June 2009

सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी युवाओं के प्रति

जो युवा राहुल गांधी के लिए पलक पांवड़े बिछाए हुए हैं, उनके सपने साकार नहीं हुए, तो वे सूपड़ा साफ करने में भी देर नहीं लगाएंगे। कांग्रेस की एक गलती उसे भारी पड़ सकती है।

पंद्रहवीं लोकसभा के साथ संसदीय इतिहास का नया अध्याय शुरू हुआ है। राजीव गांधी प्रचंड जीत के बाद पिछले बीस साल से संसद में भारी राजनीतिक टकराव का वातावरण बना रहा। छह साल सत्ता में रहने के बाद लगातार दूसरी हार ने भाजपा को हताश कर दिया है। वह अब टकराव का रास्ता छोड़ती हुई दिखाई दे रही है। अपनी मां इंदिरा गांधी की हत्या के बाद राजीव गांधी सहानुभूति की लहर पर सवार होकर लोकसभा की 414 सीटें जीतकर ले आए थे। विपक्ष की हालत 1952 से भी बुरी हो गई थी, जब देश का पहला लोकसभा चुनाव हुआ था। राजीव गांधी ने अपने कार्यकाल में अपनी मां की ओर से विरासत में मिली पंजाब, मिजोरम, नगालैंड, मणिपुर जैसी अनेक समस्याओं को हल करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए थे। पड़ोसी देश चीन के साथ संबंध सुधारने के लिए उन्होंने खुद चीन का दौरा किया। ऐसे समय में जब सोवियत संघ का टूटना साफ दिखाई देने लगा था राजीव गांधी ने गुटनिरपेक्ष आंदोलन को जिंदा रखने की कोशिश की थी। उन्होंने देश को एहसास दिलाया था कि युवा नेतृत्व चाहे तो क्या कुछ कर सकता है,

सिर मुड़ाने से अब जहर खाने तक की राजनीति

असल में संसद शुक्रवार को शुरू हुई। पहले ही दिन कोई सदन में सो जाए। वह भी चेयरमैन की कुर्सी पर बैठकर सो जाए। तो इसे अपशकुन न समझें। राज्यसभा में पहले ही दिन यह हो गया। जयंती नटराजन आसन पर बैठी-बैठी सोने लगी। तो अरुण जेटली ने जयंती को चिट भिजवाई- 'सदन में बैठकर सोने पर तब तक किसी को एतराज नहीं होगा। जब तक कोई सो कर खर्राटे न लेने लगे।' अर्दली ने चिट देकर चौंकाया। तो जयंती पढ़कर मुस्कुराई। यह फर्क अब राज्यसभा में अक्सर दिखा करेगा। यही फर्क है जसवंत और जेटली में। जेटली की 'सेंस आफ ह्यूमर' का जवाब नहीं। पर जेटली जब हमले करने को आएं। तो सामने वाले की बखियां उधेड़कर रख दें। यों तो जेटली जनता के फैसले पर फूल चढ़ाने की तैयारी से आए थे। 

दो राष्ट्रपति, दो भाषण वादा देश-दुनिया बदलने का

अपनी राष्ट्रपति का इस साल दूसरा अभिभाषण हुआ। हर साल के पहले सेशन में तो अभिभाषण होता ही है। नई लोकसभा चुनकर आए, तब भी अभिभाषण। सो 2004 के बाद 2009 में ऐसा हुआ। अपन जहां अपनी राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील के अभिभाषण की बात करें। वहीं गुरुवार को एक और राष्ट्रपति का भाषण हुआ। जिसकी चर्चा दुनियाभर में। यह हैं- अमेरिकी राष्ट्रपति बाराक हुसैन ओबामा। अपन पहले भी इसी कालम में लिख चुके- बाराक ओबामा के पिता मुस्लिम थे। अब जब पूरी दुनिया के मुसलमान अमेरिका के खिलाफ। तो अपन को बाराक ओबामा से ही कुछ उम्मीद थी। सो ओबामा ने गुरुवार को मिश्र की राजधानी काहिरा जाकर शुरूआत की।

