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Exclusive Articles written by Ajay Setia

तो बनते-बनते बिगड़ गई कर्नाटक की बात

Publsihed: 06.Nov.2009, 10:11

अपन ने कल बीजेपी की कंगाली में आटा गीला होने की कहानी बताई। बिहार में सुशील मोदी के खिलाफ नई बगावत। झारखंड में जेडीयू के साथ गठबंधन में फच्चर। कर्नाटक में रेड्डी ब्रदर्स का येदुरप्पा के खिलाफ खम ठोकना। अब आगे। सुशील मोदी के खिलाफ दो साल पहले भी बिगुल बजा था। तब बीजेपी ने डेमोक्रेटिक फार्मूला निकाला। बीजेपी के सारे एमएलए दिल्ली बुलाए गए। बंद कमरे में एक-एक को बुलाकर पूछा। फैसला मोदी के हक में निकला। मोदी बच गए। पर यह फार्मूला न खंडूरी को हटाते समय उत्तराखंड में लागू हुआ। न वसुंधरा को हटाते समय राजस्थान में। अब सुशील मोदी के खिलाफ दुबारा बिगुल बजा। तो अपन को इंतजार करना होगा हाईकमान के नए रुख का। झारखंड में फंसा गठबंधन का फच्चर गुरुवार को निकल गया।

भाजपा का तो कंगाली में आटा ही गीला

Publsihed: 05.Nov.2009, 09:39

अपन ने कल लिखा ही था- 'आडवाणी होम मिनिस्टर रहते वीएचपी की मीटिंग में जाते। तो जमकर बवाल होता। पर चिदंबरम जमात-उलेमा-ए-हिंद की मीटिंग में गए। तो पत्ता भी नहीं हिला।' देवबंद की उसी कांफ्रेंस में वंदेमातरम् के खिलाफ फतवा हो गया। पी चिदंबरम ने दिल्ली आकर सफाई दी- 'मेरे सामने कोई फतवा नहीं हुआ। मुझे तो पता भी नहीं।' चिदंबरम् ठहरे चतुर सुजान। जमात-उलेमा-ए-हिंद का प्रस्ताव ही फतवे का आगाज था। यह प्रस्ताव पास हुआ था सोमवार को। चिदंबरम पहुंचे मंगल को। कहते हैं- 'मुझे तो पता भी नहीं।' चतुर सुजान चिदंबरम का किस्सा तो अरुण जेटली ने सुनाया। मौका था- 'डायरेक्ट टैक्स पर सेमीनार का।' सेमीनार किया था- 'कनफैडरेशन आफ आल इंडिया ट्रेडर्स ने।' जेटली बोले- 'उदारीकरण शुरू हुआ। तो टैक्स घटने शुरू हुए। लक्ष्य था- लगातार टैक्स घटाते जाना। ताकि भारतीय उद्योग धंधे अंतरराष्ट्रीय बाजार के मुकाबले खड़े हों। पर चिदंबरम जब-जब वित्त मंत्री बने। उनने टैक्सों का बोझ लादा। चिदंबरम बजट की पैकेजिंग के माहिर।

ए आर रहमान ने बनाया वंदेमातरम को विश्वगीत

Publsihed: 04.Nov.2009, 10:05

वोट बैंक की राजनीति देश को कहां ले जाएगी। इसका ताजा उदाहरण देवबंद में दिखा। देश का होम मिनिस्टर पहुंच गया जमात-उलेमा-ए-हिंद की मीटिंग में। आडवाणी होम मिनिस्टर होते हुए वीएचपी की मीटिंग में जाते। तो सोचो कितना बवाल होता। कांग्रेस-लेफ्ट-सपा-राजद सब चढ़ दौड़ते। पर चिदंबरम मुस्लिम सम्मेलन में जाकर धन्य हो गए। तो देश में पत्ता भी नहीं हिला। चिदंबरम को पौने दो साल पहले के फतवे की तारीफ करना याद रहा। पर ताजा फतवे पर चुप्पी साध गए। चिदंबरम ने जिस आतंकवाद विरोधी फतवे की तारीफ की। वह देवबंद से 25 फरवरी 2008 को जारी हुआ था। पर ताजा फतवा हुआ वंदेमातरम के खिलाफ। जमायत-उलेमा-ए-हिंद के इसी सम्मेलन में प्रस्ताव पास हुआ- 'मुसलमानों को 'वंदे मातरम्' नहीं गाना चाहिए।' वजह बताई- 'वंदे मातरम् में देश के लिए सजदा है। मुसलमान अल्लाह के अलावा किसी की इबादत नहीं करते।'

