तो क्या पाक से पर्दे के पीछे बात का इरादा

हाफिज मोहम्मद सईद की नजरबंदी हो गई। सोमवार अपने यहां इस खबर की खूब चर्चा रही। पर पाकिस्तान में उतनी चर्चा नहीं दिखी। पाकिस्तानी अखबारों की वेबसाइट में जिक्र तक नहीं हुआ। आखिर लाहौर के पुलिस सुप्रीटेंडेंट सोहेल सुखेरा ने खंडन किया। वह बोले- 'हमने सिर्फ ईद की नमाज करने जाने से रोका। वह भी सईद की सुरक्षा के कारण। नजरबंदी का हमें कोई हुक्म नहीं।' पर अपने यहां चिदम्बरम भी चैनलों की खबर से प्रभावित हुए। अपने चैनलों ने भी खबर पाकिस्तानी चैनलों से उठाई। दोनों देशों के चैनलों में कोई खास फर्क नहीं। यों कृष्णा-कुरैशी की मुलाकात से पहले गिरफ्तारी हो भी जाए। तो ताज्जुब नहीं होगा। आखिर शर्म-अल-शेख में जब मनमोहन-गिलानी मुलाकात होनी थी। तो पाक ने कसाब के पाकिस्तानी होने का कबूलनामा भेज दिया था। अब भी कृष्णा-कुरैशी मुलाकात से पहले सात के चार्जशीट होने की चर्चा। अपनी बात मानो। तो पाक सरकार सईद को हर हाल में बचाएगी। यह बात अमेरिका को भी मालूम। अपन को भी। तभी तो पी चिदम्बरम ने सोमवार को कहा- 'हमसे बार-बार सबूत मांग रहे हैं। पर सबूत तो पाकिस्तान में हैं। हम कैसे दें।' उनने उम्मीद जाहिर की- 'पाक पुलिस हाफिज सईद से मुंबई पर हमले की पूछताछ करेगी।' पर यह उम्मीद उनने उस खबर पर की। जो उनने हिरासत में लेने वाली देखी। ताकि सनद रहे सो याद दिला दें। मुंबई पर हुए आतंकी हमले में 164 लोग मारे गए थे। जिनमें कई तो अमेरिकी भी थे। इसीलिए लश्कर-ए-तोएबा और जमात-उद-दावा के प्रमुख पर दोनों का दबाव। भारत-अमेरिका दबाव में ही शुक्रवार को एफआईआर दर्ज हुई। पर एफआईआर मुंबई हमले से ताल्लुक नहीं रखती। एफआईआर में कहा है- 'हाफिज सईद ने भड़काऊ भाषण दिए।' इसी से पाकिस्तान की नियत समझ लेनी चाहिए। पाक के गृहमंत्री रहमान मलिक तो ताल ठोककर कहते हैं- 'हाफिज सईद के खिलाफ सबूत दो।' वह अजमल कसाब के बयान को सबूत मानने को तैयार नहीं। यह बात तो सही। अपन ने जितने भी सबूत भेजे। सब अजमल कसाब के बयान पर आधारित। रहमान मलिक का यह कहना गलत नहीं- 'कसाब के बयान सबूत नहीं हो सकते। अदालत में नहीं ठहर सकते।' इसलिए बेहतर तो होगा। हाफिज सईद पर इंटरनेशनल कोर्ट में मुकदमा चले। इंटरपोल पाक में सईद के खिलाफ सबूत जुटाए। अपन ने तो इंटरपोल से वारंट जारी करा दिए। अब पाक उस पर अमल करे। चिदम्बरम ने सही कहा- 'सबूत तो पाक में ही मौजूद।' पर अपन बात कर रहे थे- कृष्णा-कुरैशी गुफ्तगू की। अपने पीएम मनमोहन ने तय की थी यह गुफ्तगू। शर्म-अल-शेख के साझा बयान में किया था वादा। पर इससे पहले होनी थी विदेश सचिवों की गुफ्तगू। सोनिया गांधी शर्म-अल-शेख के साझा बयान से खफा न होती। तो निरुपमा-बशीर मुलाकात हो गई होती। बशीर ने तो कई बार न्योता भेजा। पर निरुपमा राव ने जवाब ही नहीं दिया। अब दिल्ली से तो नहीं। पर पाकिस्तान से खबर आई है- सलमान बशीर ने कहा- 'न्यूयार्क में मुलाकात 26 सितंबर को होगी।' लंदन में शाह महमूद कुरैशी ने पुष्टि की। यानी दोनों सचिव निरुपमा राव और सलमान बशीर 26 को मिलेंगे। दोनों की मुलाकात से जो निकलेगा। उस पर दोनों विदेशमंत्री कृष्णा-कुरैशी 27 को बात करेंगे। पर अपन पहले ही बता दें- 'निकलना कुछ नहीं।' अपन मुंबई हमले पर अटकेंगे। साझा बयान पर बवाल खड़ा न होता। तो बात आगे बढ़ जाती। आखिर साझा बयान में कहा था- 'आतंकवाद संबंधों में अड़चन नहीं बनना चाहिए।' अब तो दुनियाभर से एक और आतंकी हमले की आशंका वाली खबरें। पर क्या मनमोहन गुपचुप बात शुरू कर देंगे। अपन पाक के विदेशमंत्री शाह महमूद कुरैशी पर भरोसा करें। तो उनने सोमवार को लंदन में कहा- 'रियाज मोहम्मद पर्दे के पीछे बातचीत करेंगे।' रियाज मोहम्मद पाकिस्तान के विदेश सचिव हुआ करते थे।

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