राजनाथ-आडवाणी-अरुण की तिकड़ी छह महीने ही

ज्योति बाबू-अटल बिहारी की रिटायरमेंट के बाद करुणानिधि ही सबसे बुजुर्ग नेता। अपन यह कहें- करुणानिधि सबसे बुजुर्ग एक्टिव नेता। तो गलत नहीं होगा। वाजपेयी-ज्योति बाबू के बाद अब रिटायरमेंट की बारी करुणानिधि की। करुणानिधि बुधवार को 86 साल के हो गए। तो बधाईयों का तांता लगा। करुणानिधि संन्यास का ऐलान कर ही देते। तो अच्छा रहता। जैसे वाजपेयी ने बीजेपी के मुंबई अधिवेशन में किया था। जैसे ज्योति बाबू ने सीएम पद की कुर्सी छोड़कर किया था। करुणानिधि बुधवार को ज्योतिबाबू का अनुसरण करते। तो हिस्ट्री में ज्योतिबाबू के बाद नाम लिखा लेते। यों करुणानिधि अपना राजनैतिक वारिस अपने बेटे स्टालिन को बना चुके। पिछले हफ्ते की ही तो बात। अब एसेंबली इलेक्शन में स्टालिन सीएम प्रोजेक्ट होंगे। मनमोहन-सोनिया की बधाई तो बनती थी। सो उनने दी। बधाई आडवाणी और डी राजा ने भी भेजी। पर बात जब राजनैतिक बुजुर्गों की चले।

स्पीकर-डिप्टी स्पीकर पर भी जातिवादी तड़का

तो बीजेपी ने अपना मन बदल दिया। सुमित्रा महाजन की बजाए अब करिया मुंडा डिप्टी स्पीकर होंगे। ब्राह्मण की जगह आदिवासी। यों महिला डिप्टी स्पीकर का आइडिया बीजेपी का था। जिसे कांग्रेस ने चुरा लिया। यों कांग्रेस ने पहले आदिवासी केशव देव को स्पीकर बनाना था। बीजेपी का आइडिया देख कांग्रेस ने मोर्चा मारा। केशव देव की बनी बनाई बात बिगड़ गई। कोर कमेटी में सोनिया ने कहा- 'क्यों न महिला स्पीकर बनाई जाए। हमने पहले महिला राष्ट्रपति बनाई।' अब सोनिया कहे, तो टोकने की हिम्मत कौन करे। महिलाओं पर विचार शुरू हुआ। तो टारगेट राहुल पर आकर अटका। तो वहां सिर्फ एक ही महिला तो जीतकर आई। मीरा कुमार, दलित भी। तो कांग्रेस के लिए यह सोने पर सुहागा हो गया। कांग्रेस ने दलित महिला कार्ड खेला। तो बीजेपी को भी टारगेट झारखंड का ख्याल आया। झारखंड के चुनाव बस आए-कि- आए। तो कांग्रेस के दलित कार्ड पर बीजेपी का आदिवासी कार्ड।

चेहरा, चाल और चरित्र भी बदलना होगा

भाजपा के दो पावर सेंटर पार्टी की हार का कारण बने। कांग्रेस खुद को और मजबूत करने में लगी है, जबकि भाजपा अभी भी गुटबाजी का शिकार। चेहरे और चाल के साथ चरित्र भी बदलना होगा भाजपा को। भाजपा सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को छोड़कर राजनीतिक राष्ट्रवाद अपनाए, तो उसका आधार ज्यादा व्यापक हो सकता है।

मनमोहन सिंह का मंत्रिमंडल बन जाने के बाद अब सोनिया गांधी का ध्यान कांग्रेस की तरफ लग गया है। इस बार कांग्रेस संगठन के बदलाव में राहुल गांधी की अहम भूमिका होगी। राहुल गांधी ने अपने भारत दर्शन के दौरान संगठन के ढांचे और पदों पर बैठे नेताओं की कार्यशैली को बारीकी से देखा है। सरकार बन जाने के बाद राहुल गांधी अपना भारत दर्शन फिर से चालू करने वाले हैं। उनके इस बार के भारत दर्शन में काफी बदलाव देखने को मिलेगा। वह जहां भी जाएंगे उनका स्वागत 1975 से 1977 के समय हुए संजय गांधी के स्वागत की याद ताजा करेगा। अब वह उतने ही ताकतवर हो गए हैं, जितने उस समय संजय गांधी हो गए थे।

India Gate se Sanjay Uvach

Wed, 14 Dec 2011

जनसत्ता 14 दिसंबर, 2011:  पिछले दिनों दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में एक अत्यंत गंभीर विषय पर चर्चा हुई। विषय था, देश में बच्चों के अपहरण की बढ़ रही घटनाएं। विषय की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि बच्चों के अपहरण पर शोध आधारित पुस्तक का विमोचन करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश अल्तमस कबीर खुद मौजूद थे। इस गंभीर समस्या का सनसनीखेज खुलासा 1996 में हुआ था, जब यूनिसेफ ने भारत में बच्चों के देह-शोषण पर एक रिपोर्ट जारी की थी। बी भामती की इस रिपोर्ट