Guest Column

रईस,काबिल एवं जॉली गठजोड़ चल रहा है मन्दसौर में

Publsihed: 18.Feb.2017, 14:45

राघवेन्द्रसिंह तोमर

मन्दसौर - अक्षय कुमार,ऋतिक रोशन एवं शाहरुख़ खान द्वारा अभिनय की गई फ़िल्में रईस, काबिल एवं जॉली एलएलबी 2 देखी तब मन ने महसूस किया कि इन तीनों फिल्मों जैसा माफिया, प्रसाशन एवं जनप्रतिनिधियों का गठजोड़ चल रहा है मन्दसौर संसदीय क्षेत्र में । यह सिर्फ मेरे विचार नहीं बल्कि इस क्षेत्र में रहने वाले एक एक आम आदमी और मतदाता के अंतर्मन में यह बात उठ रही है पर डर,ख़ौफ़ एवं हिचक के चलते मन की बात कोई जुबान तक नहीं ला पा रहा । 

मुस्लिमों की ‘माया’: बसपा सोशल इंजीनियरिंग

Publsihed: 23.Jan.2017, 07:10

देवेंद्र शुक्ल /  भारत के सभी २९ राज्यों में से उत्तर प्रदेश, आबादी के लिहाज से सर्वाधिक मुस्लिम जनसँख्या वाला राज्य है (लगभग २० फीसदी) । जम्मू कश्मीर, देश का एकमात्र ऐसा राज्य है जहाँ हिदुओं के मुकाबले मुस्लिम आबादी बहुसंख्यक है (६८ फीसदी) । राज्य की कुल आबादी में मुस्लिमों की जनसंख्या के घटते क्रम में लेने पर असम, पश्चिम बंगाल और  केरल के बाद उत्तर प्रदेश देश का चौथा ऐसा राज्य है जहाँ मुस्लिम आबादी पांचवे हिस्से के बराबर या उससे आधिक है। इस सन्दर्भ में यह बताना रोचक है कि उत्तर प्रदेश में कुल २० प्रतिशत से अधिक मुस्लिम आबादी वाले जिलों की संख्या

जातीय समीकरणो में सब पर भारी मायावती

Publsihed: 06.Jan.2017, 20:25

बसपा सुप्रीमो मायावती ने अपने तुरुप पत्ते खोल दिए हंै। इससे अमित शाह व अखिलेश यादव दोनों को भौचक होना चाहिए। इसलिए कि ये पत्ते दोनों की काट लिए हुए है। एक तरफ उन्होंने मुस्लिम वोटों को विकल्प दिया है तो दूसरी और ब्राह्मण व ऊंची जातियों को भी!

दिपावली के स्वदेशीवादी अब क्यों हो रहे पेटीएमवादी

Publsihed: 20.Dec.2016, 21:22

गिरीश मालवीय / एक बात तो आप सभी मानेंगे कि नोटबंदी से सबसे अधिक फायदा पेटीएम को ही पुहंचा है.......पेटीएम से रोजाना 70 लाख सौदे होने लगे हैं जिनका मूल्य करीब 120 करोड़ रपये तक पहुंच गया है,पेटीएम हर ट्रांसिक्शन मे मोटा कमीशन वसूल रही हैं......सौदों में आई भारी तेजी से कंपनी को अपने पांच अरब डॉलर मूल्य की सकल उत्पाद बिक्री (जीएमवी) लक्ष्य को तय समय से चार महीने पहले ही प्राप्त कर लिया है.........
पर पेटीएम कंपनी है क्या?.........

आलिम नहीं, जालिम हैं तीन तलाक के पैरोकार

Publsihed: 11.Dec.2016, 23:29

यूसुफ़ अंसारी / ‘तीन तलाक़’ यानि एक साथ ‘तीन तलाक़’ को लेकर करीब साल भर से देश भर में बहस गर्म है. मुस्लिम महिलाओं के कई संगठन इस परंपरा को खत्म करने के लिए जोरदार आंदोलन चला रहे हैं. कई मुस्लिम महिलाओं ने तीन तलाक के साथ ही खुला, हलाला और चार शादियों के मर्दों के तथाकतथित अधिकारों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे रखी है. पहले भी कई बार तीन तलाक का मामला सुप्रीम कोर्ट में आ चुका है. सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों का बेंच 2007 में भी तीन तलाक को गैर संविधानिक और कुरान के खिलाफ करार दे चुका है.