इंदिरा के जमाने से ही शुरू हो गई थी सियासत व्यापार बननी

Publsihed: 31.Oct.2009, 00:21

महाराष्ट्र-हरियाणा के चुनाव नतीजे आए आज दसवां दिन। जीत का जश्न मनाने के बावजूद सरकारें नहीं बन पाई। दोनों जगह बहुमत का जुगाड़ तो हो गया। पर राजनीतिक मलाई पर सौदेबाजी नहीं निपट रही। महाराष्ट्र - हरियाणा की बात बताएं। पर उससे पहले आरके धवन की बात। जो भजनलाल को फिर से कांग्रेस में लाने की कोशिश में। धवन ने इंदिरा गांधी का स्टेनो बनकर सफर शुरू किया। सो इंदिरा गांधी को करीब से समझने वालों में धवन भी। इंदिरा की बरसी पर धवन ने कहा- 'इंदिरा ने इमरजेंसी और ब्ल्यू स्टार के कदम मजबूरी में उठाए। दोनों का बहुत अफसोस था बाद में।' ताकि सनद रहे। सो बताना जरूरी।

पवार के लंच में भी नहीं हो पाई 'पावर' की बंदरबांट

Publsihed: 30.Oct.2009, 10:28

पाकिस्तान ने हिलेरी क्लिंटन से कहा- 'भारत को समग्र बात के लिए राजी करो।' मनमोहन सिंह ने श्रीनगर में कहा- 'किसी के दबाव में कोई बात नहीं होगी। पाक पहले आतंकवाद पर नकेल डाले। तभी बात होगी।' यों दबी जुबान में उनने कह दिया- 'यह शर्त नहीं।' मनमोहन तलवार की धार पर। शर्म-अल-शेख में कहा था- 'आतंकवाद बातचीत में बाधा नहीं बनना चाहिए।' पर दिल्ली में सोनिया का दबाव बना। तो संसद में कहा-'आतंकवाद रुके, तो बातचीत होगी।' अब दोनों बातों का संतुलन रखना पड़ता है मनमोहन को। बात समग्र बातचीत की। तो मनमोहन के लिए आसान बात नहीं। सोनिया गांधी का फच्चर न होता। तो मनमोहन शुरू करा चुके होते।

मनमोहन से ज्यादा तो हिलेरी ने खोली आईएसआई की पोल

Publsihed: 29.Oct.2009, 09:35

शर्म-अल-शेख के बयान से अपन सहमत नहीं थे। मनमोहन सिंह ने आतंकवाद को किनारे रख पाक से बात शुरू की थी। तो अपन क्या सारा देश खफा था। देश खफा हुआ। तो सोनिया गांधी के कान भी खड़े हुए। सोनिया ने तब तक मनमोहन का समर्थन नहीं किया। जब तक उनने संसद में पलटी नहीं खाई। मनमोहन के अब समझ में आ चुका। अमेरिका के कहने पर पाक से नरमी कितनी महंगी पड़ेगी। सो मनमोहन अब बिना सोचे-समझे नहीं बोलते। पाक से निपटने का ठेका अमेरिका को देने का जोखिम भी नहीं उठाते। मनमोहन ही नहीं। एसएम कृष्णा के बयानों में मर्दानगी झलकने लगी।

ममता समर्थकों का ट्रेन पर कब्जा, बुध्ददेव छुड़ाने गए

Publsihed: 28.Oct.2009, 09:54

ममता की ट्रेन बंधक बनकर छूट गई। ममता को चिदंबरम की मदद मांगनी पड़ी। 'रेल रोको' आंदोलन भी ममता समर्थकों का था। सो ट्रेन अपहरण की जिम्मेदार भी ममता ही हुई। ममता मंत्री न होती। तो खुद भी पटरी पर बैठी होती। वक्त का फेर देखिए। बुध्ददेव की पुलिस ममता की ट्रेन को छुड़ाने गई। पर पुलिस अत्याचारों के खिलाफ बनी ममता समर्थक जनकमेटी भी मुस्तैद थी। बांसतला से चार किलोमीटर ही पहुंची थी पुलिस। कमेटी के लठैतों ने पुलिस पार्टी पर हमला बोल दिया। बुध्ददेव की पुलिस जन कमेटी के सामने धूल चाटने को मजबूर हुई।

