पाकिस्तान को लेकर उलझन में अपने मंत्री

लोक दिखावे और असलियत का फर्क अब दिखने लगा। सताईस सितंबर को एसएम कृष्णा और कुरैशी की मुलाकात हुई। तो अपन को खबर दी गई- 'सख्त कार्रवाई के बिना बात नहीं।' पर कुरैशी ने बुधवार को इस्लामाबाद में कहा- 'सकारात्मक रुख दिखाई दिया।' अपन को पहले से ही आशंका थी। महाराष्ट्र का चुनाव हो जाने दीजिए। मनमोहन की याद धुंधली हो जाएगी। मुंबई का हमला महत्वहीन तो नहीं होगा। पर पाक से बातचीत में अड़चन भी नहीं होगा। अपन ने 23 सितंबर को लिखा था- 'महाराष्ट्र चुनाव के बाद मिलेंगे मनमोहन-गिलानी।' सो अब नवंबर के तीसरे हफ्ते की मुलाकात तय। त्रिनिदाद में कामनवेल्थ के दौरान मिलेंगे दोनों। करीब-करीब तभी बाराक ओबामा के साथ डिनर करेंगे मनमोहन। पर अपन बात कर रहे थे अपने 23 सितंबर वाले कालम की। बाईस सितंबर को जब पाक के पीएम यूसुफ रजा गिलानी ने कहा- 'यों तो सही-सही गृहमंत्री बताएंगे। पर मेरे ख्याल में हाफिज सईद हिरासत में।' तो अपन ने तब भी शक जाहिर किया था। अपन ने उस दिन लिखा- 'हाफिज सईद की पीठ पर आईएसआई का हाथ। हाफिज को बचाकर रखेगी पाक सरकार। गिरफ्तार हुए। तो पोल खुलेगी आईएसआई की।' अब वही साबित हुआ। हाफिज की कोई गिरफ्तारी नहीं हुई। किसी हिरासत में नहीं हाफिज। अलबत्ता आईएसआई की हिफाजत में हैं हाफिज। छब्बीस-सताईस को कुरैशी-कृष्णा गुफ्तगू थी। सो हिरासत की नौटंकी हुई। पर अपनी सरकार पाक की नौटंकी नहीं समझ रही। अपने तो जितने मंत्री। उतनी विदेश नीतियां। अब ताजा घटना ही लो। पाक से चौंकाने वाली खबर आई। खबर थी- 'स्वात में साठ तालिबानों ने सरंडर किया। आईएसआई ने तालिबानों के सामने दो विकल्प रखे। पहला- जेल जाओ। दूसरा- कश्मीर जाकर जेहाद करो।' आईएसआई का मकसद तालिबानों को अफगानिस्तान बार्डर से हटाना। कश्मीर के बार्डर पर ला खड़ा करना। आईएसआई को भारत के हुकमरानों से कोई डर नहीं। डर तो पाकिस्तान के हुकमरानों से भी नहीं। पर अमेरिका का खौफ आईएसआई पर मंडराता दिखने लगा। तभी तो अफगानिस्तान के बार्डर से तालिबानों की धरपकड़ शुरू। तालिबानों के सरंडर की खबर आई। तो अपनी खुफिया एजेंसियों के हवाले से खबर आई- 'ढाई सौ से तीन सौ जेहादी नियंत्रण रेखा पर मौजूद। पंद्रह-बीस दिन में घुसपैठ की तैयारी।' चीन बार्डर की बात याद होगी। मनमोहन से लेकर कृष्णा तक मीडिया पर लट्ठ लेकर दौड़े थे। कहा- 'मीडिया ने घुसपैठ को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया।' यों तो चीन को लेकर गलतफहमी में हैं मनमोहन-कृष्णा। पर वही राग अपनी सरकार ने पाक को लेकर अलापा। तो अपन सुनकर सन्न रह गए। आप दो मंत्रियों के बयानों में फर्क देखिए। एके एंटनी अपने रक्षामंत्री। उनने खुफिया एजेंसियों पर भरोसा किया। वह दिल्ली में गंभीरता से बोले- 'आतंकियों पर कार्रवाई को लेकर गंभीर नहीं पाक। जम्मू कश्मीर में घुसपैठ बरकरार।' उनने तो यहां तक खुलासा किया- 'आतंकियों के ट्रेनिंग कैंप पाक सैनिक छावनियों की बगल में। मौका मिलते ही घुसपैठ करवाने की कोशिश।' पर अपने पी चिदंबरम का बयान देखिए। वह बोले- 'तालिबानियों की घुसपैठ कराने की खबर बेसिर पैर की।' चीन की घुसपैठ पर भी हू-ब-हू यही रवैया था चिदंबरम का। मनमोहन सिंह अपने मंत्रियों पर कितनी लगाम लगा पाएंगे। अपन को भरोसा भी नहीं। सोनिया गांधी ही कुछ करें, तो करें। पहले भी उनने ही कान मरोड़े थे।

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