सोनिया बोली- आसान नहीं महिला आरक्षण

सौ दिन का फंडा। फंडे का सबसे बड़ा फंदा है महिला आरक्षण। पर सौ दिन का सरकार को उतना बुखार नहीं। जितना यादवों-लोधों और मीडिया को। राष्ट्रपति से अभिभाषण में मनमोहन ने यही तो कहलवाया था- 'मेरी सरकार 100 दिनों के भीतर इन उपायों पर कदम उठाएगी।' जो पच्चीस मुद्दे गिनाए। उनमें महिला आरक्षण भी था। सो बात सिर्फ कदम उठाने की। सौ दिन में बिल पास कराने की तो बात नहीं। यों पवन बंसल बता रहे थे- 'आखिरी हफ्ते में शुरू होगा बजट सेशन।' अपना अंदाज 29 जून का। पहली जुलाई को ममता का रेल बजट। दो को इकनामिक सर्वे। तीन को प्रणव दा का बजट। पर बात महिला आरक्षण पर आल पार्टी मीटिंग की। फिलहाल तो सरकार के पास दूसरे कई काम। पहला काम यही होता। तो मनमोहन अभिभाषण पर अपने जवाब में ताल ठोककर कहते। फिलहाल सोनिया के पास भी वक्त नहीं। राहुल गांधी के पास तो बिल्कुल नहीं। राहुल तो बुधवार को उस लंच में भी नहीं आए। जो जीत की खुशी में कांग्रेस ने दिया। कांग्रेस का पहला 'फाईव स्टार' लंच। इतनी बड़ी जीत के बाद 'फाईव स्टार' तो बनता था। सो अपने जनार्दन द्विवेदी के न्योते पर कोई तीन सौ खबरची पहुंचे। दर्जनभर मंत्री भी मौजूद थे। कुछ कांग्रेस के महासचिव। तो कुछ महासचिव बनने की लाईन में खड़े भी पहुंचे। कौन-कौन लाईन में। उसकी बात अपन बाद में करेंगे। पहले बात लजीज खाने की। तो खाने को छह हिस्सों में बांटा गया। कांटिनेंटल, राजस्थानी, साऊथ इंडियन, नार्थ इंडियन, पूर्वोत्तर और इटेलियन। अपन को तो नहीं लगता होटल को इटेलियन फूड की हिदायत होगी। सोनिया ने इटेलियन फूड खाया भी नहीं। अपन को जरूर पसंद आया। पर इटेलियन फूड की तख्ती देखकर सब चौंके। सोनिया हर टेबल पर गई। सबसे जान-पहचान हुई। सवाल जवाब नहीं होंगे। यह जनार्दन द्विवेदी ने शुरू में कह दिया था। पर सवाल-जवाब तो फिर भी हो गए। यों द्विवेदी का इरादा- भोजन, जल तरंग और मन तरंग ही था। जल तरंग ने समय बांधे रखा। तो एक टेबल पर महिला पत्रकारों ने कब्जा कर लिया। इसी टेबल पर महिलाओं में घिर गई सोनिया। अपन महिलाओं के सवाल-जवाब की चर्चा बाद में करेंगे। पहले उन कांग्रेसियों की बात। जो बैठने-उठने, घोड़ा-गाड़ी, तेल-पानी का जुगाड ढूंढ रहे। उन सबकी निगाह कांग्रेस में फेरबदल पर। यों सोनिया ने पिछली बार 'वन मैन- वन पोस्ट' नहीं चलाया। पृथ्वीराज, अजय माकन, आस्कर, नारायण सामी दोनों जगह थे। पर अबके वन मैन- वन पोस्ट की चर्चा। सोनिया ने लागू किया। तो गुलाम नबी, मुकुल वासनिक, नारायण सामी, पृथ्वीराज, वीरप्पा मोइली, अजय माकन मुक्त होंगे। सभी मंत्री बन चुके। अबके संगठन में राहुल गांधी की चलेगी। राहुल का इरादा युवा और अनुभवी के घालमेल का। चुनाव हारे मणिशंकर, अंतुले, जाफर शरीफ, मारग्रेट, शकील, वाघेला का फैसला जरूर सौ दिन में होगा। साथ में हंसराज भारद्वाज, सैफुद्दीन सोज और शिवराज पाटिल का भी। सभी की निगाह संगठन और राजभवनों पर। सोनिया-राहुल संगठन में जगह देंगे। या मनमोहन राजभवनों में भेजेंगे। गिरिजा व्यास, रमेश चेन्नीथला, पीजे कुरियन का भी कुछ होगा। यों राहुल की निगाह अशोक तंवर, संदीप दीक्षित, रमणी, मीनाक्षी नटराजन, मौसम नूर, मनीष तिवारी, सुरेश कोडकुनाल, जितेंद्र सिंह पर। राहुल की टीम के हीरो होंगे सभी। पर बात उस अधूरे सवाल की। जो महिला पत्रकारों के टेबल पर हुआ। सोनिया से पूछा गया- 'महिला आरक्षण बिल आसानी से पास हो जाएगा?' वह बोली- 'मुश्किल तो है, हम सभी से सलाह करेंगे।' वैसे अपन याद दिला दें। पिछली बार सोनिया ने यह काम शिवराज पाटिल को सौंपा था। वह तो नाकाम होने ही थे। दूसरा सवाल हुआ- 'क्या बीस फीसदी पर सहमति हो जाएगी?' वह बोली- 'इस पर पार्टी में कोई विचार नहीं हुआ।' यानि बीस-पच्चीस के फार्मूले पर साफ-साफ इनकार भी नहीं। वैसे अपन ने वहीं पर सत्यव्रत चतुर्वेदी से पूछा- 'बीस-पच्चीस पर बात बनेगी?' तो वह बोले- 'होना तो तैंतीस ही चाहिए। पर कांग्रेस में भी गहरे मतभेद।' पवन बंसल ने अपनी प्रेस कांफ्रेंस में पार्टी की लाईन ही ली। बोले- '33 फीसदी से कम का सवाल नहीं।'

जी आपने वो गाना तो सुना

जी आपने वो गाना तो सुना होगा...कसमे वादे प्यार,वफ़ा...सब..वादे है वादों का क्या...!अब छोडिये भी सब कुछ हो गया अब काहे का बिल...?

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