चोंचलेबाजी छोड़ सीमाओं की फिक्र करे सरकार

सोनिया का 'सादगी मंत्र' काबिल-ए-तारीफ। पर मीडिया जरूरत से कुछ ज्यादा लट्टू। अपन कारगिल की जंग का वक्त याद कराएं। तब वाजपेयी ने चुपके से सादगी मंत्र लागू किया। कोई शोर शराबा नहीं। कोई चोंचलेबाजी नहीं। वाजपेयी ने विदेश यात्राओं पर मंत्रियों का डेली एलाउंस भी घटा दिया था। पहले सौ डालर रोज था। घटाकर पचहत्तर डालर कर दिया। किसी मंत्री ने चूं तक नहीं की। अब तो पवार, फारुक, कमल, आनंद, मारन कितने मंत्री भड़के। तारीफ के काबिल हैं प्रणव मुखर्जी। जिनने सरकारी विमान छोड़ दिया। एसएम कृष्णा ने तो खुन्नस में छोड़ा। पर अपन को सरकारी विमान का बेजा इस्तेमाल नहीं भूलता। सोनिया सोमवार को इकनामी क्लास में मुंबई गई। तो अपन लोग बावले हो गए। अब तो महाराष्ट्र में चुनावी आचार संहिता लागू। पर पिछले पांच साल सोनिया के दौरों में कभी पीएम साथ होते। तो कभी होम मिनिस्टर जाते। कभी रक्षामंत्री साथ होते। इन तीनों के पास होता है सरकारी विमान। दौरा होता था सोनिया का। उड़ना पड़ता था तीनों में से एक को। अपन इस बात को भूल भी जाएं। तो इस सारी सादगी से सालभर में बचेंगे 18-20 करोड़। इससे ज्यादा की तो मुनियादी हो गई। फिक्र ग्रामीण रोजगार के भ्रष्टाचार की करनी चाहिए। पचास फीसदी बर्बादी की खबरें चौंकाने वाली। यानि 18-20 हजार करोड़ की बर्बादी। 'सादगी मंत्र' नहीं। जरूरत मन से किफायती होने की। सादगी कोई 'ममता बनर्जी' या 'रमण सिंह' से सीखें। ममता केबिनेट मंत्री। पर सरकारी कार तक नहीं ली। रमण सिंह छत्तीसगढ़ के सीएम। पर दिल्ली कभी सरकारी हेलीकाप्टर पर नहीं आए। दिल्ली से चंडीगढ़ सिर्फ 225 किलोमीटर। पर हरियाणा के सीएम कभी कार पर नहीं आते। बताने और करने में बहुत फर्क। विमानों पर इकनामी क्लास में बैठने से महंगाई घटे। तो अपन 'सोनिया मंत्र' को सिर आंखों पर बिठा लेंगे। पर देखिए महंगाई का हाल। अरहर की दाल तो 90 रुपए कई दिन से थी। प्याज बीस से घट नहीं रहा। आलू अब बीस रुपए किलो भी नहीं मिलता। सोमवार को चौबीस रुपए किलो मिला। अब गरीब क्या खाएगा। सोनिया सोमवार को महाराष्ट्र के चुनाव प्रचार में बोली- 'कांग्रेस हमेशा आम आदमी के हितों की संरक्षक।' पर आम आदमी तो प्याज की चटनी से रोटी खाने लायक भी नहीं बचा। कांग्रेस और यूपीए 'सादगी मंत्र' का ढिंढोरा कम करें। महंगाई और चीनी घुसपैठ की फिक्र ज्यादा करें। वरना जिस 'आम आदमी' ने कुर्सी दिलाई। वही लात मारकर भगा देगा। देखा गुजरात का नतीजा। अपन ने पहले भी लिखा था। नरेंद्र मोदी के खिलाफ जितनी नफरत फैलाओगे। मोदी को उतना ही फायदा होगा। देखा, इसरत जहां के मामले में मेजिस्ट्रेट के इस्तेमाल का असर। मेजिस्ट्रेट के खिलाफ जांच शुरू हो चुकी। पर जनता ने तो जवाब दे दिया। जिन सात सीटों पर चुनाव थे। उनमें छह तो कांग्रेस की थी। लोकसभा चुनाव में सभी पर कांग्रेस की बढ़त थी। मोदी तो प्रचार के लिए भी नहीं गए। तब अभिषेक मनु कहते थे- 'नाक बचाने के लिए नहीं जा रहे। सभी सीटें हारेंगे, तो नाक कटेगी।' मनीष तिवारी ने पिछले चुनावों से कोई सबक नहीं सीखा। सोनिया ने मोदी को मौत का सौदागर कहा था। नतीजे देख पूरी कांग्रेस पछताई। अब मनीष ने मोदी को आदमखोर कहा। तो देखा फिर नतीजा। गुजरात का 'आदमखोर' पूरा 'पंजा' चबा गया। उस उत्तराखंड में भी बीजेपी जीत गई। जहां पांचों सीटों पर कांग्रेस जीती थी। मध्यप्रदेश में भी चौहान ने कांग्रेस की 'तेंदुखेडा' झटक ली। सो महाराष्ट्र में अकेले लड़ने की गलती न करे कांग्रेस। हमेशा दिन एक से नहीं रहते। पर बात हो रही थी चीन सीमाओं की। पिछले हफ्ते जब सीमा में 'दखल' की खबरें आनी शुरू हुई। तो अपने एसएम कृष्णा बोले- 'इतना हो-हल्ले की भी जरूरत नहीं।' यह बयान सुन अपन को डिप्टी सीएम आरआर पाटिल की याद आ गई। मुंबई पर आतंकी हमला हुआ। तो कहा था- 'ऐसी छोटी-मोटी वारदातें होती रहती हैं।'

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