अमेरिकी कानून लागू होंगे तो अपनी डेमोक्रेसी खतरे में

बात सिर्फ मनमोहन सिंह की नहीं। जिनके अमेरिका प्रेम से अब सोनिया भी खफा। सोनिया के खफा होने के चार सबूत अपन देंगे। बात यूपीए सरकार के बाकी मंत्रियों की। या तो वे मनमोहन के डर से चुप। या फिर अमेरिकी खौफ से भयभीत। आखिर बुश ने इराक को तबाह कर ही दिया। सामूहिक नरसंहार का कोई हथियार नहीं मिला। फिर भी बिना कसूर सद्दाम को फांसी पर चढ़ा ही दिया। तो क्या इसीलिए यूपीए सरकार अमेरिका से भयभीत? वरना क्या कारण रहा होगा। जो प्रफुल्ल पटेल तीन महीने अमेरिकी बद्तमीजी पर चुप्पी साधे रहे। बात चौबीस अप्रेल 2009 की। अब्दुल कलाम जा रहे थे अमेरिका। अमेरिकी कांटीनेंटल एयरलाइंस ने उनके जूते तक उतरवाए। यह बद्तमीजी न्यूयार्क या वाशिंगटन में नहीं। अलबत्ता दिल्ली के इंदिरा गांधी हवाई अड्डे पर हुई। सीआईएसएफ ने कांटीनेंटल एयरलाइंस को बताया भी- 'अब्दुल कलाम देश के पूर्व राष्ट्रपति। सो प्रोटोकाल के मुताबिक सुरक्षा जांच नहीं होगी।' पर एयरलाइंस की अमेरिकी अधिकारी ने कहा- 'कोई छूट नहीं।' सीआईएसएफ ने उसी दिन मंत्रालय को रपट भेजी। पर प्रफुल्ल लंबी तानकर सो गए। वह तो मंगलवार को हिंदी के एक अखबार ने खुलासा किया। तो संसद में हंगामा हुआ। राज्यसभा में अरुण जेटली ने मुद्दा उठाया। तो प्रफुल्ल बोले- 'एयरलाइंस को नोटिस देंगे। कार्रवाई करेंगे।' घंटेभर में नोटिस दे भी दिया। पर एयरलाइंस की ढींगामुस्ती देखिए। बयान देकर कहा- 'अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी डिपार्टमेंट के टीएसए ने नए नियम जारी किए। नियमों के मुताबिक किसी को सुरक्षा जांच में छूट नहीं। अब्दुल कलाम नाराज नहीं होंगे। हम सेवा का मौका देने के लिए एक बार फिर आभारी।' तो क्या भारत में अमेरिकी कानून लागू होंगे। यह अपनी खामख्याली नहीं। सोमवार को हुआ मिलिट्री एंड यूजर्स एग्रीमेंट इसका सबूत। मिलिट्री एंड यूजर्स एग्रीमेंट अमेरिकी कानून। जो अब भारत पर भी लागू होगा। इस पर मंगलवार को दस्तखत कर दिए मनमोहन सरकार ने। यानी अपनी डेमोक्रेसी खतरे में। यशवंत सिन्हा ने लोकसभा में एग्रीमेंट का मतलब समझाया। उनने कहा- 'अमेरिका जिसको भी दोहरे इस्तेमाल वाला सामान दे। उस पर लादता है मिलिट्री एंड यूजर्स एग्रीमेंट।' एग्रीमेंट के तहत अब अमेरिका मौका मुआइना करेगा। देखिएगा- उसके बेचे हवाई जहाजों का कहां इस्तेमाल कर रहा है भारत। उसके कम्प्यूटरों को सेना तो इस्तेमाल नहीं कर रही। उसके यूरेनियम से अपन बम तो नहीं बना रहे। यानी अपन पर इंस्पक्ट्री राज करेगा अमेरिका। अपन याद दिलाएं- एटमी करार पर अमेरिकी इंस्पेक्टरों पर हल्ला हुआ। तो मनमोहन ने संसद में कहा था- 'अमेरिकी जासूस नहीं। आईएईए के एक्सपर्ट करेंगे निगरानी।' पर अब अमेरिकी निगरानी का एग्रीमेंट भी कर लिया। एग्रीमेंट पर बवाल तो होना ही था। घोर अमेरिका विरोधी वासुदेव-गुरुदास ही खफा नहीं हुए। लालू-मुलायम भी भड़के। सच पूछिए, तो विदेशनीति पर सरकार अल्पमत में। सबके वाकआउट से सरकार अल्पमत में दिखी। मंगलवार को अल्पमत का चौथा मुद्दा था। ग्लोबल वार्मिंग पर मनमोहन का घुटने टेकना। जी-8 के एटमी प्रस्ताव पर चुप्पी साधना। गिलानी से साझा बयान में आतंकवाद डी-लिंक करना। ब्लूचिस्तान का भी जिक्र। अब चौथा मुद्दा एंड यूजर्स एग्रीमेंट। सोनिया भी इन चारों मुद्दों पर बेहद खफा। अपन ने कल साझा बयान पर कांग्रेस की चुप्पी बताई थी। एग्रीमेंट पर भी सरकार का बचाव नहीं किया कांग्रेस ने। अपन को तो कांग्रेस भी विपक्ष से सहमत दिखी। वरना मनीष तिवारी कुछ तो बचाव करते। उनने तो यह कहकर पिंड छुड़ाया- 'हमने एग्रीमेंट पढ़ा नहीं।' विदेशमंत्री एसएम कृष्णा संसद में बयान देने पर मजबूर हुए। सवाल भी दागे गए। सुषमा स्वराज ने कहा- 'रिश्ते दोस्ती के होने चाहिए। दास्ता के नहीं।' लालू यादव ने सद्दाम की फांसी याद दिलाई। तो शरद यादव ने याद दिलाया- अमेरिकी कुत्तों का गांधी की समाधि सूंघना। बोले- 'यह भारत का अपमान है। कभी बुश अपने कुत्तों से गांधी की समाधि सूंघाते हैं। कभी हमारे पूर्व राष्ट्रपति के जूते उतरवाते हैं।' देश के स्वाभिमान पर चोट से विपक्ष खफा दिखा। पर कृष्णा खुद के राष्ट्रभक्त होने की दुहाई देने लगे।

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