ममता समर्थकों का ट्रेन पर कब्जा, बुध्ददेव छुड़ाने गए

ममता की ट्रेन बंधक बनकर छूट गई। ममता को चिदंबरम की मदद मांगनी पड़ी। 'रेल रोको' आंदोलन भी ममता समर्थकों का था। सो ट्रेन अपहरण की जिम्मेदार भी ममता ही हुई। ममता मंत्री न होती। तो खुद भी पटरी पर बैठी होती। वक्त का फेर देखिए। बुध्ददेव की पुलिस ममता की ट्रेन को छुड़ाने गई। पर पुलिस अत्याचारों के खिलाफ बनी ममता समर्थक जनकमेटी भी मुस्तैद थी। बांसतला से चार किलोमीटर ही पहुंची थी पुलिस। कमेटी के लठैतों ने पुलिस पार्टी पर हमला बोल दिया। बुध्ददेव की पुलिस जन कमेटी के सामने धूल चाटने को मजबूर हुई। ट्रेन को बंधक बनाने वाले कोई दो-चार नहीं। अलबत्ता एक हजार से ज्यादा थे। यों भले ही अपन उसे हमलावार कहें। या नक्सली कहें। पर लालगढ़ के हमलावरों के साथ लोकल समर्थन न हो। तो नक्सली इस तरह से तो नहीं कर सकते। ट्रेन को घेरने वालों में औरतें और बच्चे भी थे। लालगढ़ की नेता बनी थी ममता। सो अब ममता की ट्रेन ही रुकी। तो ममता की सीटीपीटी गुल हुई। वह बोली- 'पहले ट्रेन छोड़ो। फिर बात करेंगे।' पर ट्रेनें तो रोकी ही गई थी ममता से बात करने के लिए। पीसीपीए की मांग थी- 'ममता आकर जनता की शिकायतें सुनें।' ममता ने मंत्री बनने के बाद तेवर ढीले कर दिए। तो जिन कंधों पर सवार होकर सत्ता तक पहुंची। उन कंधों ने भी मंगलवार को अपनी ताकत दिखा दी। ऐसे रास्ते खुद अपना रहीं थी ममता। नेता जो रास्ता दिखाएगा। जनता उसी पर तो चलेगी। सो ट्रेन के बंधक बनने पर बुध्ददेव खुश हुए। बता दें किस्सा क्या था। पुलिस अत्याचारों के खिलाफ बनी कमेटी का नाम है- 'पीसीपीए।' बुध्ददेव की पुलिस ने पीसीपीए के अध्यक्ष को जेल में डाल रखा है। पीसीपीए के अध्यक्ष हैं छत्रधर महतो। जो बुध्ददेव की नजर में माओवादी। बुध्ददेव ने ऐलान किया- 'सरकार माओवादियों से कोई समझौता नहीं करेगी। छत्रधर महतो को किसी हालत में छोड़ा नहीं जाएगा। न लालगढ़ से सुरक्षाबल हटेंगे।' इन्हीं दो मांगों पर पीसीपीए का रेल रोको आंदोलन था। पर ट्रेन ड्राइवरों का काम ट्रेन चलाना। सो नई दिल्ली-भुवनेश्वर राजधानी जब बंगाल के मिदनापुर से गुजरी। तो बांसतला के करीब रोक ली गई। ड्राइवर के अनंत राव ने एक तरह से ट्रेन रोककर एक्सीडेंट टाला। रेल लाइन पर दरख्त काटकर डाला हुआ था। जैसे ही ट्रेन रुकी। पीसीपीए के लोगों ने अनंत राव को उतार लिया। साथ ही उसके सहायक ड्राइवर केजे राव को भी। जबसे छत्रधर महतो गिरफ्तार हुए। तब से संतोष पात्रा पीसीपीए के नए लीडर। देशभर में जब ड्राइवरों के अपहरण की खबर परोसी गई। तो संतोष पात्रा बोले- 'ड्राइवर का अपहरण नहीं किया। न ड्राइवर को कोई नुकसान पहुंचाया। न ऐसा इरादा। ड्राइवर ने रेल रोको में अड़चन डाली। सो उसे अपने कब्जे में लिया गया। छोड़ देंगे जल्द।' पर बात ट्रेन को छुड़ाने की। चार घंटे बाद ट्रेन छूट गई। बुध्ददेव की पुलिस नहीं छुड़ा पाई। केंद्र सरकार के अर्ध्दसैनिक बलों ने छुड़ाया। बुध्ददेव का जोर अब जनकमेटी को नक्सली साबित करने का। संतोष पात्रा बोले- 'हमारी 22 मांगें हैं। सरकार आकर हमसे बात करे। संयुक्त सुरक्षाबल हमें माओवादी बताकर अत्याचार कर रहे हैं। हमारे नेता छत्रधर महतो को झूठे मुकदमों में फंसाया जा रहा है।' सो मंगलवार को  बंद के दौरान जमकर हिंसा हुई। लोगों का निशाना सीपीएम के दफ्तर बने। सीपीएम के नेता भी। कहीं आग लगी, कहीं गोली भी चली। मौतें भी हुई गोली से। अब बात नक्सली नेता किशन जी की। उनने कहा- 'जब सरकार बंद के लोकतांत्रिक हक पर भी गोली चलाएगी। तो जवाबी कार्रवाई भी होगी ही।'

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