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Exclusive Articles written by Ajay Setia

गुर्जरों को एसटी दर्जे पर ऐसे कन्नी काटी कांग्रेस

Publsihed: 27.May.2008, 21:23

सौ साल पहले गुर्जर चाहते थे- उन्हें क्षत्रीय माना जाए। आज कह रहे हैं- 'हमें अनुसूचित जनजाति का दर्जा मिले।' पर गुर्जर हैं क्या? अपन इतिहास के पन्ने पलटें। तो गुर्जरों की कई कहानियां मिलेंगी। पहली कहानी- हूण दो गुटों में बंट गए। रेड हूण और सफेद हूण। रेड हूण यूरोप चले गए। सफेद हूण ऑक्सेस घाटी पार कर काबुल में घुसे। काबुल में उनने किशन साम्राज्य पर कब्जा किया। फिर भारत में घुस आए। कहानी है- वे जॉर्जिया से आए। जो अंग्रेजी में 'जी' से शुरू होता है। जॉर्जिया का अपभ्रंश ही गुर्जर- गुज्जर हुआ। वे जॉर्जिया से मध्य एशिया, इराक, ईरान, अफगानिस्तान से खैबर दर्रा पार कर भारत में घुसे। दूसरी कहानी- गुर्जर असल में राजपूत थे। मुगलों ने भारत पर हमला किया। तो औरंगजेब से राजपूतों का एक समझौता हुआ। समझौता था- 'राजपूत युध्द में हार गए। तो उनका एक बड़ा हिस्सा मुस्लिम बन जाएगा।'

ओखली में सिर दिया तो अब भुगते यूपीए

Publsihed: 27.May.2008, 20:43

अपने मुरली देवड़ा मंगलवार को मनमोहन सिंह से मिले। तो उनने पेट्रोलियम कंपनियों को घाटे का ब्यौरा दिया। संसद का बजट सत्र खत्म हुआ। तब से पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने की अटकलें। पर अपन को पहले से पता था। कर्नाटक चुनाव तक कीमतें नहीं बढ़नी। सो नहीं बढ़ी। अपनी सरकार है, सो हर मामले में राजनीति से परहेज क्यों। अमेरिका होता, तो राष्ट्रपति देश को आर्थिक घाटे का जिम्मेदार ठहरा दिया जाता। पर मनमोहन ने चुनावी फायदे के लिए महीना भर कीमतें रोके रखी। अब कीमतें बढ़ेंगी, इससे मुरली देवड़ा ने कभी इनकार भी नहीं किया। अपने अभिषेक मनु सिंघवी भी दो टूक शब्दों में कह चुके- 'देश कीमतें बढ़ने के लिए तैयार रहे।' सो कीमतें तो बढ़ेंगी ही। आज नहीं तो कल। पर सरकार भी आम लोगों को हलाल करने पर आमादा।

सीएम प्रोजेक्ट किए तो जाल में फंसेगी कांग्रेस

Publsihed: 27.May.2008, 05:37

कर्नाटक में जब कांग्रेस की लुटिया डूब रही थी। तो सोनिया अपनी बेटी प्रियंका के घर नाते-नाती से खेल रही थी। सोनिया बारह बजे से पांच बजे तक प्रियंका के घर रही। राजीव जब पीएम थे। तो छुट्टियां मनाने की परंपरा दुबारा से शुरू की। यों जवाहर लाल नेहरू भी छुटि्टयां मनाने जाते थे। पहली बार उनने हिमाचल में छुट्टियां मनाई। पर बाद में पीएम छुट्टियों से कन्नी काटने लगे। राजीव अलग तरह के राजनीतिबाज थे। उनने अपने यहां यूरोपियन रिवाज लागू किया। हफ्ते में दो दिन छुट्टियों का। फाइव डे वीक राजीव की देन। सोनिया तो ठहरी ही यूरोपियन। सो हार में वह क्यों अपना संडे बर्बाद करती।

