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Exclusive Articles written by Ajay Setia

सीपीएम की बेस्ट बेकरी नंदीग्राम

Publsihed: 13.Nov.2007, 06:38

अपन को नहीं लगता सोनिया नंदीग्राम जाएंगी। चली गईं, तो कल की जाती आज जाएगी यूपीए सरकार। पता नहीं दासमुंशी और सिंघवी किस भुलावे में। दोनों ने सोमवार को उम्मीद बांधी- 'नंदीग्राम जा सकती हैं सोनिया।' नंदीग्राम सीपीएम की प्रयोगशाला। जहां एक साल से लोकतंत्र की धुनाई जारी। जो लोकतंत्र की हिमायत में बोले। सीपीएम उसका मुंह काला करने को उतारु। फिर भले वह गवर्नर ही क्यों न हो। गवर्नर गोपाल गांधी ने नंदीग्राम में हरकतों पर नाराजगी जताई। तो करात-वर्धन ने पीएम से शिकायत की। पीएम तो पूरी तरह लाचार।

दीवाली की राम-राम

Publsihed: 08.Nov.2007, 20:45

आज दीवाली। गुरुवार को लाल कृष्ण आडवाणी का जन्मदिन था। सो बीजेपी में एक दिन पहले ही दीवाली मन गई। अपनी वसुंधरा समेत बीजेपी के सारे सीएम बधाई देने पहुंचे। नरेंद्र मोदी ही नहीं आए। तो खटका। सीएम-इन-वेटिंग येदुरप्पा भी दिखाई दिए। पर बात दीवाली की। वह भी जमाना था। जब घी के दीए जलते। आतिशबाजी से सुगंध निकलती। लक्ष्मी की पूजा होती। मिठाईयां बंटती। चारों तरफ खुशी ही खुशी। गांधी ने ऐसे ही रामराज की कल्पना की थी।

साथ-साथ नहीं, तो आस-पास होंगे चुनाव

Publsihed: 08.Nov.2007, 06:46

भारत-पाक दोनों ही विदेशी दबाव में। दोनों पर दबाव अमेरिका का। मुशर्रफ पर दबाव बेनजीर के साथ सत्ता बांटने का। मनमोहन पर दबाव एटमी करार सिरे चढ़ाने का। अमेरिका दोनों देशों की राजनीति में दखल देने लगा। पाकिस्तान में दखल का नतीजा अपने सामने। मुशर्रफ पूरी तरह तानाशाह हो गए। आवाम में मुशर्रफ की हालत अब बिल्कुल वैसी। जैसी 1976-77 में अपने यहां इंदिरा गांधी की थी।

बेंगलुरु हो या इस्लामाबाद सवाल तो डेमोके्रसी का

Publsihed: 07.Nov.2007, 07:49

चलो, पाकिस्तान से कर्नाटक चलें। पर चलने से पहले थोड़ी सी बात पाकिस्तान की। चौथे दिन भी इमरजेंसी का विरोध जारी रहा। गिरफ्तारियां और सरकारी कहर भी जारी रहा। भारत में इमरजेंसी के समय जो भूमिका जेपी की थी। हू-ब-हू वही पाक में बर्खास्त चीफ जस्टिस इफ्तिखार मोहम्मद चौधरी की। मंगलवार को उनने आवाम से विरोध की अपील की। देशभर के वकील पहले ही सड़कों पर। जहां तक राजनीतिक नेताओं की बात। तो इमरान खान, आसमां जहांगीर, जावेद हाशमी, एतजाज हसन या तो जेलों में या घरों में बंदी। बेनजीर भुट्टो का रुख शक के घेरे में। अमेरिकी राष्ट्रपति बुश का भी।

मुशर्रफ-बुश-बेनजीर खिचड़ी कितने दिन?

Publsihed: 06.Nov.2007, 08:58

पाक में अपना एक यार है अब्दुल कय्यूम। मुशर्रफ ने इमरजेंसी लगाई। तो अपन ने अल्ला बख्श का शे'र  एसएमएस किया- 'पाकिस्तान दियां मौजां ही मौजां, जिधर देखो फौजां ही फौजां।' दो दिन जवाब नहीं आया। तो अपना माथा ठनका। एसएमएस ने कय्यूम को मुसीबत में तो नहीं डाल दिया। पर नहीं, सोमवार को जवाब आया। तो अपन को दोस्त का दर्द महसूस हुआ। अब्दुल कय्यूम का जवाब है- 'तंज (फब्ती) कर रहे हैं आप भी। प्रतिद्वंदी मेरे देश की यह हालत देख खुश हैं। क्या आप भी?' महसूस हुआ, जैसे अपन ने जख्म कुरेद दिए। अपन ने इमरजेंसी का स्वाद सिर्फ एक बार चखा।

