अरुणाचल का जनादेश लेकर जियाबाओ से भिड़ेंगे मनमोहन

आज होगी तीन राज्यों के वोटों की गिनती। उधर गिनती निपटेगी। इधर झारखंड के चुनाव का रास्ता खुलेगा। झारखंड का चुनाव तीन राज्यों के साथ न होना। सत्ता के दुरुपयोग का कांग्रेसी उदाहरण। सरकार न बननी थी, न बनानी थी। पर एसेंबली को जानबूझकर सस्पेंड किए रखा। कांग्रेस की मदद वाली मधु कोड़ा की सरकार सबसे भ्रष्ट साबित हुई। कोई पांच हजार करोड़ की जायदाद बनाई कोड़ा ने। अब सीबीआई जांच के घेरे में। शिबू सोरेन विरोध करते रहे। पर मधु कोड़ा सरकार चलाती रही कांग्रेस। पांच हजार करोड़ रुपए के भ्रष्टाचार का जिम्मेदार कौन। यह नतीजा आप खुद निकालिए। पर आज बात झारखंड की नहीं। बात तीन राज्यों के चुनाव नतीजों की। मनमोहन आज रात को थाईलैंड रवाना होंगे। तो अपने साथ अरुणाचल का जनादेश ले जाएंगे। चलते-चलते बताते जाएं- इस बार पीएम अलग उड़नखटोले पर सवार होंगे। टीम अलग उड़नखटोले पर। पर अपन बात कर रहे थे जनादेश की। आप पूछेंगे- अरुणाचल के जनादेश का थाईलैंड दौरे से क्या वास्ता। तो बता दें- शुक्रवार को मनमोहन की वेन जियाबाओ से मुलाकात होगी। दोनों प्रधानमंत्रियों की मुलाकात का मजमून मोटे तौर पर तय। चीन पिछले दो महीनों में बार्डर पर अपने तेवर दिखा चुका। अरुणाचल, उत्तराखंड, जम्मूकश्मीर। जम्मूकश्मीर को तो अलग देश भी बता चुका। अरुणाचल को अपना बताना कोई नई बात नहीं। चीन यह शुरू से कर रहा। भले ही अरुणाचल की जनता चीन के साथ नहीं। चीन के साथ होती। तो बासठ के जंग में तवांग जीतकर वापस न लौटता चीन। चीन के साथ होती। तो इन्हीं चुनावों में 72 फीसदी वोट न डालते अरुणाचली। दोरजीखांडू के दुबारा सीएम बनने पर अपन को कोई शक नहीं। दोरजीखांडू का ताल्लुक भी उसी तवांग से। जिस पर दावा ठोक रहा चीन। तवांग के बारे में बताते जाएं- नवंबर में वहीं जाने का इरादा है दलाईलामा का। तवांग से 14वें दलाईलामा का पुराना रिश्ता। चीन ने जब तिब्बत पर कब्जा किया। तो तवांग के रास्ते ही भारत में घुसे थे दलाईलामा। ल्हासा के बाद सबसे पुराना बौध्द मठ तवांग में ही। कोई चार सौ साल पुराना होगा। पर अपन बात कर रहे हैं तीनों राज्यों के चुनाव की। तीनों राज्यों में गिनती होगी आज। आयोग ने उम्मीदवारों की दीवाली का ख्याल रखा। चुनावों के फौरन बाद गिनती हो जाती। तो 4500 की दीवाली खराब होती। बता दें- तीन राज्यों की 435 सीटों पर हुए चुनाव। उम्मीदवार थे 4935, जीतेंगे सिर्फ 435 ही। अरुणाचल की तीन सीटें पहले ही निपट चुकी। बिना चुनाव जीतने वालों में सीएम दोरजीखांडू भी। दोरजीखांडू ही नहीं। अरुणाचल की बीजेपी भी दलाईलामा के दौरे की समर्थक। पर शुक्रवार को जब मनमोहन-जियाबाओ मिलेंगे। तो दलाईलामा के दौरे पर भी लटकी होगी तलवार। बुधवार को चीन का राजदूत जब दिल्ली में ठंडा पड़ता दिखा। तो अपने कान खड़े हुए। बैकडोर डिप्लोमेसी से तनाव खत्म करने की कवायद जारी। अपने कान तब भी खड़े हुए। जब प्रणव मुखर्जी ने कहा- 'सीमा विवाद हल करने में काफी प्रगति।' विदेश मंत्रालय में ईस्ट के सेक्रेट्री एन रवि ने खुलासा किया- 'दोनों पीएम मिलेंगे। तो भारत अपनी बात खुलकर कहेगा।' कश्मीर पर चीन के नए रुख की जमकर मुखालफत होगी। वैसे बता दें- चीन के प्रवक्ता जियांग यू ने बुधवार को कहा- 'हमने नहीं, इतिहास ने कश्मीर को विवादास्पद बनाया।' पर आज बात अरुणाचल-कश्मीर की ही नहीं। महाराष्ट्र और हरियाणा की भी। यों तो जयंती नटराजन का दावा तीनों राय जीतने का। पर मोहन प्रकाश बुधवार को उतने आश्वस्त नहीं दिखे। जितने तेरह अक्टूबर को दिखे थे। दोनों गठबंधनों की कड़ी टक्कर वाली खबरों ने डांवाडोल कर दिया। नतीजे बराबरी पर उतरे। तो शरद पवार इस बार खम ठोकेंगे। छगन भुजबल ने आंखें दिखानी शुरू कर दी। आखिर एनसीपी के भरोसे दस साल से महाराष्ट्र में कांग्रेसी सीएम। सो अबके एनसीपी का जम्मू कश्मीर फार्मूला। ढाई-ढाई साल मलाई खाने का फार्मूला। पर हरियाणा में तो ऐसी कोई आशंका नहीं। भूपेंद्र सिंह हुड्डा भले दावे के मुताबिक साठ सीटें न जीतें। पर बहुमत कांग्रेस का ही होगा। इसमें अपन को शक नहीं।

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