अब आडवाणी का ख्वाब ख्याली पुलाव नहीं

Publsihed: 26.May.2008, 02:36

कर्नाटक में कांग्रेस क्या हारी। सबको कांग्रेस की फिक्र पड़ गई। अपन दिनभर एक चैनल पर रहे। बार-बार यही सवाल दागा गया-'अब कांग्रेस का क्या होगा। कांग्रेस को क्या करना चाहिए'। मीडिया कांग्रेस की हालत पर दुबला हो चला है। पर अपन उन लोगों में नहीं। जो देश से ज्यादा कांग्रेस की फिक्र करे। कांग्रेस ने परिवारवाद अपनाकर खुद अपनी जड़ों में मटठा डाला। अपन उन लोगों में भी नहीं। जो कांग्रेस के लिए नेहरु-गांधी परिवार को जरूरी समझें। सोनिया के बिना भी नरसिंह राव 145 सीटे लाए थे। सोनिया के बिना भी सीताराम केसरी 141 सीटें लाए थे।

तो मनमोहन ने पैदा की यूरेनियम की फर्जी कमी

Publsihed: 23.May.2008, 20:44

यों कहावत तो है- जख्मी शेर ज्यादा हमलावर हो जाता है। पर अपन दुविधा में। शिवराज पाटिल को शेर कहें कैसे? पर चारों तरफ से घिरे पाटिल अब ज्यादा हमलावर। सो बांग्लादेशियों के मुद्दे पर बेनकाब हुए पाटिल अब गुर्जरों के मुद्दे पर हमलावर हों। तो अपन को हैरानी नहीं होगी। बांग्लादेशियों के मुद्दे पर उनने वसुंधरा से खार खा ली। सो अब वसुंधरा केंद्र से नए हमले का इंतजार करें। जब तक पाटिल-वसुंधरा का नया वाकयुध्द हो। तब तक अपन बात करें पाटिल के अफजल वाले बयान की। जिस पर देश में बवाल मचा। पर पाटिल बचाव में नहीं उतरे।

आतंकियों-घुसपैठियों की पीठ पर देश का गृहमंत्री

Publsihed: 22.May.2008, 20:41

जब बाड ही खेत को खाने लगे। तो खेत का खुदा ही रखवाला। गृहमंत्री शिवराज पाटिल पर यह कहावत एकदम फिट। देश को ऐसा गृहमंत्री न पहले कभी मिला। न आगे कभी मिलना। सोनिया गांधी को ऐसे प्रधानमंत्री और गृहमंत्री पर फख्र। जिनका न कोई राजनीतिक आधार। न जमीनी आधार। अपन तो पाटिल के बयान पर हैरान हुए। जब वह वसुंधरा राजे पर भड़कते हुए बोले- 'यह राजशाही नहीं। लोकतंत्र है।' जी हां, इसीलिए लातूर में हारकर वह देश के गृहमंत्री हो गए। इसीलिए दक्षिण दिल्ली में हारकर मनमोहन देश के पीएम हो गए। इसी लोकतंत्र की बात कर रहे हैं पाटिल। वसुंधरा को बता रहे हैं- 'यह राजशाही नहीं।' जो जनता के वोट से जीतकर सीएम बनी। जिसे किसी सोनिया ने नोमिनेट नहीं किया।

पीएम का जश्न, महंगाई और जयपुर का मातम

Publsihed: 21.May.2008, 20:59

यों तो जयपुर की आतंकी वारदात का आज दसवां दिन। अपने यहां तेरहवीं से पहले मातम मनाने की संस्कृति। मार्च 2006 को आतंकियों ने बनारस के मंदिरों में बम फोड़े। तो सोनिया गांधी ने होली नहीं मनाई थी। वाजपेयी, जो होली के शौकीन। उनने भी होली नहीं मनाई। सो अब तेरहवीं से पहले मनमोहन का डिनर अजीब-ओ-गरीब। बनारस में सिर्फ 28 लोग मरे थे। जयपुर में 66 लोग मर चुके। मनमोहन सालाना रिपोर्ट कार्ड जारी करते। डिनर न रखते। तो संस्कृति भी बची रहती। आतंकवाद के खिलाफ गंभीरता भी दिखती। बीजेपी को भी जनता की भावनाओं का ख्याल रखना चाहिए।

