपन बात कर रहे कृपाशंकर सिंह की। उनने सोनिया को सफाई दी- 'कोड़ा सरकार का मंत्री कमलेश सिंह मेरा रिश्तेदार जरूर। पर हवाला कारोबार में मेरा कोई हाथ नहीं।' शकील अहमद भी कृपाशंकर पर सफाई देते दिखे। पर देखते हैं सोनिया महाराष्ट्र में मंत्री बनाने से रोकेंगी या नहीं। बात महाराष्ट्र की चली। तो बताते जाएं- तेरहवां दिन भी बीत गया। मलाईदार महकमों पर जूतम-पैजार जारी। कहने को शकील अहमद बोले- 'कांग्रेस की पॉलिसी भ्रष्टाचार पर जीरो टोलरेंस की।' ए राजा के बारे में पूछा। तो लगे बगलें झांकने। पर अपन बात कर रहे थे कंगाली में बीजेपी का आटा गीला होने की। तो कर्नाटक अभी सुलझा नहीं। बिहार में सुशील मोदी के खिलाफ फिर से बगावत। बात कर्नाटक की। यों तो येदुरप्पा की पीएम से मुलाकात तय थी। पर अब खबर पीएम से मुलाकात की नहीं। खबर सुषमा के बीच बचाव से रेड्डी ब्रदर्स से समझौता वार्ता की। कर्नाटक निपट भी गया। तो बिहार के बगावती दिल्ली आ धमकेंगे। हुआ ना कंगाली में आटा गीला।

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