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संघ और भाजपा का कोर वर्कर खफा था युद्धविराम से

Publsihed: 18.Jun.2018, 23:40

अजय सेतिया / अपन ने शनिवार को लिखा था युद्धविराम का फैसला गलत था | आतंकवादियों ने युद्धविराम को माना ही नहीं था | पाकिस्तान ने भी युद्धविराम को नहीं माना | आतंकियों ने हिंसा और हत्

आतंकियों से युद्धविराम गलत फैसला था 

Publsihed: 15.Jun.2018, 21:04

अजय सेतिया / रमजान का महीना का खत्म हुआ | कायदे से अर्ध्सेनिक बलों का युद्धविराम शनिवार आधी रात से खत्म हो जाना चाहिए | इस के लिए सरकारी फरमान की भी कोई जरुरत नहीं | युद्धविराम सिर्फ रमजान महीने के लिए हुआ था | जिस का पाकिस्तान और उस के आतंकवादियों ने जम कर फायदा उठाया

अब होगा मोदी के रुतबे का इम्तिहान

Publsihed: 14.Jun.2018, 20:11

अजय सेतिया / संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार दफ्तर की तथाकथित “कश्मीर रिपोर्ट” ने भारत में बवाल खडा किया है | यह रिपोर्ट 14 जून 2018 को जारी हुई | कश्मीर पर यह पहली “रिपोर्ट” जारी हुई है | “रिपोर्ट” संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार आयुक्त जीद-राद-अल-हुसैन ने जारी की | अपन बात शुरू करने से पहले बता दें

नोटबंदी,नजरबंदी , युद्धबंदी सब नाकाम

Publsihed: 04.Jun.2018, 23:37

अजय सेतिया/ बाकी सब मुद्दे अपन छोड़ भी दें|नोटबंदी ,जीएसटी , बेरोजगारी, किसानों की समस्याओं जैसे आर्थिक मुद्दे अपन भूल भी जाएँ | तो भी कश्मीर की विफलता सब को खटक रही है | पाँचवाँ आखिरी साल शुरू हो गया | नरेंद्र मोदी ने आतंकियों की फंडिंग बंद करने के लिए नोटबंदी कर के भी देख ली | हूरियत के नेताओं की नजरबंदी कर के भी देख ली | रमजान के महीने में एक तरफा युद्धबंदी कर के भी देख ली | सर्जिकल स्ट्राईक कर के भी देख लिया | बिना न्योते पाकिस्तान जा कर भी देख लिया | पर न पाकिस्तान ने युद्धविराम माना | न उस के पालतू आतंकियों ने आतंकवाद छोड़ा | न कश्मीर के मुस्लिम युवाओं ने आतंकवादियों का साथ देना छोड़ा |

तीन विधानसभाएँ भंग करने की रणनीति

Publsihed: 02.Jun.2018, 23:53

अजय सेतिया/ लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव एक साथ करवाने का विचार नया नहीं है | लेकिन कांग्रेस और क्षेत्रीय दल इस से सहमत नहीं है | भाजपा को वाजपेयी के जमाने में भी यह लगता था कि एक साथ चुनाव से उन्हें राष्ट्र्व्यापी लाभ होगा , और मोदी के जमाने में भी यही लगता है | इस लिए वाजपेयी के जमाने की तरह इस बार भी एक साथ चुनाव करवाने की रणनीति पर कानूनी मत्थापच्ची हो रही है | वाजपेयी के जमाने में राजनीतिक दलों में आम सहमति के प्रयास किए गए थे, लेकिन मोदी के जमाने में संवैधानिक संस्थाओं के माध्यम से कानूनी पक्षों को मजबूत करने की तैयारी की जा रही है | कानूनी पक्षों की पूरी तैयारी के बाद राजनीतिक दलों

राज्यपाल के विवेकाधिकार की भी इतिश्री

Publsihed: 19.May.2018, 08:59

अजय सेतिया / यह तो तय था कि सुप्रीमकोर्ट राज्यपाल की ओर से येद्दुरप्पा को दिए गए न्योते के निर्णय को रद्द नहीं करेगी । जिस दिन ऐसा होने लगेगा ,उस दिन सुप्रीमकोर्ट संविधान से भी ऊपर हो जाएगी । राज्यपाल के निर्णयो की समीक्षा हो सकती है , उसे गलत या ठीक ठहराया जा सकता है , उस में बदलाव किया जा सकता है, लेकिन रद्द नहीं किया जा सकता । अत: सुप्रीमकोर्ट ने ब्रुहस्पतिवार को येद्दुरप्पा का शपथग्रहण होने दिया , लेकिन बहुमत साबित करने की समय सीमा 15 दिन से घटा कर आने वाले 30 घंटे कर दी । शपथग्रहण को 24 घंटे तो बीत ही चुके थे ।