करुणानिधि के फच्चर से उड़ी मनमोहन की नींद

अपन को लगता था- करुणानिधि जिद्द छोड़ देंगे। पर न मनमोहन ने जिद्द छोड़ी। न करुणानिधि जिद्द छोड़ने को तैयार। जिद्द का जिक्र अपन बाद में करेंगे। पहले बात दो दिन चली कसरत की। बुधवार को यूपीए मीटिंग निपटी। तो बंद कमरों में शुरू हुई मंत्रालयों की मलाई बांटने की बात। करुणानिधि, ममता, पवार, फारुख, शिबू से हो रही थी बात। रात भर चली कसरत। करुणानिधि के सामने प्रस्ताव था- दो केबिनेट, दो स्टेट मिनिस्टर। वह पहले ही मिनट नामंजूर हो गया। करुणानिधि बोले- 'फार्मूला वही चलेगा। जो 2004 में था।' वैसे अपन बता दें- 2004 में कोई फार्मूला नहीं था। जो मांगा, सो मिल गया। मनमोहन सड़क परिवहन मंत्रालय से नाखुश थे। पर टीआर बालू को हटा नहीं पाए। आईटी मंत्री ए राजा की शिकायतें थी। पर हटा नहीं पाए। अबके कांग्रेस की 206 सीटें आई। तो मनमोहन-सोनिया ने कई अहम फैसले किए। जैसे लालू-शिबू-मुलायम को मिनिस्ट्री में नहीं लेंगे। बात लालू की चली। तो बता दें- गुरुवार को भड़कते हुए बोले- 'मुझे दूध से मक्खी की तरह निकाल दिया।' खैर इस बार लालू नहीं, ममता रेल मंत्री होंगी। सुना है- ममता मंत्री बनने को राजी। अब ममता राजी हुई। तो रेल से कम नहीं मानेगी। वैसे ममता की मांग सिर्फ एक केबिनेट, पांच स्टेट की। सो अपन को ममता के साथ सुल्तान अहमद, काकुली घोष, शिशिर अधिकारी, दिनेश त्रिवेदी का अंदाज। कोई एक-आध आगे-पीछे हुआ। तो जटुआ, सौगात, मुकुल में से कोई। बंगाल से कांग्रेस के प्रणव दा तो होंगे ही। साथ में मौसम नूर होने का अंदाज। केरल की बात भी कर दें। एके एंटनी, एम रामचंद्रन, शशि थरूर, ई. अहमद होंगे। महाराष्ट्र से पवार और प्रफुल्ल एनसीपी के। करुणानिधि ने फच्चर फंसाया। तो देर रात पवार के हौंसले भी बुलंद हुए। उनने भी एक केबिनेट, दो स्टेट की मांग ठोक दी। कांग्रेस से शिंदे, देवड़ा, पृथ्वी का आना पक्का। कर्नाटक से मल्लिकार्जुन खड़के भले पहली बार जीते। पर मंत्री जरूर होंगे। आस्कर, वीरप्पा में से एक। एसएम कृष्णा की लाटरी खुली, तो खुली। वैसे वह सीएम-गवर्नर ही नहीं। इंदिरा के वक्त केंद्र में मंत्री भी रह चुके। आंध्र भी बताते ही जाएं। तो जयपाल रेड्डी, पुरंदेश्वरी, पनवाका लक्ष्मी, पल्लम राजू, चिंता मोहन, हनुमनथप्पा। वी. किशोरचंद्र देव स्पीकर न हुए। तो मंत्री जरूर होंगे। जम्मू कश्मीर से गुलाम नबी के साथ फारुख। यूपी से सलमान खुर्शीद, श्रीप्रकाश, रत्नासिंह, जतिन प्रसाद। मध्यप्रदेश से कमलनाथ, ज्योतिरादित्य, कांति भूरिया तो पहले से थे। देखते हैं किसकी लाटरी और खुलेगी। राजस्थान से सीपी जोशी हुए। तो गिरिजा व्याज कैसे होंगी। यों एकमात्र मीणा और एकमात्र गुर्जर का आना पक्का। शीशराम ओला के बारे में असमंजस जारी। दिल्ली के पड़ोसी राजस्थान की बात चली। तो पड़ोसियों हरियाणा-पंजाब-हिमाचल की भी बात। पर पहले बात दिल्ली की। तो सिब्बल, माकन की ही लाटरी फिर खुलेगी। पंजाब से प्रनीत कौर का दावा सबसे पक्का। अंबिका सोनी, संतोष चौधरी से भी ज्यादा। मनीष, विजयइन्द्र, रवनीत में से एक स्टेट मिनिस्टर होगा। अश्विनी का नंबर आएगा, या नहीं। भरोसा नहीं। हरियाणा से रावइंद्रजीत, शैलजा पहले से। सो शीशराम की जगह दीपेन्द्र हुड्डा जाट मंत्री हों। तो हैरानी नहीं होगी। चंडीगढ़ से पवन, हिमाचल से वीरभद्र तो आएंगे ही। अब रही बात तमिलनाडु की। जहां करुणानिधि ने रंग में भंग डाल दिया। पी चिदंबरम का मंत्री बनना तो पक्का। पर बात अटकी करुणानिधि के कुनबे पर। बेटे अजगरी, बेटी कन्नीमुरी, भतीजे दयानिधि, अजगरी की साली डेविड हेलन का नाम लिस्ट में। मनमोहन कुनबे की लिस्ट देखकर भड़क गए। पिछली बार ग्यारह चार्जशीटेड मंत्रियों ने बदनाम किया। अबके एक परिवार बदनाम करेगा। सो मनमोहन न सिर्फ परिवारवाद के खिलाफ अड़े। अलबत्ता बालू और ए राजा के खिलाफ भी वीटो लगाया। करुणानिधि भी कम नहीं। सो उनने फरमान जारी कर दिया- 'हम सरकार में शामिल ही नहीं होंगे।' यों सोनिया-मनमोहन को फिक्र नहीं। पर करुणानिधि बाहर निकले। तो अल्पमत सरकार होगी, बहुमत नहीं। बाहरी समर्थन से टिकी होगी सरकार।

बेचारा करुणा! परिवार के

बेचारा करुणा! परिवार के सिर्फ 4 लोग ! जैसा उनका कद और चमत्कार है, उनके परिवार के कम से कम एक दर्जन लोग तो होने चाहिए थे. दो दर्जन होते तो और मजा आता. भारत की पूरी सरकार ही उनके परिवार की बन जाए तो सोने में सुहागा!!

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