नाकाम हुई सरकार पर हमलावर हुआ विपक्ष

दिल्ली में सावन के अजीब रंग-ढंग। कभी बारी पूर्वी दिल्ली की। तो कभी दक्षिण दिल्ली की। शुक्रवार को तो कमाल हुआ। संसद मार्ग में बरसात हुई। पर संसद में सूखा पड़ा रहा। फिर भी शरद पवार ने हिम्मत नहीं हारी। बोले- 'धीरे-धीरे सुधर रहे हालात। धीरे-धीरे हो रही बरसात। घबराने की नहीं जरूरत। अन्न का भरा है भंडार।' राज्यसभा में कालिंग एटेंशन मोशन का जवाब दे रहे थे। उनने माना- मौसम विभाग की भविष्यवाणी गलत निकली। वैसे पवार ने बहुत देर से माना। देश का आम आदमी तो उसी दिन से मान रहा था। जिस दिन भविष्यवाणी हुई। भविष्यवाणी तो जल्द बरसात की थी। जल्द तो दूर की बात। आधे से ज्यादा सावन बीत चला। पवार ने सिर्फ 17 फीसदी कमी बताई। पच्चीस फीसदी कम हो। तो सूखा घोषित करने का नियम। सो सरकार कहीं सूखा घोषित नहीं करेगी। विपक्ष चीखता-चिल्लाता रहे। जरूरत पड़ी, तो इम्पोर्ट करेगी। दोनों हाथों में लड्डू वाला इम्पोर्ट। अपने किसानों को वह दाम नहीं देगी सरकार। जो विदेशी अनाज पर देगी। अपने यहां सूखा पड़ते ही एक्सपोर्टर देशों की बांछें खिल चुकी। अब देखना कितना महंगा इम्पोर्ट होगा गेहूं-चावल। एनडीए सरकार भरे भंडार छोड़ गई थी। यों यूपीए का दावा कृषि की हालात सुधारने का। पर सच दावे से कोसों दूर। हालत सुधरते। तो अरहर नब्बे रुपए किलो नहीं मिलती। मूंग धुली भी अब सत्तर रुपए से ऊपर। जो आम इस मौसम में पंद्रह रुपए किलो होता था। वह इस बार चालीस से नीचे नहीं आया। सेब की फसल में भी गिरावट के संकेत। सो सौ रुपए किलो बिकेगा सेब। तरबूज को इस साल अपन ने पहली बार खरबूजे से महंगा खाया। मनमोहन सिंह ने दावा किया था- 'महंगाई कंट्रोल होगी।' पर महंगाई है कि थम नहीं रही। कहने को मुद्रास्फीति महंगाई का आइना। पर मुद्रास्फीति गिरावट की ओर। महंगाई शिखर की ओर। सो एनडीए ने शुक्रवार को मोर्चा खोल लिया। महंगाई सरकार पर हमले का हथियार होगी। हथियार होगा चावल घोटाला भी। अब सरकार का इरादा दालों पर सब्सिडी का। कम से कम बीस रुपए किलो सब्सिडी। यों अपन  ने थोक बाजार से पता किया। तो पता चला दालों की कीमतों में गिरावट का रुख। पर परचून मार्केट में चढ़ाव जारी। सरकार कंट्रोल नहीं कर पा रही महंगाई। पर बात हो रही थी एनडीए-यूपीए राज के खाद्यान्न भंडार की। शुक्रवार को राज्यसभा में तो महंगाई पर मोशन था। पर लोकसभा में दोनों जोशी तेरे-मेरे की तू-तू, मैं-मैं में उलझे दिखे। अपन बात कर रहे हैं- सीपी जोशी और मुरली मनोहर जोशी की। मुरली मनोहर का सवाल था-'ग्रामीण सड़कों का निर्माण लक्ष्य से बहुत पीछे। बजट तो बढ़ा। पर काम नहीं हो रहा। कहीं पैसे की बर्बादी न हो। क्या इंतजामी है आपकी।' पहली बार सांसद बने सीपी जोशी प्रश्नकाल की परंपरा नहीं जानते। सो लगे राजनीतिक भाषण देने। एनडीए राज के आंकड़े गिनाने लगे। वह तोड़-मरोड़ कर। तो हंगामा हो गया। प्रश्नकाल में परंपरा 'टू दि प्वाइंट' जवाब देने की। सो मीरा कुमार को हिदायत देनी पड़ी- 'सवाल का जवाब दीजिए।' अपन ने सोलह जुलाई को बताया था- 'यूपीए सरकार के तीन मंत्री अनाड़ियों जैसे। तीनों को घेरना कोई मुश्किल नहीं। तीनों एनडीए के निशाने पर होंगे।' तो इस हफ्ते तीनों मंत्री बुरी तरह घिरे। अझगरी तो प्रश्नकाल से भागते रहे। एसएम कृष्णा अपने बचाव में देशभक्ति की दुहाई देते दिखे। शुक्रवार को जोशी ने विपक्ष का गुस्सा झेला। स्पीकर की फटकार खाई। पर बात बड़े जोशी यानी मुरली मनोहर की। तो वह शुक्रवार को आडवाणी-सुषमा से ज्यादा हमलावर दिखे। उनने एनपीटी पर भी सरकार पर सवाल दागे। पूछा- 'तो क्या एनपीटी पर दस्तखत कर रही है सरकार। सरकार खुलासा करे अमेरिकी दबाव का।' याद करा दें- मनमोहन ने ताल ठोकी थी- 'एनपीटी पर दस्तखत बिना एटमी करार किया। एनडीए सरकार तो दस्तखत को तैयार थी।' अपन बताते जाएं- अब जी-8 का प्रस्ताव अपन पर भारी पड़ेगा। एनएसजी ने प्रस्ताव पर मुहर लगाई। तो संवर्धन और रि प्रोसेसिंग संभव नहीं होगी।

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