नोटबंदी के समर्थन पत्रकार ने महसूस की परेशानी

Publsihed: 03.Dec.2016, 11:23

शशि भूषण मैठाणी / मैं यह शपथ लेता हूँ कि मैं न भक्त हूँ न किसी का विरोधी :P 
पिछले दिनों में मैंने मोदी के फैसले की दिल खोल छप्पर फाड़ तारीफ़ की थी, और लिखा भी था , लेकिन अब पिछले तीन दिन से जब मुझे बच्चों की फीस व घर खर्चे के लिए पैसों की जरूरत पड़ी तो वाकही परेशानी को करीब से महसूस कर पा रहा हूँ । 

नोटबंदी की गोपनीयता पर सवाल उठाने वाले पत्रकार की सच्चाई

Publsihed: 26.Nov.2016, 16:06

एल.एन.शीतल/ दूरदर्शन के एक युवा अधपढे पत्रकार ने प्रधानमंत्री के खिलाफ प्रेस कान्फ्रेंस की और मोदी विरोधियो का लोकप्रिय हीरो बन गया. वह सोशल मीडिया पर भी मोदी विरोधियो की खूब वाहवाही लूट रहा है. हालांकि प्रेस क्लब में हुई उस की प्रेस कांफ्रेंस में जब उससे सवाल पूछे जा रहे थे, तो उस की घिग्घी बंधी हुई थी. सत्येन्द्र मुरली नाम के इस नए नए पत्रकार का आरोप है कि ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 8 नवंबर 2016 को ‘राष्ट्र के नाम संदेश’ लाइव नहीं था, बल्कि पूर्व रिकॉर्डेड और एडिट किया हुआ था.

परेशां तो भाजपा वाले भी कम नही हैं

Publsihed: 20.Nov.2016, 22:50

एल.एन.शीतल/ पीएम नरेन्द्र मोदी के नोट-बन्दी हमले से विपक्षी सियासतदानों को तो दस्त लगे हुए हैं ही, लेकिन उनसे ज़्यादा हवा ख़राब उन सत्ताधीश भाजपाइयों की है, जिन्होंने ‘माल’ बटोरा तो अन्धाधुन्ध रफ़्तार से, लेकिन उसे क़ायदे से हज़म करने का शऊर जिनमें नहीं था. इन बेशऊर पेटू भाजपाइयों की संख्या उन राज्यों में सबसे ज़्यादा है, जहाँ भाजपा सत्तासीन है, या फिर सत्ता में भागीदार है. इन राज्यों में कांग्रेसी तो एक लम्बे अरसे से बेदखल हैं. उन ‘बेचारों’ का ‘माल’ तो बेकारी काटते-काटते काफ़ी हद तक वैसे ही ठिकाने लग चुका है.

भक्त अब उन्हें भडुए कहें तो कैसा रहे

Publsihed: 20.Nov.2016, 08:40

लक्ष्मी नारायण शीतल मंजे हुए पत्रकार हैं. उन्होने दिग्विजय सिंह को निशाना बना कर एक लेख लिखा.जिस का शीर्षक दिया था 'सियासी तवाइफखाने के भडुए'. मुझे शुरू में इस शब्द पर कडा एतराज था.आज भी है. हमें संसदीय भाषा का इस्तेमाल करना चाहिए. लेकिन उन के उस लेख को खासी तारीफ मिली.इस से बात जाहिर हुई कि समाज अब क्या सोच रहा है. शीतल जी ने सियासी वर्ग के लिए भडुए शब्द का इस्तेमाल किया. लेकिन एक दूसरा वर्ग है जो सोशल मीडिया पर सरकार के समर्थकों को भक्त लिख रहा है.यह खुद को बुद्धिजीवी वर्ग कहलाता है और पिछली सरकार का समर्थक था.तब इन्हें भद्र लोगों ने कभी भक्त नहीं कहा.

पाटलीपुत्र का सपना लिए जन.एस.के.सिन्हा चले गए

Publsihed: 17.Nov.2016, 23:09

प्रवीण बागी/   पटना निवासी लेफ्टिनेंट जनरल एसके सिन्हा अब नहीं रहे। आज दिल्ली में उनका निधन हो गया। वे 92 वर्ष के थे। उन्होंने एक सार्थक और मूल्य आधारित जीवन जीया। वे युद्ध नीति और इतिहास के गहरे जानकर थे। उन्हें अपने जीवन में कई बार अन्याय का सामना करना पड़ा ,लेकिन उन्होंने कभी समझौता नहीं किया। वे 1943 में सेना में शामिल हुए थे। 1947 में कश्मीर पर कब्जे के लिए जब पाक कबाइलियों ने हमला किया था तो उसे रोकने के लिए भारतीय सेना की जो पहली टुकड़ी श्रीनगर पहुंची थी ,उसके लीडर एसके सिन्हा ही थे। आगे चलकर वे थल सेना के उप सेनाध्यक्ष बने। जेपी से संबंध