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Exclusive Articles written by Ajay Setia

मुंबई के बाद हो गया पुणे, बात से फिर भी नहीं परहेज

Publsihed: 16.Feb.2010, 10:11

बारह फरवरी को अपन ने लिखा था- 'अमेरिकी दबाव में बात, पर आतंकियों का घर है पाक।' इसी में अपन ने खुलासा किया था- 'कुरैशी ने होलबु्रक को भारत में मुंबई नहीं दोहराने की गारंटी नहीं दी।' और तेरह फरवरी को पुणे में मुंबई दोहराया गया। कौन हैं कुरैशी। कौन हैं होलबु्रक। पाक के विदेशमंत्री हैं शाह महमूद कुरैशी। अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा के दक्षिण एशिया दूत हैं होलबु्रक। भले ही एसएम कृष्णा इंकार करें। या चिदंबरम और एंटनी। पर अपन को शक। बातचीत का न्योता होलबु्रक के हाथ ही गया था। अठारह-उन्नीस जनवरी को होलबु्रक दिल्ली में थे। बीस-इक्कीस को इस्लामाबाद में। चार फरवरी को न्योता भेजे जाने का खुलासा हुआ। तो कहा गया था- 'न्योता पंद्रह दिन पहले भेजा गया था।' अब हाथ कंगन को आरसी क्या, पढ़े-लिखे को फारसी क्या। कुरैशी ने वादा नहीं किया। अपन ने फिर भी न्योता वापस नहीं लिया।

तेलंगाना में आग भड़की तो कबूतर ने आंखें मूंद ली

Publsihed: 13.Feb.2010, 08:04

तेलंगाना पर आयोग बनाकर आग बुझाई थी। आयोग की शर्तों ने आग फिर भड़का दी। नौ दिसंबर कांग्रेस के जी का जंजाल बन गया। उस दिन सोनिया का जन्म दिन था। तेलंगाना के कांग्रेसी नेता बधाई देने पहुंचे। तो तेलंगाना का रिटर्न गिफ्ट मांग लिया। सोनिया ने उसी दिन कोर कमेटी की धड़ाधड़ा मीटिंगे बुलाई। रात ग्यारह बजे तीसरी कोर कमेटी से निकले चिदंबरम ने कहा- 'सरकार तेलंगाना बनाने पर सहमत।' न सहयोगी दलों से पूछा। न केबिनेट से फैसला हुआ। नादिरशाही का जो नतीजा निकलना था। वही निकला। सोनिया ने सोचा था- तेलंगाना बनेगा। तो चंद्रबाबू और जगनरेड्डी कहीं के नहीं रहेंगे। दोनों सिर्फ चार जिलों वाले रायलसीमा के नेता रह जाएंगे। ग्यारह जिलों वाले तटीय आंध्र से कांग्रेस का नया नेतृत्व उभरेगा।

पवार की हरकतों पर कांग्रेस की तिरछी नजर

Publsihed: 11.Feb.2010, 06:09

देवीसिंह शेखावत के खिलाफ कोर्ट फैसले से कांग्रेस में हड़कंप। चौबीस अकबर रोड और दस जनपथ ने फौरी पड़ताल की। अभिषेक मनु सिंघवी को खबर नहीं थी। ब्रीफिंग खत्म हुई। तो उनने सवाल पूछने वाले से डिटेल पूछी। तभी एक मराठी मानुष खबरची ने कहा- 'जमीन घोटाले का मामला नया नहीं। अभी तो कई और घोटाले खुलेंगे।' सिंघवी ने साफ किया- 'राष्ट्रपति के परिवार को कानूनी कार्रवाई से छूट नहीं।' राष्ट्रपति भवन ने भी मुकदमे से नाता तोडा। कहा- 'किसी निजी व्यक्ति के मामले से राष्ट्रपति भवन का ताल्लुक नहीं।' अपन को राष्ट्रपति चुनाव में हुए आरोप-प्रत्यारोप नहीं भूले। कांग्रेस ने तब यह कहकर पीछा छुड़ाया था- 'उम्मीदवार पर तो कोई आरोप नहीं।' सवाल दागे गए। तो जवाब अब भी वही होगा।

