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विपक्ष राज्यसभा में गच्चा खा गया

Publsihed: 23.Sep.2020, 22:12

अजय सेतिया / संसदीय इतिहास में सब से छोटे मानसून सत्र का सत्रावसान हो गया | सत्र बुलाया तो 18 दिन के लिए गया था , लेकिन सिर्फ दस दिन में निपटाने का फैसला हो गया | सत्र छोटा रहा तो इस का यह मतलब नहीं कि कामकाज अधूरा रह गया | विपक्ष ने राज्यसभा में आख़िरी तीन दिन और लोकसभा में आख़िरी दो दिन बायकाट कर के सरकार का काम आसान ही किया | इन्हीं तीन दिनों में सर्वाधिक बिल पास हुए | सरकार ने 18 दिन का अपना काम 10 दिन में निपटा लिया | हालांकि यह अच्छी बात हुई कि टकराव से पहले 20 सितम्बर को ही जल्दी सत्रावसान की सहमती बन गई थी |

खालिद की गिरफ्तारी से मीडिया में बेचैनी क्यों

Publsihed: 22.Sep.2020, 21:05

अजय सेतिया /दिल्ली के वरिष्ठ पत्रकार राजीव शर्मा की जासूसी के आरोप में गिरफ्तारी से मीडिया कर्मी स्तब्ध है । राजीव कोई अनाम पत्रकार नहीं है , उन्होंने यूएनआई , ईनाडू , द ट्रिब्यून जैसे प्रतिष्ठित समाचार संस्थानों के साथ काम किया है । रक्षा मंत्रालय और विदेश मंत्रालय को कम से कम तीन दशक तक अपने मीडिया संस्थानों के लिए कवर किया । जब अजीत डोवल आईबी के प्रमुख थे , उस समय आईबी के गिने-चुने विशेषज्ञ पत्रकारों में से थे । उनकी अजीत डोवल तक से निकटता थी , रिटायरमेंट के बाद अजीत डोवल जब विवेकानंद फाउंडेशन से जुडे तो राजीव वहां फैलो और को-आरडिनेटर के नाते उनके साथ थे ,लेकिन विचारधारा के टकराव

लोकतंत्र का गला तो विपक्ष दबा रहा था

Publsihed: 21.Sep.2020, 18:34

अजय सेतिया / कृषि सम्बन्धी बिलों को ले कर घमासान अभी जारी है , हालांकि बिल दोनों सदनों में पास हो चुके हैं | बिल पास हो जाने के बाद सरकार के बचाव का मोर्चा रक्षामंत्री राजनाथ सिंह को सम्भालना पड़ा क्योंकि अनुभव , खासकर कृषि मंत्रालय क

माना कि किसानों के हित में हैं बिल

Publsihed: 19.Sep.2020, 15:40

अजय सेतिया / मेरे लेख "कांट्रेक्ट फार्मिंग कृषि आधारित उद्योगों की बर्बादी " पर अनेक लोगों ने प्रतिक्रिया दी है, जिन में किसान भी है और व्यापारी भी , पत्रकार भी हैं । प्रतिक्रिया में ज्यादातर लोगों ने कृषि क्षेत्र से जुड़े तीनों बिलों का समर्थन करते हुए इन्हें किसान के हित में बताया है । इस पोस्ट में मैं उन सब की राय रख रहा हूं । अंत में अपने अनुतरित सवालों को फिर से सामने रखूंगा ।