आतंकवाद के माहौल में सालगिरह का जश्न

Publsihed: 21.May.2008, 06:59

आडवाणी कर्नाटक की भागदौड़ से लौटे। तो हरकिशन सुरजीत का हालचाल पूछने गए। मनमोहन की सरकार बनवाने में अहम भूमिका थी सुरजीत की। सो मनमोहन इतवार को ही अस्पताल हो आए। मनमोहन के साथ सुरजीत कभी संसद में नहीं रहे। पर आडवाणी-सुरजीत एक ही वक्त राज्यसभा में थे। आडवाणी-सुरजीत ने तब भी इकट्ठे काम किया। जब बीजेपी-सीपीएम ने वीपी सरकार को समर्थन दिया। सो आडवाणी ने येचुरी को फोन किया। तो पुराने किस्से याद किए। वैसे अभी ऐसा वक्त नहीं आया था। वाहे-गुरु सुरजीत को चंगा भला करें। जैसे चंगे-भले होकर करुणानिधि अस्पताल से लौटे। सुरजीत का हालचाल पूछ अपने मनमोहन तो चुनावी तैयारियों में जुट गए। कल सरकार की चौथी सालगिरह। इसे अपन चौथा तो नहीं कह सकते।

तुम्हारी कमीज पर मेरी कमीज से ज्यादा धब्बे

Publsihed: 19.May.2008, 20:41

जयपुर के धमाकों ने राजनीति तेज कर दी। कांग्रेस-बीजेपी में एक-दूजे को कटघरे में खड़ा करने की होड़। आतंकवाद पर कांग्रेस का रिकार्ड अच्छा नहीं। तो उसने भाजपा का रिकार्ड याद कराने का तरीका अपनाया। कांग्रेस अपने रिकार्ड पर बात करने को तैयार नहीं। अरुण जेटली ने इतवार को मनमोहन सिंह की बखिया उधेड़ी। तो कांग्रेस जल-भुन गई। जेटली की बाकी बातें बाद में। पहले फेडरल एजेंसी की बात। अपन ने यह बात पंद्रह मई को ही लिख दी थी। जब अपन ने लिखा- 'पोटा हटाकर फेडरल एजेंसी की वकालत।' तो अपन ने उस दिन खुलासा किया- 'फेडरल एजेंसी का आइडिया छह साल पहले आडवाणी का था। तब कांग्रेसी मुख्यमंत्रियों ने विरोध किया।' यही बात पांच दिन बाद जेटली ने याद कराई।

कांग्रेस बांग्लादेशियों के भरोसे असम जीत चुकी

Publsihed: 16.May.2008, 20:41

कांग्रेस शुक्रवार को भी वसुंधरा पर भड़की हुई थी। अबके भड़ास अपने शकील अख्तर ने निकाली। बोले - 'बीजेपी और बीएसपी सोनिया और राहुल से डरे हुए हैं।' सोनिया तो चलो जयपुर गई। जिस पर वसुंधरा भड़की। पर राहुल बाबा बीच में कहां से आ गए। अपन को समझ नहीं आया। असल में कांग्रेसियों को राहुल बाबा पर ज्यादा ही भरोसा। इसलिए बाकी किसी महामंत्री का नाम तक नहीं लेते। पर अपन बात कर रहे थे वसुंधरा के खिलाफ निकली भड़ास की। मनीष तिवारी गुरुवार को ही अपनी भड़ास निकाल चुके थे। अब रह गए अभिषेक मनु और जयंती नटराजन।