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Exclusive Articles written by Ajay Setia

यूएनपीए टूटा, मुलायम गए कांग्रेस की झोली में

Publsihed: 04.Jul.2008, 05:59

यूएनपीए टूटने का ऐलान नहीं हुआ। पर यूएनपीए टूट गया। अब लेफ्ट समर्थन वापसी की चिट्ठी राष्ट्रपति को आज दे। या पीएम के टोक्यो लौटने से बाद दे। मनमोहन की सरकार भी बच गई। करार भी होगा। यूएनपीए मीटिंग के बाद चौटाला-चंद्रबाबू एकता की डुगडुगी बजाते रहे। करार पर राष्ट्रीय बहस का ऐलान किया। पर मुलायम सिंह एक शब्द नहीं बोले। अपन तभी समझ गए थे। जब अमर सिंह ने वही पुरानी दलील दोहराई- 'करार से ज्यादा खतरा सांप्रदायिकता से।'

चुनाव से डरकर भागेंगे कहां, बकरे की मां ....

Publsihed: 02.Jul.2008, 20:50

दिल्ली में पल-पल समीकरण बदलने लगे। मंगल को मुलायम कांग्रेस के साथ दिखे। तो बुधवार को मुस्लिम सांसदों की बगावत से घबराए दिखे। गुरुवार को चंद्रबाबू और चौटाला के सामने होंगे। चंद्रबाबू-चौटाला कांग्रेस के साथ नहीं जा सकते। यूएनपीए बना ही कांग्रेस विरोध पर था। अब मुलायम कांग्रेस के साथ जाएंगे। तो कैसा तीसरा मोर्चा, कैसा यूएनपीए। कांग्रेस को अब मुलायम पर पूरा भरोसा। इसी भरोसे से मनमोहन इतवार को जी-8 के लिए रवाना होंगे। नौ-दस को लौटकर आईएईए पर फैसला होगा। बात आईएईए की चली। तो अपन गलतफहमियां दूर कर दें।

करार से जुड़ा है वोट बैक, चौराहे पर खड़े मुलायम

Publsihed: 02.Jul.2008, 06:20

राजनीति में न परमानेंट दोस्ती। न परमानेंट दुश्मनी। मुलायम के बदले तेवरों से यह कहावत फिर सच साबित हुई। अपन फिलहाल अमर सिंह के बयानों को बाजू रखें। सिर्फ मुलायम सिंह का बयान पढ़ें। तो हर शब्द से दो मतलब निकलेंगे। उनने कहा- 'हमारी किसी राजनीतिक दल से दुश्मनी नहीं। सैध्दांतिक मतभेद हो सकते हैं।' यह बात कांग्रेस के लिए लागू। तो बीजेपी के लिए भी लागू। मुलायम भाजपाईयों की मदद से दो बार सीएम रह चुके। पहली बार 1978 के जनता राज में। दूसरी बार जब बिना बहुमत के वाजपेयी ने सीएम बनवाया। दोनों ने मिलकर वीपी सिंह को पीएम भी बनवाया था।

सांप्रदायिकता से चुनावी रोटियां सेकने का वक्त

Publsihed: 01.Jul.2008, 06:26

एटमी करार का पतनाला वहीं का वहीं। यों अपने मनमोहन सिंह ने कई दिनों से बंद पड़ी जुबान खोली। पर कुछ ऐसा नहीं कहा। जो यूपीए-लेफ्ट की राजनीति में फर्क पड़े। मनमोहन ने भी वही पुरानी बात दोहराई। प्रकाश करात ने भी वही पुराना जवाब दोहरा दिया। अब कुछ लोगों की निगाह तीन जुलाई की यूएनपीए मीटिंग पर। पर अपनी निगाह मनमोहन के जी-8 के लिए टोक्यो दौरे पर। यों जी-8 का एटमी करार से कोई सीधा संबंध नहीं। पर कहीं जी-8 का दौरा सरकार का राम-नाम-सत्य न कर दे। सरकार के राम-नाम-सत्य होने की बात चली। तो आज बात जम्मू कश्मीर की।

अब कांग्रेस ने लेफ्ट को दिखाया बीजेपी का हौवा

Publsihed: 28.Jun.2008, 06:04

यों तो सोनिया गांधी चुनावी तैयारियों में जुट गईं। कांग्रेसी मुख्यमंत्रियों से फीडबैक ले चुकी। आज महासचिवों की मीटिंग। मिड टर्म के नफे-नुकसान का जायजा होगा। शुक्रवार को कांग्रेस-लेफ्ट की म्यानों से तलवारें निकल आई। सीपीएम के मुखपत्र पीपुल्स डेमोक्रेसी में प्रकाश करात ने लिखा- 'मनमोहन अमेरिकी इशारे पर काम कर रहे हैं। बुश सितंबर 2007 में ही एनएसजी को ड्राफ्ट दे चुके। एनएसजी देशों से बातचीत शुरू हो चुकी। बुश चाहते हैं- रिटायरमेंट से पहले एनएसजी से छूट दिला जाएं। इसीलिए मनमोहन चाहते हैं- आईएईए से सेफगार्ड तय हो जाएं। जैसे ही सेफगार्ड तय होंगे। बुश एनएसजी को एटमी ईंधन सप्लाई में छूट की अर्जी भेज देंगे।'