यह सत्ता और घोटाले में वाजिब हिस्से की जंग

Publsihed: 27.Oct.2009, 10:02

जून 2008 में खुलता है एक घोटाला। यूपीए सरकार के डीएमके मंत्री कटघरे में खड़े थे। करुणानिधि के करीबी ए. राजा। राजा ने मनमोहन सिंह को ढाल बना लिया। कहा- 'मैंने जो कुछ किया, पीएम की जानकारी में था। पीएम की इजाजत से किया।' मनमोहन सिंह ने भी बचाव में परहेज नहीं किया। मनमोहन आज भी अपनी उसी जुबान पर कायम। अब जब सीबीआई छापे मार चुकी। तो भी मनमोहन सिंह ने ए. राजा का बचाव किया। मनमोहन भी कटघरे में खड़े होने से बचेंगे नहीं। अरुण जेटली ने ए. राजा के साथ मनमोहन सिंह को कटघरे में खड़ा कर भी दिया। शीत सत्र शुरू होने में ज्यादा देर नहीं। उन्नीस नवबंर को शुरू होगा। सत्र का एजेंडा सीबीआई ने तय कर दिया।

कांग्रेस को हरियाणा में झटका, बीजेपी को सब जगह

Publsihed: 23.Oct.2009, 10:25

हरियाणा में अपन ने ऐसा तो नहीं सोचा था। झटका लगेगा, यह तो पता था। पर बहुमत नहीं मिलेगा। अपन को ऐसी आशंका नहीं थी। पर कांग्रेस आलाकमान को आशंका हो गई थी। आशंका न हुई होती। तो मोती लाल वोरा और आरके धवन पोलिंग के बाद भजन लाल से न मिलते। चुनाव शुरू हुआ। तो हालात ऐसी नहीं थी। पर चुनाव रोहतक बनाम बाकी हरियाणा बन गया। तो हालात बदल गए। चौटाला जब कहा करते थे- 'हुड्डा हरियाणा के नहीं, रोहतक के सीएम।' तो कांग्रेस ने उसे गंभीरता से नहीं लिया। पर यह बात चुनावों में साफ दिखने लगी थी। हुड्डा ने वक्त से पहले चुनाव करवाए। हालात तो हुड्डा के पक्ष में थे। पहले मायावती-भजनलाल गठबंधन टूटा। फिर चौटाला-बीजेपी गठबंधन टूटा। फिर कुलदीप-बीजेपी गठबंधन होते-होते टूटा। पांच कोणीय चुनावों में भी कांग्रेस की दुर्गति हुई।

अरुणाचल का जनादेश लेकर जियाबाओ से भिड़ेंगे मनमोहन

Publsihed: 22.Oct.2009, 10:08

आज होगी तीन राज्यों के वोटों की गिनती। उधर गिनती निपटेगी। इधर झारखंड के चुनाव का रास्ता खुलेगा। झारखंड का चुनाव तीन राज्यों के साथ न होना। सत्ता के दुरुपयोग का कांग्रेसी उदाहरण। सरकार न बननी थी, न बनानी थी। पर एसेंबली को जानबूझकर सस्पेंड किए रखा। कांग्रेस की मदद वाली मधु कोड़ा की सरकार सबसे भ्रष्ट साबित हुई। कोई पांच हजार करोड़ की जायदाद बनाई कोड़ा ने। अब सीबीआई जांच के घेरे में। शिबू सोरेन विरोध करते रहे। पर मधु कोड़ा सरकार चलाती रही कांग्रेस। पांच हजार करोड़ रुपए के भ्रष्टाचार का जिम्मेदार कौन। यह नतीजा आप खुद निकालिए। पर आज बात झारखंड की नहीं। बात तीन राज्यों के चुनाव नतीजों की। मनमोहन आज रात को थाईलैंड रवाना होंगे। तो अपने साथ अरुणाचल का जनादेश ले जाएंगे। चलते-चलते बताते जाएं- इस बार पीएम अलग उड़नखटोले पर सवार होंगे। टीम अलग उड़नखटोले पर।