थर्ड फ्रंट का इरादा दावा ठोक कांग्रेस से समर्थन का

इस बार सेफोलोजिस्टों की तो वॉट लग गई। मुकाबला इतना कड़ा था। एग्जिट पोल भी हांफते से दिखे। यूपीए समर्थक चैनल एनडीए को आगे दिखाते रहे। एनडीए समर्थक चैनल यूपीए को। पूरे चुनाव में सर्वेक्षण नहीं हुए। अब जब नतीजों में तीन दिन बाकी। तो एग्जिट पोल सेफोलोजिस्टों का अपना इम्तिहान। अपन दावा तो नहीं कर सकते। पर अपना अनुमान भी एनडीए-यूपीए में बराबरी की टक्कर का। दोनों में दर्जनभर का फर्क रहेगा। अपन ने यूपीए की बात की। तो उसमें अपन लालू-पासवान-मुलायम नहीं जोड़ते। लालू-पासवान-मुलायम और जाएंगे कहां। सो इन तीनों के साथ यूपीए थोड़ा आगे होगा। वरना एनडीए आगे। अब सात रेसकोर्स की चाबी उसी के हाथ होगी। जिसके साथ थर्ड फ्रंट होगा। पर क्या थर्ड फ्रंट एक रह पाएगा। टीआरएस खिसक चुका एनडीए के साथ। जेडीएस जा चुका यूपीए के साथ। अपन ने कुमार स्वामी के मुंह छुपाकर सोनिया से मुलाकात बताई ही थी। खिलाड़ी निकली कांग्रेस। विजुअल मीडिया को मीटिंग की खबर लीक कर दी। तभी तो कैमरे में कैद हुए कुमार स्वामी। दिग्गी राजा से पूछा, तो बोले- 'मुंह छुपाकर मिलते, तो आपको पता कैसे चलता।' कुमार स्वामी बोले- 'मैं तो पसीना पोंछ रहा था।' खैर देवगौड़ा-कुमार स्वामी सफाई देते घूमते रहे- 'हम थर्ड फ्रंट के साथ।' ए बी वर्धन ने भी ताल ठोककर कहा- 'जेडीएस हमारे साथ। टीआरएस गया तो गया।' पर लाख टके का सवाल- थर्ड फ्रंट बचेगा क्या। जयललिता ने खुलासा किया- 'मुझे दोनों ने एप्रोच किया। पर फैसला सोलह के बाद करूंगी।' यानी करुणानिधि के रहते जयललिता से बात। जयललिता की शर्त बता दें- कांग्रेस करुणानिधि से समर्थन वापस लेकर सरकार गिराए। पर क्या कांग्रेस केंद्र में सरकार बनाने के लिए करुणानिधि को दगा देगी। जयंती नटराजन ने कहा- 'कतई नहीं।' पर यह तय होगा सोलह के बाद। वैसे अपन बताते जाएं- विजयकांत ने इस बार तमिलनाडु का मुकाबला कड़ा कर दिया।  विजयकांत का जादू चला। तो जयललिता बीस पर निपटेंगी। यों अपना अनुमान जयललिता गठबंधन को 28 सीटों का। अपन ने कल बिना ममता लेफ्ट का कुनबा 240-250 का बताया ही था। सो सात रेसकोर्स की चाबी जयललिता के हाथ। अपन को 2004 का चुनाव नहीं भूलता। जब मुलायम सिंह ताल ठोककर कहते थे- 'केंद्र में सरकार उसी की बनेगी। जिसे मुलायम चाहेंगे।' पर अपन को वह दिन भी नहीं भूलता। जब हरकिशन सिंह सुरजीत ने बाजी पलट दी। उनने सोनिया को समर्थन का एकतरफा एलान कर दिया। तो बाजी मुलायम के हाथ में नहीं रही। अमर सिंह बिन मांगा समर्थन देने गए थे। तो अपमानित होकर लौटे। पर बात ताजा चुनाव की। इस बार कांग्रेस को ज्यादा जरूरत। जयललिता ने तो कांग्रेस के संपर्क साधने का खुलासा कर ही दिया। शाम होते-होते अहमद पटेल की सतीश मिश्र से मुलाकात की खबर भी आ गई। मुलाकातों फोन कालों का सिलसिला शुरू हो चुका। नतीजे आने में तीन दिन बाकी। पर बिसात बिछ गई। पासवान के घर शार्ट सर्किट से आग क्या लगी। सोनिया को फुनियाने का बहाना मिल गया। पर लालू यादव को किसी ने फोन नहीं किया। प्रेमचंद गुप्ता खुद मिलने गए मनमोहन से। पर सबसे ज्यादा चर्चा रही अमेरिकी दिलचस्पी की। अमेरिकी राजदूत पीटर बर्लिह बेहद एक्टिव। मंगल को हैदराबाद जाकर चंद्रबाबू और चिरंजीवी से मिले। तो बुधवार को दिल्ली में आडवाणी से। सुनते हैं- पीटर ने चंद्रबाबू से कहा- 'यूपीए या एनडीए को समर्थन दो। थर्ड फ्रंट की सरकार न बने।' अमेरिका को एटमी करार रुकने का खतरा। सो अब एटमी करार बचाने की जद्दोजहद। वेंकैया नायडू ने पुष्टि कर दी। कहा- 'पीटर ने एटमी करार और पाकिस्तान पर बीजेपी की राय पूछी।' पर लेप्ट का इरादा इस बार राष्ट्रपति के सामने दावा ठोकने का। लेफ्ट मीटिंग के बाद ए बी वर्धन ने कहा- 'हम राष्ट्रपति के पास जाकर थर्ड फ्रंट को मौका देने की बात कहेंगे।' यानी थर्ड फ्रंट ने दावा पेश किया। तो कांग्रेस मुश्किल में फंसेगी।

इस बार लगता तो ऐसे ही

इस बार लगता तो ऐसे ही है...छोटी पार्टियाँ हावी होकर कांग्रेस से कीमत वसूलना चाहेगी..क्यूंकि उन्होंने भी कभी कांग्रेस को स्पोर्ट किया था..सो ये उचित समय होगा उनके लिए..

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