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Exclusive Articles written by Ajay Setia

आग बुझ नहीं रही, ऊपर से बर्ड फ्ल्यू की आफत

Publsihed: 16.Jan.2008, 03:08

अपने बंगाल में 30 साल से कम्युनिस्ट सरकार। इतना लंबा अर्सा स्थाई शासन मिल जाए। पर एक मार्केट की आग न बुझा सके। तो समझ लो- तीस साल क्या किया धरा होगा। बंगाल में उद्योगों का बंटाधार तो हुआ ही। गरीबी की हालत देखने लायक। पिछड़ेपन का ठीकरा अपन किसी और के सिर नहीं फोड़ सकते। सिर्फ नेता ही जिम्मेदार। फिर भी नेता नक चढ़े। बंगाल के फायर ब्रिगेड मंत्री प्रतिम चटर्जी का रवैया देखो। सोमवार को अपने राजस्थानी सांसद सुभाष महेरिया कोलकाता गए। साथ में दो मंत्री कालीचरन सर्राफ और खेमा राम मेघवाल भी थे। अपनी वसुंधरा राजे ने हालात जानने भेजा। पर नक चढ़े प्रतिम चटर्जी मिलने तक को राजी नहीं हुए। बोले- 'पहले से मुलाकात का वक्त क्यों नहीं मांगा।'

एटमी ईंधन को चीन भी राजी, अब लेफ्ट लाचार

Publsihed: 14.Jan.2008, 20:37

अपने गोपालस्वामी ने तीन राज्यों में चुनावी बिगुल बजा दिया। त्रिपुरा, मेघालय और नगालैंड। तीनों एसेंबलियों की मियाद मार्च में खत्म। पर कर्नाटक में चुनावी बिगुल नहीं बजा। अपने नरेंद्र मोदी सोमवार को पहुंचे तो चेन्नई। पर बात बेंगलुरु की बोले। कहा- 'बीजेपी लोकसभा चुनाव जीतने का श्रीगणेश दक्षिण से करे।' चेन्नई में बीजेपी वर्करों ने मोदी से जीत का मंत्र पूछा। तो वह बोले- 'महिलाओं की अहम भूमिका रही।' सो मोदी तमिलनाडु की बीजेपी को जीत का मंत्र दे आए।

एटमी करार के दो फैसलाकुन महीने

Publsihed: 12.Jan.2008, 20:39

अपन ने बारह अक्टूबर को लिखा था- 'तो रूस से एटमी करार तोड़ेगा लेफ्ट से गतिरोध। ' हू-ब-हू वही हुआ। मनमोहन सिंह रूस गए। लौटे भी नहीं थे। लेफ्ट ने आईएईए से बात की हरी झंडी दे दी। यह अलग बात। जो रूस से एटमी करार नहीं हुआ। जिस पर लेफ्ट लाल-पीला भी हुआ। तब प्रणव दा ने सफाई दी थी- 'जब तक आईएईए के सेफगार्ड तय न हों। जब तक एनएसजी की हरी झंडी न हो। तब तक किसी से करार का कोई फायदा नहीं।' पर अपन ने बारह अक्टूबर को यह भी लिखा था- 'आईएईए-एनएसजी समझौते तीन महीने ठंडे बस्ते में पड़ेंगे।' सो तीन महीने कुछ नहीं हुआ।

आईएईए से बात का पीएम के चीन दौरे से सीधा रिश्ता

Publsihed: 11.Jan.2008, 20:35

मनमोहन सिंह आज रात चीन उड़ेंगे। नेहरू हों या वाजपेयी। सवाल चीन का हो। तो दोनों गलतियों के पुतले। नेहरू ने भारत-चीन भाई-भाई का डंका पीट धोखा खाया। अपनी 90 हजार वर्ग किमी जमीन अब भी चीन के कब्जे में। वह 21 नवंबर 1962 किसे भूलेगा। जब चीन ने बीस किमी घुसकर एकतरफा सीजफायर किया। जमीन वापस लेने के अपने संसदीय प्रस्ताव पर धूल जम चुकी। प्रस्ताव तो पाक के कब्जे वाले कश्मीर को लेने का भी। पर किसी पीएम की हिम्मत नहीं। कारगिल के वक्त भी जब अपना हाथ ऊपर था। तो वाजपेयी की हिम्मत नहीं हुई। आगे बढ़ रही फौजें मढ़ी तक पहुंच जाती। तो वाजपेयी भारत रत्न हो जाते।

तो सोनिया के लिए बेल्लारी के रास्ते बंद

Publsihed: 10.Jan.2008, 20:40

ऑटो एक्सपो में लखटकिया कार दिखाने रतन टाटा खुद आए। तो बोले- 'कार के नाम की बात चली। तो सुझाव आया- बुध्दू रखा जाए।' यों बुध्ददेव भट्टाचार्य सिंगूर मामले में बुध्दू तो साबित नहीं हुए। पता नहीं यह सुझाव क्यों आया? टाटा ने भले सुझाव नहीं माने। पर चुटकी तो कर ही गए। उनने कहा- ''दूसरा सुझाव 'ममता' नाम का था। आखिर ममता के बावजूद कार आएगी।'' पर वह बुध्ददेव-ममता के चक्कर में नहीं फंसे। कार का नाम 'नैनो' रखा। सत्तर के दशक में संजय गांधी ने छोटी कार बनाई। तो नाम 'मारुति' रखा। कार आने में बहुत वक्त लगा। तब चुटकीबाज वाजपेयी कहा करते थे- 'यह मारुति नहीं, बेटे के लिए मां-रोती है।'

