विदेशनीति पर मनमेहन की क्लास लेंगी सोनिया

लालू-मुलायम यूपीए छोड़ विपक्ष में आने को बेताब। झलक बुधवार को साफ दिखी। लालू-मुलायम-राबड़ी की सुरक्षा घटाने की खबर लीक हुई। तो लोकसभा में हंगामा हुआ। सवाल उठाया मुलायमवादी शैलेन्द्र कुमार ने। पर लालू ने साफ कह दिया- 'मुझे कुछ हुआ, तो सुरक्षा घटाने वाले जेल जाने को तैयार रहें।' इशारा चिदम्बरम की ओर ही था। चिदम्बरम पर फब्ती कसते हुए कहा- 'राबड़ी को सुरक्षा दी कब थी। जो हटाने की खबरें छपवा रहे हो।' मुलायम ने तो खुद पर हुए चार हमलों का हवाला दिया। शरद यादव भी दोनों यादवों के साथ दिखे। बोले- 'नाम कैसे लीक हुए। क्या हत्यारों को बताना चाहते हैं- जो करना हो, कर लो।' पर बात मुलायम की। उनकी विपक्ष में जाने की बेताबी साफ दिखी। बोले- 'बीजेपी थोड़ा सुधर जाए। तो बीजेपी-एसपी साथ-साथ संभव।' बात सिर्फ सुरक्षा घटाने की नहीं। अपन कई दिनों से यादवों का रुख देख रहे। विदेशनीति पर लालू-मुलायम पूरी तरह एनडीए के साथ। पर कांग्रेस को किसी की कोई फिक्र नहीं। राहुल गांधी ने यूथ कांग्रेस की क्लासें शुरू कर दी। तो सोनिया ने बुधवार को सांसदों की क्लास ली। बात राहुल की चली। तो बताते जाएं- बुधवार क्लास में लंच का वक्त हुआ। तो राहुल का मन किया- कुछ 'नॉनवेज' हो जाए। फाइव स्टार का चस्का न हो। तो दिल्ली में आंध्र भवन के 'नॉनवेज' का जवाब नहीं। सो राहुल ने जितेन्द्र सिंह को साथ लिया। पहुंच गए आंध्र भवन। जितेन्द्र सिंह-वही अपने अलवर के एमपी। राहुल के साथ अटैच कांग्रेस के सेक्रेट्री। अपन बता दें- आंध्र भवन में सांसदों के लिए थाली का रेट सिर्फ सोलह रुपए। पर उसमें मटन, चिकन, फिश शामिल नहीं। सो कुल बिल बैठा 272 रुपए। ठीक इतने ही सांसद चाहिए लोकसभा में बहुमत के लिए। सो राहुल ने बिल देने को बेताब बैठे सांसद पी प्रभाकर को देने नहीं दिया। जो राहुल को देखकर कैंटीन में आ धमके थे। पर राहुल ने साथ भी नहीं बैठने दिया। बात राहुल के 'लंच' की नहीं। बात राहुल के 'यूथ हंट' की। राहुल का इरादा पंजाब-गुजरात को पूरे देश में दोहराने का। बात गुजरात की चली। तो बता दें- गुजरात के शराब कांड का मुख्य आरोपी भले कांग्रेसी ही निकला। जारी सीडी में राहुल को ही माला पहना रहे हैं आरोपी सुभाष गिरी। कांग्रेस को झटका तो लगा ही होगा। पर दिल्ली पहुंचे गुजरात के कांग्रेसी झटकाप्रूफ दिखे। राष्ट्रपति को मोदी के खिलाफ गुहार लगाने आए थे। अहमद पटेल और सोनिया से भी मिले। हां, अपन बात कर रहे थे सोनिया की। जिनने सांसदों के प्रांतीय कनविनरों की क्लास ली। मकसद था- संसद में गैर हाजिरी पर डांट डपट। सोनिया ने कहा- 'बहुत कम सांसद दिखते हैँ संसद में। कहां जाते हैं सभी। भले सदन में न रहें। सेंट्रल हाल में बैठें। पर संसद से बाहर नहीं निकलने चाहिए।' अब भगोड़ों की खैर नहीं। सोनिया मैडम ने क्लास ली। तो बातें इधर-उधर की भी हुई। विदेशनीति पर उठ रहे सवालों की भी। अपन तो पिछले एक हफ्ते से बता ही रहे। सोनिया विदेशनीति में आए बदलाव से बेहद खफा। यों तो अभिषेक और मनीष से अलग बोली जयंती नटराजन। पर अपन को ज्यादा फर्क नहीं दिखा। साझा बयान का न खंडन करने को तैयार हुई। न स्वागत करने को। भले बोली- 'पार्टी पीएम के साथ खड़ी है।' पर कितना साथ खड़ी है। वह सबको मालूम। बुधवार को सोनिया ने कोर कमेटी बुलाई। पर मनमोहन को नहीं बुलाया। अब इसमें अटकलबाजी की क्या बात। बात तो विदेशनीति में आए बदलाव पर ही हुई। अहमद भाई, प्रणव दा, एंटनी मौजूद थे। प्रणव दा की नाराजगी भी छिपी नहीं। सुनते हैं विदेशनीति पर प्रणव-मनमोहन में मतभेद उभर चुके। इसीलिए मनमोहन ने हिलेरी क्लिंटन को दिए लंच में नहीं बुलाया। प्रणव दा के राज्यमंत्री रहे आनंद शर्मा तक मौजूद थे। अपन ने बुधवार को प्रणव दा से पूछा। तो वह संसद में व्यस्त होने का बहाना बना कन्नी काट गए। पर सोनिया अब विदेशनीति में दिख रहे बदलाव पर गंभीर। देखते हैं कब लगती है मनमोहन की क्लास। और 29 जुलाई को संसद में क्या जवाब देते हैं मनमोहन।

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