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March 2011

आलोक तोमर का चला जाना

आलोक जी के साथ बहुत पुराना रिश्ता था, भले ही मैं चंडीगढ़ जनसत्ता में था, वह दिल्ली में थे. पर हमारी मुलाकात 1989 में मेरे जनसत्ता ज्वाइन करने से पहले की थी. मैने बाद में जनसत्ता ज्वाइन किया, पर छोडा आलोक तोमर से पहले. हम दोनो जब जनसत्ता छोड चुके थे तो अक्सर मुलाकातें हुआ करतीं थी. मैने अपने जीवन में आलोक तोमर जैसा धुरंधर लिखाड नही देखा. लेखनी पर जबरदस्त पकड थी. वैसे तो प्रभाष जोशी जी ने एक बखिया उधेडने वाले छांटे थे… इसीलिए स्लोगन भी था… सबकी खबर दे, सबकी खबर ले… पर किसी की बखिया उधेडनी हो, तो आलोक तोमर की शब्दावली उधार लेनी पडती थी. आलोक तोमर जैसा खबरची और शब्दों का खिलाडी न पहले कभी हुआ, न आगे कभी होगा. आलोक ने अपने जीवन में कई प्रयोग किए. बहुत कम लोग जानते होंगें… अमिताभ बच्चन के कौन बनेगा करोडपति प्रथम के सारे सवाल आलोक तोमर ने तैयार किए थे.