आडवाणी के धोबीपाट से कांग्रेस की बोलती बंद

Publsihed: 09.Jan.2008, 20:40

यों तो 'भारतरत्न' पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। पर यूपीए सरकार अटल बिहारी वाजपेयी को देगी नहीं। सर्वोच्च सम्मान का इतिहास इस बात का गवाह। नेहरू-इंदिरा-राजीव तीनों लिस्ट में शामिल। पर कांग्रेस को डॉ. अम्बेडकर-सरदार पटेल याद नहीं आए। अम्बेडकर को भारतरत्न दिया वीपी सरकार ने। सरदार पटेल को चंद्रशेखर ने। इंदिरा ने मदर टरेसा को भारतरत्न दिया। पर जब वाजेपयी ने वीर सावरकर की सिफारिश की। तो सोनिया ने वीएन नारायणन से फाइल रुकवा दी। सावरकर की बात चली। तो बता दें- दिल्ली में जब पहली वीर सावरकर कमेटी बनी। तो वसंत साठे अध्यक्ष थे, वीएन गाडगिल महासचिव। पर जैसे-जैसे कांग्रेस अल्पसंख्यकवाद की ओर बढ़ी। वैसे-वैसे सावरकर राष्ट्रविरोधी लगने लगे।

माथुर-मोदी की रणनीति का जादू सर चढ़ बोला

Publsihed: 08.Jan.2008, 20:40

अपन ने कल क्रिकेट पर कलम घिसाई। अंपायरों की टुच्चई बताई। अंपायरों के खिलाफ बीसीसीआई ने आंखें दिखाई। तो आईसीसी के होश फाख्ता हो गए। बकनर को पर्थ टेस्ट की अंपायरी से हटाना पड़ा। मार्क बेनसन को अंपायरी करनी ही नहीं थी। जहां तक भज्जी की बात। तो अपील पर आयोग बन गया। जब तक रपट नहीं आती। अपने भज्जी खेलेंगे। देखा, आंख दिखाने का असर। तभी तो अपने नवजोत सिद्दू ने बीसीसीआई की तारीफ की। वरना सिद्दू और बीसीसीआई की तारीफ कर दें। क्रिकेट का विवाद फिलहाल थमा। तो अपन अपनी पर लौट आएं। तो आज बात बीजेपी की। अपने ओम माथुर की ताजपोशी शानदार ढंग से हुई। अहमदाबाद में मोदी के विजयरथ पर पीछे खड़े थे।

असली रंगभेदी तो हैं अंपायर

Publsihed: 07.Jan.2008, 20:40

अपन को क्रिकेट का कोई बुखार नहीं। सो अपन क्रिकेट के पंडित भी नहीं। पर इतने भी घसियारे नहीं। जो स्टीव बकनर और मार्क बेनसन की टुच्चई न समझ सकें। अंपायरों की टुच्चई पर बाद में चर्चा करेंगे। पहले अपने हरभजन सिंह भज्जी की बात। भज्जी ने नस्लभेदी टिप्पणीं की या नहीं। अपन नहीं जानते। पर आईसीसी का फैसला जरूर नस्लभेदी। अपने होठों को सफेद रंगने वाले साइमंड ने कहा- 'भज्जी ने मुझे मंकी कहा।' अंपायर कह रहे थे- उनने कुछ नहीं सुना। पर आईसीसी ने अपने भज्जी को तीन मैचों में सस्पेंड कर दिया। रंगभेदी कौन? अपने भज्जी या आईसीसी। अपन को नहीं लगता- भज्जी ने गुस्से में अंग्रेजी बोली होगी।

मोदी विरोधी फिर कोर्ट की शरण में

Publsihed: 04.Jan.2008, 20:40

गुजरात की हार पर कांग्रेस में मुर्दनी। सोनिया गांधी चौथे दिन भी अस्पताल में। गंगाराम अस्पताल में भर्ती की बात समझ नहीं आई। मामला इतना गंभीर था। तो ऑल इंडिया मेडिकल इंस्टीटयूट क्यों नहीं ले जाई गई। बताया तो गया था सिर्फ चेस्ट इंफेक्शन। पर अपन दिल्ली की सर्दी से वाकिफ। दमे के मरीजों के लिए यह सर्दी जानलेवा। सो अपन ही नहीं। ज्यादातर लोगों का मानना था- दमे का दौरा। अपन को पहले से पता था- सोनिया दमे की मरीज। बात चली है तो बताते जाएं। नेताओं में जयललिता भी दमे की मरीज। करुणानिधि भी। और येरा नायडू भी। पर शुक्रवार को गंगाराम अस्पताल ने कहा- 'सांस की नली में सूजन जैसी कोई बात नहीं।' यानी दमे का गंभीर मामला तो नहीं। चेस्ट इंस्फेक्शन की मामूली बात, और चार दिन।

यूपीए को लेने होंगे आम आदमी के हक में फैसले

Publsihed: 03.Jan.2008, 20:35

सरकार पर चुनावी झटके का असर दिखने लगा। पर कांग्रेस अपनी जहनियत बदलने को तैयार नहीं दिखती। अपन ने 19 दिसम्बर को लिखा था- 'नगालैंड में कांग्रेसी छेड़छाड़ की तैयारी' उसमें अपन ने लिखा- 'गुजरात-हिमाचल में लोकतंत्र का कार्यक्रम निपट चुका। अब नगालैंड में लोकतंत्र के क्रियाक्रम की तैयारी।' देर भले ही लगी, पर हुआ वही। मंगलवार को इसी काम के लिए कैबिनेट हुई। मनमोहन सिंह ने वही किया। जिसका हुक्म दस जनपथ से आया। आखिर विधानसभा भंग कर राष्ट्रपति राज की सिफारिश हो गई। अपनी राष्ट्रपति दिल्ली से बाहर थी। सो देर लगी। गुरुवार को वह काम भी हो गया। रबड़- स्टैंप लग गई।