September 2009
भ्रष्टाचार में सिर्फ बाबू धरे जाएंगे, कोई क्वात्रोची नहीं
Wed, 30-Sep-2009संसद में घोटाला कबूल हो चुका। कबूल हो चुका- बोफोर्स तोपों की खरीद में दलाली हुई थी। पर कांग्रेस शुरू से पर्दा डाल रही थी। यही करना था एक दिन। यूपीए की पिछली सरकार ने क्वात्रोची की मदद की। क्वात्रोची के सील खाते खुलवाना शुरूआत थी। लेफ्ट की मदद से किया यह कांग्रेस ने। अब दूसरी बार सरकार बनी। तो बैसाखियां लेफ्ट से भी ज्यादा लाचार। सो सरकार ने तय कर लिया- 'क्वात्रोची के खिलाफ मुकदमे हटा लिए जाएं।' मंगलवार को कोर्ट में बता दिया। तीन अक्टूबर को मुकदमे हटा लेंगे। यह होना ही था। दलाली का आरोप विपक्ष का नहीं था। भारतीय मीडिया का भी नहीं।
एनपीटी-सीटीबीटी पर दस्तखत का दबाव
Mon, 28-Sep-2009अमेरिका ने भारत को एनपीटी-सीटीबीटी करारों के दायरे में लाने के लिए चौतरफे दबाव शुरू कर दिए हैं। मनमोहन सरकार समझती थी कि एनएसजी और आईएईए से छूट मिलने के बाद अब भारत को इन दोनों प्रस्तावों पर दस्तखत की जरूरत नहीं पड़ेगी।
यह सवाल तो तब से उठ रहा है जबसे मनमोहन सरकार अमेरिका के करीब हुई है। लेकिन अब यह सवाल ज्यादा गंभीरता से पूछा जा रहा है- क्या भारत सीटीबीटी पर दस्तखत कर देगा? नरसिंह राव ने सीटीबीटी पर भी वही रुख अपनाया था, जो इंदिरा गांधी ने एनपीटी के समय अपनाया था। नरसिंह राव के बाद सभी प्रधानमंत्रियों ने भी अपने पूर्ववर्ती प्रधानमंत्रियों की ओर से तय की गई विदेश नीति अपनाई। इसलिए कोई अंतरराष्ट्रीय दबाव में नहीं झुका।
तो नेता पुत्रों ने बाजी मार ली दस जनपथ पर
Sat, 26-Sep-2009तो वही हुआ। जिसका सभी को अंदेशा था। सोनिया गांधी नेता पुत्रों के आगे झुक गई। वाईएसआर के बेटे जगनमोहन पर कड़ा रुख अपनाया। तो अपन को लगता था- एसेंबली चुनावों में भी नेता पुत्रों की शामत आएगी। सोनिया के करीबी बता रहे थे- आंध्र से सबक लिया है आलाकमान ने। अब नेता पुत्रों को टिकट देने से पहले दस बार सोचेंगे। दस जनपथ से छन-छनकर खबरें छपती रही- 'हरियाणा-महाराष्ट्र में नेता पुत्रों को टिकट नहीं दिया जाएगा।' हरियाणा में तो सोनिया की घुड़की काफी हद तक काम की। पर महाराष्ट्र में नेताओं की घुड़की ज्यादा काम कर गई।
एटमी पनडुब्बी तैयार अग्नि-5 की भी तैयारी
Fri, 25-Sep-2009माना अपनी सैन्य तैयारियां पूरी नहीं। अपने सैनिकों की हिम्मत में कोई कमी नहीं। पर अपने सैनिक घुड़सवार तो नहीं। जो तलवार भांजते हुए दुश्मनों की छाती पर चढ़ दौड़ेंगे। इक्कसवीं सदी की जंग जहां आधुनिक हथियार मांगेगी। वहां अब कूटनीतिक जंग भी अहम हो चुकी। पहले बात हथियारों की। अपन एयर फोर्स और नेवी प्रमुखों से सहमत। हथियारों की तैयारियां चीन के बराबर नहीं। अपने हथियार सत्तर और अस्सी दशक के। पुराने हथियारों