लोकसभा की मियाद दो महीने खिंचने की कवायद

Publsihed: 26.Jun.2008, 22:46

अपन को लगता था- जून में गिरेगी सरकार। महंगाई ने फन न फैलाए होते। तो चौदहवीं लोकसभा का राम-नाम-सत्य इसी महीने होता। जून तय करने की अपने पास वजह थी। आईएईए चीफ अल बरदई जुलाई के आखिर में रिटायर होंगे। आईएईए से सेफगार्ड के लिए बरदई सबसे मुफीद। सो मनमोहन चाहते हैं- बरदई के रहते सेफगार्ड तय हो जाएं। यों तो आईएईए की जनरल बॉडी मीटिंग 29 सितंबर से चार अक्टूबर तक। तभी बोर्ड ऑफ गवर्नर की मीटिंग भी होगी। ताकि सनद रहे। सो अपन बता दें। अपन बाकी 143 देशों की तरह आईएईए की जनरल बॉडी के मेंबर। पर अपन 35 सदस्यीय बोर्ड ऑफ गवर्नर के मेंबर नहीं।

झुनझुना दिखा विकास का जेब काट ली सरकार ने

Publsihed: 20.Jun.2008, 20:39

सोनिया अब मंदिरों में घंटियां बजाने लगी। शिरडी के साईं बाबा से निपटी। तो उज्जैन में भोले भंडारी के दरबार में पहुंची। महाकालेश्वर को सोने का छत्र चढ़ाने की मन्नत मानी। बंगाल के लेफ्टिए भले ही दुर्गा पूजा में धोती पहनकर आरती करें। पर केरल के लेफ्टिए मोटे तौर पर नास्तिक। सो प्रकाश करात घंटियां बजाने से चिढ़ न गए हों। अपन को तो यही खतरा। सोनिया ने किसलिए पूजा की। किसलिए मन्नत मानी। राजनीतिक गलियारों में चुटकलेबाजी चलती रही। पर बुधवार को आंखें दिखाने वाले करात शुक्रवार को नरम दिखे। बोले- 'हम चाहते हैं, सरकार अपना वक्त पूरा करे।'

चुनावी अटकलों में मां मंदिर में, बेटा लंदन में

Publsihed: 19.Jun.2008, 20:39

मेल-मुलाकातें तो ऐसे शुरू हो गई। जैसे चुनाव आए कि आए। लेफ्ट ने अपना एजेंडा साफ कर दिया। अमेरिका से एटमी करार नहीं होने देंगे। प्रकाश करात-एबी वर्धन दिल्ली छोड़ गए। करात अपनी जन्मभूमि केरल गए। वर्धन रायपुर। लेफ्ट की दिल्ली सीताराम येचुरी के हवाले रही। येचुरी की बात चली। तो अपन को याद आया। बजट सत्र के वक्त अपन ने पूछा। तो आन रिकार्ड बोले थे- 'आईएईए से सेफगार्ड करार का ड्राफ्ट नहीं मांगेंगे। मांगना भी नहीं चाहिए। सरकार देगी भी नहीं, देना भी नहीं चाहिए।' पर अब ड्राफ्ट की मांग पर टकराव की खबर।

आई एटमी करार के आर-पार की घड़ी

Publsihed: 19.Jun.2008, 04:51

अपन बिना लाग-लपेट फिर से बता दें। अपन ऐसे एटमी करार के कतई हिमायती नहीं। जो अपन को एटमी ताकत बनने से रोके। मनमोहन की दिलचस्पी अपन को एटमी ताकत बनाए रखने की नहीं। अलबत्ता अमेरिका से एटमी ईंधन करार की। अपने हाथ भले बंध जाएं। पर अमेरिका के न्यूक्लियर रिएक्टर बिकने चाहिए। अमेरिका का एटमी ईंधन आना चाहिए। फिर भले ही चोर दरवाजे से एनपीटी अपन पर लागू हो जाए। इंदिरा-वाजपेयी ने दुनिया का मुकाबला किया। तब जाकर अपन को एटमी ताकत बनाया।

तो रूस का पूरा दबाव डाल दिया लेफ्ट पर

Publsihed: 17.Jun.2008, 20:39

अपन को जून पहले से फैसलाकुन लगता था। जो अपन गाहे-ब-गाहे लिखते रहे। जून में आईएईए से करार न हुआ। तो अमेरिकी कांग्रेस की मियाद भी खत्म। बुश के रहते तो एटमी करार की भैंस गई पानी में। सो मनमोहन सिंह की धुकधुकी बढ़ गई। सरकार हो या कांग्रेस। मुसीबत की घड़ी आए। तो कुंडी खटकती है प्रणव दा की। महिला आरक्षण पर मुश्किल में फंसे। तो प्रणव दा हल निकालें। एटमी करार की घुंडी फंसे। तो प्रणव दा घुंडी निकालें। अपन एटमी करार पर तो बात करेंगे ही। पहले महिला आरक्षण की बात।