तो कांग्रेस का आपरेशन आजमगढ़ शुरू होगा अब

Publsihed: 10.Feb.2010, 10:06

तो दिग्गी राजा ने कांग्रेसी प्रवक्ताओं की हवा खिसका दी। अपन भी हैरान थे। दस जनपथ के इशारे बिना तो आजमगढ़ नहीं गए होंगे दिग्गीराजा। वही सच निकला। दिग्गी राजा ने सोनिया को आजमगढ़ दौरे की रपट दी। तो कांग्रेसी प्रवक्ताओं की घिग्गी बंध गई। अभिषेक मनु सिंघवी, मनीष तिवारी, शकील अहमद को पता ही नहीं था। इसीलिए परेशानी का इजहार कर गए। प्रवक्ताओं को पता ही नहीं लगती- सोनिया-राहुल की रणनीति। खुद सोनिया गांधी और राहुल ने दिग्गी को सौंपा था आपरेशन आजमगढ़। जो दिग्गी राजा की रपट से पूरा नहीं हुआ। अलबत्ता आपरेशन तो अब शुरू होगा। सोनिया को सौंपी लिखित रपट दाखिल खारिज नहीं होगी। अलबत्ता रपट की एक-एक सिफारिश पर अमल होगा।

पवार की ठाकरे वंदना से राहुल ब्रिगेड भड़की

Publsihed: 09.Feb.2010, 05:45

राहुल बाबा ने उस दिन गलती से बिहार की जगह गुजरात कह दिया। तो बवाल खड़ा हो गया। बवाल से नरेन्द्र मोदी गदगद हुए। अब वरुण बाबा ने मंहगाई पर दोधारी तलवार चलाई। तो फिर विवादों में फंस गए। उनने कहा - 'केन्द्र में रावण, तो प्रदेश में सूर्पनखा।' दोनों बाबाओं का विवादों से पुराना रिश्ता। खैर सोमवार राहुल और वरुण का नहीं। आरक्षण और मुखपत्रों की जंग का रहा। जिनके अपने मुखपत्र नहीं। उनने ब्लागों से जंग-ए-एलान कर दिया। कई दिन अमर सिंह ब्लाग पर तीर चलाते रहे। अमर सिंह तो मुलायम के कुनबे पर तीर चला रहे थे। पर लालकृष्ण आडवाणी ने मनमोहन पर निशाना साधा है। अमर सिंह निकाल बाहर किए गए। मुलायम ने अमर सिंह की जगह दूसरा ठाकुर मोहन सिंह भिड़ा दिया। मोहन सिंह अब मनमोहन-माया पर उतना नहीं बरसते। जितना अमर सिंह पर। ऐसे लगता है- जैसे ठाकुरों की जंग शुरु हो गई हो।

कांग्रेस वर्किंग कमेटी पर दिखी राहुल की छाया

Publsihed: 06.Feb.2010, 06:15

कांग्रेस वर्किंग कमेटी की मीटिंग अर्से बाद हुई। महंगाई पर पिछली मीटिंग पंद्रह अगस्त के बाद उन्नीस अगस्त को हुई थी। अब छब्बीस जनवरी के बाद पांच फरवरी को। स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के बीच महंगाई और बढ़ गई। वर्किंग कमेटी के दो मेंबर घट गए। शिवराज पाटिल पंजाब के गवर्नर हो गए। उर्मिला सिंह हिमाचल की। गैर कांग्रेसी सरकारों पर नंबरदार बनाकर भेज दिए। अर्जुन सिंह और सीके जाफर शरीफ की सेहत ने इजाजत नहीं दी। या कोपभवन में बैठे हैं दोनों। अर्जुन बेटी को टिकट नहीं दिला पाए थे। तो जाफर शरीफ पोते के लिए भटक रहे थे। नारायणस्वामी तो कहीं अटक गए होंगे। पर राहुल गांधी नहीं आए। तो महाराष्ट्र और पांडिचेरी के मुख्यमंत्री कैसे आते। कांग्रेस के 'युवराज' महाराष्ट्र-पांडिचेरी के दौरे पर थे। सो दोनों 'जी हुजूरी' में लगे थे। जी हुजूरी का जलवा तो मुंबई में दिखा। जहां गृहराज्यमंत्री रमेश भागवे ने राहुल के जूते उठा लिए।

पाक में जेहाद के नारे, भारत में पाक से गुफ्तगू की तैयारी

Publsihed: 05.Feb.2010, 09:38

उधर न्यूयार्क से खबर आई- 'भारत के खिलाफ आतंकियों का इस्तेमाल कर रहा है पाक।' इधर दिल्ली की खबर है- 'भारत फिर से गुफ्तगू को तैयार।' शर्म-अल-शेख में गड़बड़झाले के बाद पीएम ने संसद में वादा किया था- 'बिना ठोस कार्रवाई का सबूत मिले बात नहीं होगी।' दो दिन पहले जब चिदंबरम-एंटनी ने एक साथ कहा- 'पाक ने आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है।' तो अपना माथा ठनका था। दोनों से बयान दिलाकर टैस्ट कर रही थी सरकार। विपक्ष ने कड़े तेवर नहीं दिखाए। तो बुधवार को एसएम कृष्णा ने जुबान खोल दी। कुवैत जा रहे कृष्णा रास्ते में खबरचियों से बोले- 'पाक कसाब के बयान को सबूत मानने को राजी हो गया है। यह संबंध सुधारने में सकारात्मक कदम है।'