को बदलने की सख्त जरूरत। जरा गौर करिए। चीनी बार्डर पर तैनात हथियार 1974 की खरीद। हथियारों की मारक क्षमता सिर्फ पांच हजार फुट। जमीन से जमीन मारक क्षमता वाले हथियारों की बात करें। अपन ने पहली खरीद अस्सी के दशक में की। दूसरी नब्बे के दशक में। अग्रिम मार वाली तोपों की बात। तो अपन ने आखिरी खरीददारी 1995 में की। पहले बोफोर्स तोप घोटाले ने खरीददारी पर ब्रेक लगाई।
परिवारवाद का जलवा कहीं पूरा, तो कहीं अधूरा
Thu, 24-Sep-2009'टिवटर' के बाद आज 'फेस बुक' की बात। रेखा का भांजा है नवीद अजमन। अपन फिल्मी हिरोइन रेखा की बात कर रहे। मौसी टॉप हिरोइन हो। तो भांजे को उम्मीद होगी ही। जब नेताओं के बेटों-बेटियों को टिकट की उम्मीद। तो नवीद अजमन की उम्मीद फिल्म में रोल था। जब आमिर खान ने अपने भांजे इमरान को फिल्म दिला दी। तो नवीद अजमन की उम्मीद भी जायज। आखिर वह तो आमिर से बड़ी स्टार का भांजा। सो केलिफोर्निया से बड़ी हसरतें पालकर मुंबई पहुंचा था। सालभर मुंबई की खाक छानता रहा। पर रेखा ने धेले की मदद नहीं की। बड़े रुआंसे होकर केलिफोर्निया लौट गए।
तो क्या पाक से पर्दे के पीछे बात का इरादा
Tue, 22-Sep-2009हाफिज मोहम्मद सईद की नजरबंदी हो गई। सोमवार अपने यहां इस खबर की खूब चर्चा रही। पर पाकिस्तान में उतनी चर्चा नहीं दिखी। पाकिस्तानी अखबारों की वेबसाइट में जिक्र तक नहीं हुआ। आखिर लाहौर के पुलिस सुप्रीटेंडेंट सोहेल सुखेरा ने खंडन किया। वह बोले- 'हमने सिर्फ ईद की नमाज करने जाने से रोका। वह भी सईद की सुरक्षा के कारण। नजरबंदी का हमें कोई हुक्म नहीं।' पर अपने यहां चिदम्बरम भी चैनलों की खबर से प्रभावित हुए। अपने चैनलों ने भी खबर पाकिस्तानी चैनलों से उठाई। दोनों देशों के चैनलों में कोई खास फर्क नहीं। यों कृष्णा-कुरैशी की मुलाकात से पहले गिरफ्तारी हो भी जाए। तो ताज्जुब नहीं होगा। आखिर शर्म-अल-शेख में जब मनमोहन-गिलानी मुलाकात होनी थी। तो पाक ने कसाब के पाकिस्तानी होने का कबूलनामा भेज दिया था। अब भी कृष्णा-कुरैशी मुलाकात से पहले सात के चार्जशीट होने की चर्चा। अपनी बात मानो।
सीमाओं पर लापरवाही
Mon, 21-Sep-2009नेहरू की तरह मनमोहन सिंह भी सीमाओं पर चीन की घुसपैठ को वक्त रहते गंभीरता से नहीं ले रहे। अलबत्ता मीडिया पर घुसपैठ को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने का आरोप लगा रहे हैं। सीमाओं पर हमारी सतर्कता और तैयारी आपराधिक लापरवाही की सीमा तक चली गई है।
