August 2009

जूतम-पैजार के 'मंथन' से निकला जूतम-पैजार

बीजेपी के दिन अच्छे नहीं। वरना चिंतन-मंथन बैठक का ऐसा बंटाधार न होता। गए थे हरि भजन को, ओटन लगे कपास। इरादा था- हार के कारणों का मंथन करें। पार्टी में सुधार के बारे में चिंतन करें। पर गुटबाजी खत्म होने का सवाल ही नहीं। गोपीनाथ मुंडे ने मुंबई में मंथन से इंकार करके अच्छा ही किया। वरना महाराष्ट्र में चुनावी माहौल का वैसा ही बाजा बजता। जैसा शरद पवार-दिग्विजय की बयानबाजी से कांग्रेस-एनसीपी का। दिग्विजय सिंह ने फिर कहा- 'एनसीपी का कांग्रेस में विलय हो जाना चाहिए।' इस बार झल्लाकर शरद पवार बोले- 'अगर मैं कहूं, कांग्रेस का एनसीपी में विलय हो जाए। तो कैसा रहेगा।'

निकले, तो बड़े बेआबरू होकर बीजेपी से निकले

शिमला में रिज के पीछे से सड़क जाती है जाखू। जाखू हनुमान का प्राचीन मंदिर। कहावत है- लक्ष्मण मूर्छित हुए। लंका के वैद्य सुशैन ने हिमालय से बूटी लाने को कहा। तो पवनपुत्र समुद्र किनारे से चलकर यहीं आकर रुके थे। बुधवार को जसवंत सिंह बीजेपी से निकाले गए। तो उनने खुद को हनुमान कहा। बोले- 'मुझे पार्टी के हनुमान से रावण बना दिया गया।' जाखू मंदिर के कारण ही खुद को हनुमान समझ बैठे होंगे जसवंत। बुधवार को बीजेपी की चिंतन बैठक शुरू होनी थी। यों हार के तीन महीने बाद चिंतन का क्या मतलब। चिंतन पहले मुंबई में होना था। फिर शिमला तय हुआ। पर चिंतन से पहले नई चिंताओं ने घेर लिया बीजेपी को।