पाकिस्तान में मौजां ही मौजां जिधर देखो फौजा ही फौजा

Publsihed: 03.Nov.2007, 20:35

परवेज मुशर्रफ ने अपना रंग दिखा ही दिया। जब देखा- सुप्रीम कोर्ट राष्ट्रपति की उम्मीदवारी ही नाजायज ठहरा देगी। तो इमरजेंसी लगाकर चीफ जस्टिस को गिरफ्तार कर लिया। चीफ जस्टिस इफ्तिकार मोहम्मद चौधरी ही थे। जिनने परवेज मुशर्रफ की नाक में दम किया। पर चौधरी ऐसा कर पाए। इसकी वजह जनता का मुशर्रफ के खिलाफ खड़ा होना था। अगले हफ्ते पाकिस्तान की नेशनल एसेंबली की मियाद पूरी होगी। परवेज मुशर्रफ का राष्ट्रपति वक्फा उसके बाद पूरा होता। पर अगली एसेंबली दुबारा चुनने लायक आए या नहीं। क्या भरोसा।

देवगौड़ा की शर्तों से अटका न्यौता

Publsihed: 03.Nov.2007, 10:36

चेन्नई में वेंकैया नायडू कह रहे थे- 'येदुरप्पा को न्यौता नहीं मिला। तो 129 एमएलए लेकर दिल्ली जाएंगे।' पर यह गीदड़-भभकी के सिवा कुछ नहीं। देवगौड़ा की नई चिट्ठी ने गठबंधन में ही आग लगा दी। जेडीएस के एमएलए दिल्ली तो तब पहुचेंगे। जब देवगौड़ा की हरी झंडी होगी। यूपीए-लेफ्ट में वन-टू-थ्री पर छीना-झपटी। जेडीएस-बीजेपी में वन-टू-नाइन पर। देवगौड़ा ने तो शर्तों का पुलिंदा सामने रख दिया। अपन ने कल सही लिखा था- 'बीजेपी माने तो मरी, न माने तो मरी।'

देवगौड़ा की टेढ़ी चाल से बीजेपी हुई बेहाल

Publsihed: 01.Nov.2007, 21:51

देवगौड़ा की टेढ़ी चालों का पता था। फिर भी बीजेपी चाल में फंस गई। तीस अक्टूबर को अपन से एक गलती हुई। असल में देवगौड़ा ने अपनी पहली वाली चिट्ठी वापस नहीं ली। बीजेपी को तभी समझ लेना चाहिए था। देवगौड़ा का मन साफ होता। तो विधानसभा भंग करने की सिफारिश वाली चिट्ठी वापस लेते। नई चिट्ठी लिखते। पर देवगौड़ा ने नई चिट्ठी गवर्नर की बजाए राजनाथ को लिखी। जिसमें ऐसी-ऐसी नई शर्तें। जिन्हें बीजेपी माने, तो मरी। न माने, तो मरी। वैसे तो स्कूल में बच्चों को भी सिखाया जाता है- 'लालच बुरी बला।'

'पॉजिटिव रिस्पांस' लेकर लौटे येदुरप्पा

Publsihed: 01.Nov.2007, 06:11

येदुरप्पा अगली बार सीएम बनकर दिल्ली आएं। सो फिर हो न हो। अपन को लगा अभी मिल लिया जाए। पर येदुरप्पा के पास वक्त कहां था। दौड़ते हुए दिल्ली आए। भागते हुए बेंगलुरु लौट गए। पर पीएम से मुलाकात के बाद वेंकैया के घर पहुंचे। तो अपना मिलना तय हो गया। पीएम से मुलाकात में अच्छी खबर थी। सो खुशनुमा मूड में शॉपिंग का प्रोग्राम बना। औरंगजेब रोड से हवाई अड्डे के रास्ते में भागते-दौड़ते शॉपिंग हुई। इसी बीच एक दुकान पर येदुरप्पा से अपनी मुलाकात। खुशनुमा मूड ने अंदर की बात पूछने का मौका ही नहीं दिया। पर अपन ने फारमेल्टी के लिए पूछा- 'पीएम से कैसा संकेत मिला?'

गवर्नर की गुहार पर आज तो टला टकराव

Publsihed: 31.Oct.2007, 09:30

अपने रामेश्वर ठाकुर बेहद मुश्किल में। एसेंबली भंग करने का कांग्रेसी दबाव मानें। या डेमोक्रेसी का ख्याल रखें। डेमोक्रेसी के लिहाज से सोचें। तो येदुरप्पा के पास बहुमत से सोलह एमएलए ज्यादा। एसेंबली भंग हो गई होती। तो यह टंटा ही खड़ा नहीं होता। सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे ही हालात के लिए फैसला दिया- 'सरकार बनाने की गुंजाइश रहे। सो पहले सस्पेंड की जाए।' इसी नजरिए से गवर्नर ने दिल्ली में कहा था- 'कोई गठबंधन सामने आए। तो सरकार बनने की गुंजाइश बरकरार।'