सितम्बर के शुरू में यह खबरें आनी शुरू हुई थी कि लद्दाख में चीनी सेना घुस आई है। पहले-पहल खबर सिर्फ वायु सीमा अतिक्रमण की थी, पर धीरे-धीरे छनकर खबर आई कि कुछ दिन पहले चीनी सेना ने मेकमाहोन रेखा भी पार की थी। यह घटना एक बार नहीं, बल्कि कई बार हुई थी लेकिन सरकार ने इसे देश की जनता से छुपाए रखा। एक बार चीनी सैनिकों ने हमारे क्षेत्र में घुसकर गडरियों को मारा-पीटा और वहां से चले जाने को कहा। उनका दावा था कि वह क्षेत्र चीन का है, भारत का नहीं। दूसरी बार वे अपने साथ लाल रंग और ब्रुश लाए थे, जिससे उन्होंने पत्थरों पर मेंडरिन भाषा में चीन लिखा।
तो बेबात का तूल लगा मनमोहन को
Sat, 19-Sep-2009तीनों पड़ोसियों की शरारत भरी हरकतों पर सरकार की चुप्पी। शरारत सिर्फ चीन ने नहीं की। पाक और बांलादेश भी कम नहीं। अपन इन तीनों पर बात करेंगे। पर पहले बात कांग्रेस के 'सादगी मंत्र' की। 'सादगी मंत्र' का शिकार नए-नए खिलाड़ी शशि थरूर। पुराने कांग्रेसियों की आंख की किरकिरी तो थे ही थरूर। ऊपर से टिवटरबाजी। पुराने कांग्रेसियों को टिवटरबाजी समझ नहीं आती। पर थरूर से सीख अब मनमोहन भी टिवटर के शौकीन। वैसे टिवटर और फेसबुक अपनी राजनीति में फिट नहीं। सुधींद्र कुलकर्णी ने आडवाणी को सोशल नेटवर्किंग में खूब घुमाया। थरूर इससे ही सबक लेते। नेटवर्किंग में राजनीति का वही हश्र होना था। जो एनडीए का 2004 में 'इंडिया शाइनिंग' से हुआ।
राजनीति में फातिया पढ़ने वाले जरा सोचें
Fri, 18-Sep-2009चार विधानसभाओं के चुनाव सिर पर। अपन महाराष्ट्र, हरियाणा, अरुणाचल के साथ झारखंड भी जोड़ लें। झारखंड के करीब आधी सीटें खाली हो चुकी। अब छह महीने भी नहीं बचे बाकी कार्यकाल में। पर कांग्रेस नौ महीने से सस्पेंड करके बैठी है। बैठी है, वक्त के इंतजार में। दिन अच्छे आएं, तो चुनाव कराएं। अपन को अभिषेक मनु सिंघवी की त्योहारों की दलील खोखली तो लगी। पर चंडूखाने की ज्यादा लगी। त्योहार महाराष्ट्र- हरियाणा- अरुणाचल में भी मनाए जाएंगे। तो झारखंड में चुनाव क्यों नहीं? बीजेपी ने बुधवार को इलेक्शन कमीशन में गुहार लगाई। तो गुरुवार को राष्ट्रपति भवन में जाकर। यों इलेक्शन कमीशन चाहे। तो आज चुनाव का ऐलान कर दे।
सादगी जरूरी, पर सुरक्षा उससे भी ज्यादा जरूरी
Thu, 17-Sep-2009लो अब सादगी की पोल खुलने लगी। मंत्रियों ने केबिनेट में नाक-भौं सिकोड़ी ही थी। उनकी असलियत भी सामने आ गई। अपन ने तो दस सितंबर को ही लिखा था- 'यों कोठियों की रेनोवेशन- रख रखाव से फाइव स्टार सस्ते।' अब अपनी बात की पुष्टि नए खुलासे से हो गई। नया खुलासा मंत्रियों की कोठियों के रेनोवेशन का। उसमें भी खासकर बाथरूम। आनंद शर्मा कभी जननेता नहीं रहे। लोकसभा या विधानसभा चुनाव जीतते तो तब, जब लड़ते। पर सोनिया की कृपा से केबिनेट मंत्री बने। तो उद्योग भवन के दफ्तर का रेनोवेशन देखिए। चौदह लाख 78 हजार रुपया एक कमरे का खर्च हुआ। विलासराव पहली बार केंद्र में आए। महाराष्ट्र के दो बार सीएम रहे। सो खुला खाता रहा। विलासराव ने आनंद शर्मा से कुछ कम खर्च करवाया। चौदह लाख 54 हजार।