बाल ठाकरे अब बिहार में बीजेपी की लुटिया डुबोएंगे

Publsihed: 04.Feb.2010, 09:36

बीजेपी 2004 का चुनाव हारी। तो प्रमोद महाजन निशाने पर थे। हर ऐरा-गैरा कहता था- 'प्रमोद के फाइव स्टार कल्चर ने पार्टी का बंटाधार किया।' अब समाजवादी अपने अमर सिंह पर भी वही आरोप लगा रहे। समाजवादी पार्टी से निकाले गए। तो अमर सिंह अब बेपेंदे के लौटे जैसे दिखने लगे। दिन में मायावती की तारीफ। रात में सोनिया गांधी की। कभी सोनिया को इटेलियन कहते नहीं थकते थे। अब बोले- 'मेरा डीएनए कांग्रेस विरोधी नहीं।' अब उन्हें कांग्रेस मुलायम से बेहतर लगने लगी। पर अपन बात कर रहे थे फाइव स्टार कल्चर की। यों तो प्रमोद भी उसी साल मुंबई वर्किंग कमेटी में सादगी दिखा गए थे। पर जबसे नितिन गड़करी आए हैं। तब से सादगी का ढोल ज्यादा ही पीटा जाने लगा। पहले गड़करी के लिए फूल और बुक्के लाने पर रोक लगी। अब इंदौर अधिवेशन में तंबुओं में आवास। और दाल-रोटी, एक-आध सब्जी का प्रचार। प्रमोद ने रसगुल्लों, आइसक्रीम, जलेबियों की जगह गुड रखवा दिया था। इंदौर वाले मीठे में भी कुछ ऐसा ही परोसेंगे। यों यह खाने-पीने की ठाठ वाले इंदौर की परंपरा नहीं।

महंगाई के मोल-तोल में सरकार एक कदम आगे, दो कदम पीछे

Publsihed: 30.Jan.2010, 06:36

महंगाई पर केबिनेट कमेटी हुई। तो शरद पवार ने दावा ठोका था- 'अब महंगाई घटनी शुरू हो जाएगी। कम से कम चीनी के दाम जल्द घटेंगे।' प्रेस कांफ्रेंस का ऐलान छपा। अखबारों की स्याही सूखी नहीं थी। खुद पवार ने दूध की किल्लत का रोना रो दिया। बात पवार की चल ही रही। तो बताते जाएं- शरद पवार का मंत्रालय ही परस्पर विरोधी। उनका मंत्रालय है- कृषि एवं खाद्य आपूर्ति। एक तरफ उनका काम फसलों और किसानों का हित देखना। देश को अनाज सही समय पर मिलता रहे। इसकी निगरानी करना। दूसरी तरफ आम आदमी को वाजिब कीमत पर खाद्य आपूर्ति करना। अब अगर वह किसानों के हितों की रक्षा करें। तो किसानों को वाजिब कीमत दिलाने की जद्दोजहद करेंगे। किसानों की चीजों के दाम बढ़ेंगे। तो उसका असर बाजार पर होगा ही। यानी आम आदमी को अनाज महंगा मिलेगा ही। सो हुआ ना परस्पर विरोधी मंत्रालय। किसके हितों की रक्षा करें? किसानों की या उपभोक्ताओं की।

कंगारूओं की करतूतों से भरा सब्र का प्याला

Publsihed: 29.Jan.2010, 06:31

आस्ट्रेलिया में हमले थम नहीं रहे। गुरुवार को फिर ताजा खबर आ गई। एक ही दिन में तीन हमले। तीन टैक्सी ड्राईवर निशाने पर थे। चौथा पिज्जा डिलिवरी करता था। अपन खुद ही हमलों की छानबीन कर लें। पिछले एक साल में जितने हमले हुए। सभी छोटे-मोटे करिंदों पर थे। या फिर उन भारतीय छात्रों पर। जो पढ़ाई के साथ काम भी करते थे। किसी रेस्टोरेंट, होटल, पेट्रोलपंप या डिपार्टमेंटल स्टोर पर। अपन ने पहली नजर में रंगभेदी हमले माने। गोरों को गेहुंआ रंग पसंद नहीं आता। शायद 'बिग ब्रदर' में शिल्पा शेट्टी से हुआ दुर्व्यवहार का असर होगा। सो अपन उसी लाईन पर सोचते रहे। सोचो, जेड गुड्डी हमलावर क्यों थी। शिल्पा को सबसे ज्यादा परेशान तो उसी ने किया। तो अपन सहज ही नतीजे पर पहुंचेंगे।